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जब तक सक्षम प्राधिकरण उचित निर्णय नहीं लेता, नहीं हटेंगे खोखे

Fri, 17 Sep 2021 11:26 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Sep 2021 11:26 PM IST
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Unless the competent authority takes a proper decision, the kiosks will not be removed
हमीरपुर बस स्टैंड के किनारे खोखा मार्केट। - फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। जिला मुख्यालय पर बस स्टैंड के समीप सड़क किनारे खोखों को हटाने के मामले पर प्रदेश उच्च न्यायालय में सुनवाई पूरी हो गई है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तिरलोक चौहान और सतैन वैद्य ने इस मामले को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं को इस मामले को निचले स्तर पर सक्षम प्राधिकरण के पास प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। अब जिलास्तर पर सक्षम प्राधिकरण ही इस मामले में अंतिम निर्णय लेंगे। प्रदेश उच्च न्यायालय में खोखाधारकों ने इस मामले में प्रदेश शहरी विकास विभाग के सचिव, उपायुक्त हमीरपुर, एसडीएम हमीरपुर, नगर परिषद और लोनिवि के खिलाफ याचिका दायर की थी।
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खोखाधारकों जोगिंद्र पाल, शांति स्वरूप, अमर चंद, विपिन कुमार, जोगिंद्र सिंह, परमानंद, कमलेश कुमारी ठाकुर और अश्वनी कुमार ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुए बताया था कि हमीरपुर में सड़क किनारे करीब 40 साल पहले नगर परिषद ने 58 खोखों का निर्माण करवाकर रेहड़ी-फड़ी वालों को इन्हें आवंटित किया था। नगर परिषद इन खोखा धारकों से प्रतिमाह किराया भी वसूलती रही। करीब दस साल पहले इन खोखों को हटाकर दुकानदारों के लिए स्कूल मैदान के साथ पक्की दुकानों का निर्माण किया गया। बीते वर्ष प्रशासन ने पहले आओ पहले पाओ के आधार पर खोखाधारकों को शॉपिंग कांप्लेक्स में दुकानें हासिल करने के लिए आवेदन करने के लिए कहा।
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जिसके चलते करीब 36 खोखाधारकों ने आवेदन कर शॉपिंग कांप्लेक्स में पक्की दुकानें हासिल कर लीं, लेकिन 12 दुकानदारों ने पक्की दुकानों के आवंटन में धांधली के आरोप लगाते हुए क्रमवार दुकानों का आवंटन करने की मांग उठाई। मांग पूरी न होने पर लोक निर्माण विभाग ने इन खोखाधारकों को जगह खाली करने के लिए नोटिस जारी किया। नोटिस के खिलाफ करीब आधा दर्जन खोखाधारक बीते माह उच्च न्यायालय चले गए। जहां से उन्हें स्टे मिल गया। लेकिन, वीरवार को उच्च न्यायालय ने खोखाधारकों को जिला स्तर पर सक्षम प्राधिकरण के पास याचिका दायर करने के लिए कहा। उच्च न्यायालय ने अपने आदेशों में यह भी कहा कि जब तक इस मामले में सक्षम प्राधिकरण अंतिम निर्णय नहीं लेता, तब तक खोखाधारकों को वहां से न हटाया जाए।
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