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Hamirpur (Himachal) News: लावारिस पशुओं ने कई लोगों को मौत के मुंह में धकेला, इन्हें पकड़ गो अभ्यारण्य खैरी पहुंचाया, अब वह भी फुल
Sat, 01 Feb 2025 12:31 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 01 Feb 2025 12:31 AM IST
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सुजानपुर चौगान में कचरे के ढेर के पास चरती गाय। संवाद।
- फोटो : संवाद
हमीरपुर, सुजानपुर। जिले में लावारिस पशुओं के हमले की घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं। जिले के हर कोने में लावारिस पशुओं के हमले से लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हालांकि प्रशासन और संबंधित विभागों के पास इन हमलों को लेकर कोई औपचारिक आंकड़ा नहीं है कि लावारिस पशुओं के हमले से जिले में कितने लोगों की मौत हुई है और कितने लोग घायल हुए हैं। जिले में पिछले तीन से चार वर्षों में आधा दर्जन से अधिक मामले सामने आए हैं, जिसमें लावारिस पशुओं ने लोगों को मौत के मुंह में पहुंचा दिया है।
जुलाई 2023 में जिला मुख्यालय से सटे घिरथेड़ी में एक सांड के हमले में स्थानीय बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बुजुर्ग की आंते तक हमले के चलते पेट से बाहर आ गई थीं। बाद में इस सांड को रेस्क्यू कर गो अभ्यारण्य खैरी भेजा गया। ऐसे ही मामले नादौन, रंगस, जाहू, बड़सर, भोटा और सुजानपुर में बीते दो तीन वर्षों में सामने आए है।
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खास बात यह है कि हमला करने वाले पशुओं को गो अभ्यारण्य खैरी में भेजा जा रहा है। यहां पर गायों से अधिक बैलों की संख्या हो गई है। अभ्यारण्य में क्षमता से अधिक 450 के करीब पशु जमा हो गए हैं। यहां पर संसाधनों की कमी भारी पड़ रही है। लगातार लावरिस पशुओं का दवाब बढ़ रहा है, लेकिन गो अभ्यारण्य में सुविधाएं सीमित हैं।
सुजानपुर चौगान में हमले का अधिक खतरा
सुजानपुर के चौगान में लावारिस पशुओं के हमले का खतरा अधिक रहता है। यहां पर गला-सड़ा कचरा खाते यह पशु कब चौगान में घूमने वाले लोगों पर हमला बोल दें, यह कोई नहीं जानता। हालांकि यहां से कई पशुओं को गो अभ्यारण्य ले जाया जा चुका है, लेकिन वहां पर क्षमता से अधिक पशु होने से अब समस्या बढ़ गई है।
गो अभ्यारण्य में बैल अधिक और गाय कम
जिले के एकमात्र गो अभ्यारण्य में बैल अधिक हैं, जबकि गायों की संख्या नाममात्र है। यहां पर पशुओं के लिए बने शैड में खुरलियों और पंखों की सुविधा है, लेकिन बाहर आउटडोर में खुरलियों की सुविधा नहीं है। खूंटों की व्यवस्था भी सही नहीं है। पेड़ों के सहारे पशुओं को लंबी रस्सियों के साथ बांधा गया है।
कोट
गो अभ्यारण्य में पशुओं की सेहत का ध्यान रखा जा रहा है। चारा इत्यादि की व्यवस्था की जा रही है। लोगों से अपील है कि वह इसमें सहयोग करें।
-रोहित शर्मा, एसडीएम, सुजानपुर
पशुओं के हमले से हाल फिलहाल में कोई भी मौत की घटना सामने नहीं आई है। जिन जगहों पर पशुओं के हमले की घटना सामने आती हैं, वहां पर पशुओं को रेस्क्यू कर गो अभ्यारण्य में छोड़ा जाता है।
-राहुल चौहान, कार्यकारी डीसी एवं एडीएम, हमीरपुर
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हालांकि प्रशासन और संबंधित विभागों के पास इन हमलों को लेकर कोई औपचारिक आंकड़ा नहीं है कि लावारिस पशुओं के हमले से जिले में कितने लोगों की मौत हुई है और कितने लोग घायल हुए हैं। जिले में पिछले तीन से चार वर्षों में आधा दर्जन से अधिक मामले सामने आए हैं, जिसमें लावारिस पशुओं ने लोगों को मौत के मुंह में पहुंचा दिया है।
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जुलाई 2023 में जिला मुख्यालय से सटे घिरथेड़ी में एक सांड के हमले में स्थानीय बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बुजुर्ग की आंते तक हमले के चलते पेट से बाहर आ गई थीं। बाद में इस सांड को रेस्क्यू कर गो अभ्यारण्य खैरी भेजा गया। ऐसे ही मामले नादौन, रंगस, जाहू, बड़सर, भोटा और सुजानपुर में बीते दो तीन वर्षों में सामने आए है।
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खास बात यह है कि हमला करने वाले पशुओं को गो अभ्यारण्य खैरी में भेजा जा रहा है। यहां पर गायों से अधिक बैलों की संख्या हो गई है। अभ्यारण्य में क्षमता से अधिक 450 के करीब पशु जमा हो गए हैं। यहां पर संसाधनों की कमी भारी पड़ रही है। लगातार लावरिस पशुओं का दवाब बढ़ रहा है, लेकिन गो अभ्यारण्य में सुविधाएं सीमित हैं।
सुजानपुर चौगान में हमले का अधिक खतरा
सुजानपुर के चौगान में लावारिस पशुओं के हमले का खतरा अधिक रहता है। यहां पर गला-सड़ा कचरा खाते यह पशु कब चौगान में घूमने वाले लोगों पर हमला बोल दें, यह कोई नहीं जानता। हालांकि यहां से कई पशुओं को गो अभ्यारण्य ले जाया जा चुका है, लेकिन वहां पर क्षमता से अधिक पशु होने से अब समस्या बढ़ गई है।
गो अभ्यारण्य में बैल अधिक और गाय कम
जिले के एकमात्र गो अभ्यारण्य में बैल अधिक हैं, जबकि गायों की संख्या नाममात्र है। यहां पर पशुओं के लिए बने शैड में खुरलियों और पंखों की सुविधा है, लेकिन बाहर आउटडोर में खुरलियों की सुविधा नहीं है। खूंटों की व्यवस्था भी सही नहीं है। पेड़ों के सहारे पशुओं को लंबी रस्सियों के साथ बांधा गया है।
कोट
गो अभ्यारण्य में पशुओं की सेहत का ध्यान रखा जा रहा है। चारा इत्यादि की व्यवस्था की जा रही है। लोगों से अपील है कि वह इसमें सहयोग करें।
-रोहित शर्मा, एसडीएम, सुजानपुर
पशुओं के हमले से हाल फिलहाल में कोई भी मौत की घटना सामने नहीं आई है। जिन जगहों पर पशुओं के हमले की घटना सामने आती हैं, वहां पर पशुओं को रेस्क्यू कर गो अभ्यारण्य में छोड़ा जाता है।
-राहुल चौहान, कार्यकारी डीसी एवं एडीएम, हमीरपुर

सुजानपुर चौगान में कचरे के ढेर के पास चरती गाय। संवाद।- फोटो : संवाद