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Hamirpur (Himachal) News: मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में अल्ट्रासाउंड मशीन खराब, मरीज परेशान
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सुबह मशीन खराब होने से हो रही है खासी दिक्कत
आपातकालीन में आए मरीजों को निजी लैबों की तरफ करना पड़ रहा रुख
पूर्व में भी कई बार खराब हो चुकी है मशीन, मरीज होते हैं परेशान
अस्पताल में एक्सरे और लेप्रोस्कोपिक मशीन पहले से ही पड़ी है खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को कॉलेज का दर्जा तो मिल गया है लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण यहां मरीज हर रोज परेशान हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक और टेस्ट मशीनों का होना आवश्यक है, लेकिन यहां चिकित्सकों की भी कमी हैं और मशीनें भी खराब हैं। ऐसे में अब मरीज स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए खासे परेशान हो रहे हैं। अस्पताल में मंगलवार को अल्ट्रासाउंड की मशीन भी खराब हो गई। एक्सरे की मशीन पिछले 15 दिन से खराब है और लेप्रोस्कोपिक मशीन तो एक वर्ष से भी अधिक समय से खराब पड़ी है। इस अस्पताल में इलाज के लिए दूरदराज क्षेत्र से मरीज आते हैं, लेकिन अब वह यहां से मायूस होकर लौट रहे हैं। न ही पूरा इलाज मिल पा रहा है और न ही चिकित्सक मिल पा रहे हैं। मंगलवार को अल्ट्रासाउंड मशीन खराब हो गई। इससे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को खासी परेशानी हुई। मरीज अस्पताल के बाहर निजी लैबों में अल्ट्रासाउंड करवाने को मजबूर हो गए हैं। निजी लैबों में उन्हें अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए 500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। रेडियोलॉजी विभाग में मरीजों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ती है। कुछ समय पहले यहां पर महज दो चिकित्सक बचे थे। इनमें एक दिन में और एक रात में अपनी ड्यूटी देने को मजबूर हो गए थे।
बाद में बड़ी मुश्किल से दो चिकित्सक यहां पर नियुक्त किए। इससे मरीजों को थोड़ी राहत मिली, लेकिन अभी भी मरीजों को दो-दो माह बाद की तारीख अल्ट्रासाउंड के लिए दी जाती है। ऐसे में अब मशीन ही खराब हो गई है। मरीज इधर-उधर भटकने को मजबूर हो गए हैं। अल्ट्रासाउंड की मशीन पहले भी कई बार खराब हो चुकी है। अस्पताल में पहले से ही एक्सरे मशीन, लेप्रोस्कोपिक मशीन भी खराब है लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन मशीनों को ठीक करवाने की जहमत नहीं उठा रहा। ऐसे में मरीज खासे परेशान हो गए हैं। मरीजों विजय, संतोष, कुसुम, नीलम, नीता, रामप्यारी, शकुंतला आदि ने कहा कि अस्पताल इतने दूर से आते हैं और यहां आकर कहा जाता है कि मशीन खराब है। इससे समय और रुपये दोनों की खराबी होती है जबकि यह जिला स्तरीय अस्पताल है। यहां पर मशीनें ही खराब हो चुकी हैं। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि मशीन 24 घंटे चलती है तो कभी खराब भी हो सकती है। अगर मशीन खराब है तो ठीक करवा दी जाएगी।
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आपातकालीन में आए मरीजों को निजी लैबों की तरफ करना पड़ रहा रुख
पूर्व में भी कई बार खराब हो चुकी है मशीन, मरीज होते हैं परेशान
अस्पताल में एक्सरे और लेप्रोस्कोपिक मशीन पहले से ही पड़ी है खराब
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को कॉलेज का दर्जा तो मिल गया है लेकिन मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण यहां मरीज हर रोज परेशान हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सक और टेस्ट मशीनों का होना आवश्यक है, लेकिन यहां चिकित्सकों की भी कमी हैं और मशीनें भी खराब हैं। ऐसे में अब मरीज स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए खासे परेशान हो रहे हैं। अस्पताल में मंगलवार को अल्ट्रासाउंड की मशीन भी खराब हो गई। एक्सरे की मशीन पिछले 15 दिन से खराब है और लेप्रोस्कोपिक मशीन तो एक वर्ष से भी अधिक समय से खराब पड़ी है। इस अस्पताल में इलाज के लिए दूरदराज क्षेत्र से मरीज आते हैं, लेकिन अब वह यहां से मायूस होकर लौट रहे हैं। न ही पूरा इलाज मिल पा रहा है और न ही चिकित्सक मिल पा रहे हैं। मंगलवार को अल्ट्रासाउंड मशीन खराब हो गई। इससे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को खासी परेशानी हुई। मरीज अस्पताल के बाहर निजी लैबों में अल्ट्रासाउंड करवाने को मजबूर हो गए हैं। निजी लैबों में उन्हें अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए 500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। रेडियोलॉजी विभाग में मरीजों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ती है। कुछ समय पहले यहां पर महज दो चिकित्सक बचे थे। इनमें एक दिन में और एक रात में अपनी ड्यूटी देने को मजबूर हो गए थे।
बाद में बड़ी मुश्किल से दो चिकित्सक यहां पर नियुक्त किए। इससे मरीजों को थोड़ी राहत मिली, लेकिन अभी भी मरीजों को दो-दो माह बाद की तारीख अल्ट्रासाउंड के लिए दी जाती है। ऐसे में अब मशीन ही खराब हो गई है। मरीज इधर-उधर भटकने को मजबूर हो गए हैं। अल्ट्रासाउंड की मशीन पहले भी कई बार खराब हो चुकी है। अस्पताल में पहले से ही एक्सरे मशीन, लेप्रोस्कोपिक मशीन भी खराब है लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन मशीनों को ठीक करवाने की जहमत नहीं उठा रहा। ऐसे में मरीज खासे परेशान हो गए हैं। मरीजों विजय, संतोष, कुसुम, नीलम, नीता, रामप्यारी, शकुंतला आदि ने कहा कि अस्पताल इतने दूर से आते हैं और यहां आकर कहा जाता है कि मशीन खराब है। इससे समय और रुपये दोनों की खराबी होती है जबकि यह जिला स्तरीय अस्पताल है। यहां पर मशीनें ही खराब हो चुकी हैं। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि मशीन 24 घंटे चलती है तो कभी खराब भी हो सकती है। अगर मशीन खराब है तो ठीक करवा दी जाएगी।
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