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Hamirpur (Himachal) News: मिड-डे मील वर्कर निकालने का यूनियन ने किया विरोध
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कहा, सरकार समस्याओं पर करे विचार, अन्यथा करेंगे आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। 20 वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे मिड-डे मील वर्कर्स को निकालने का यूनियन ने विरोध किया है। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के जिलाध्यक्ष रत्न चंद ने प्रदेश सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा की है। सीटू यूनियन से मिड-डे मील संगठन के जिला प्रभारी रंजन शर्मा ने कहा कि मर्ज किए स्कूलों के अध्यापकों और चपरासियों को तो एडजस्ट किया गया लेकिन मिड-डे मील वर्कर्स को घर बैठा दिया गया। रत्न चंद ने कहा कि सरकार का भेदभाव का रवैया इनके रोजगार पर चोट कर रहा है। सरकार इस मसले को अति गंभीर समझे और मिड-डे वर्कर्स के रोजगार को न छीने। इनके वेतन में भी सरकार ने जबरदस्त विसंगतियां जारी रखी हैं। किसी माह 3100 रुपये और किसी माह 3500 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। जो इनके हितों के साथ कुठाराघात है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। 20 वर्षों से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे मिड-डे मील वर्कर्स को निकालने का यूनियन ने विरोध किया है। मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के जिलाध्यक्ष रत्न चंद ने प्रदेश सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा की है। सीटू यूनियन से मिड-डे मील संगठन के जिला प्रभारी रंजन शर्मा ने कहा कि मर्ज किए स्कूलों के अध्यापकों और चपरासियों को तो एडजस्ट किया गया लेकिन मिड-डे मील वर्कर्स को घर बैठा दिया गया। रत्न चंद ने कहा कि सरकार का भेदभाव का रवैया इनके रोजगार पर चोट कर रहा है। सरकार इस मसले को अति गंभीर समझे और मिड-डे वर्कर्स के रोजगार को न छीने। इनके वेतन में भी सरकार ने जबरदस्त विसंगतियां जारी रखी हैं। किसी माह 3100 रुपये और किसी माह 3500 रुपये का भुगतान किया जा रहा है। जो इनके हितों के साथ कुठाराघात है।