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मेडिकल की पढ़ाई छोड़ यूक्रेन से हमीरपुर लौटे एमबीबीएस के दो प्रशिक्षु
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यूक्रेन से घर लौटी ऐश्वर्या नंदा अपने परिजनों के साथ।
- फोटो : Hamirpur-HP
रंगस (नादौन)। रूस की ओर से यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ने पर वहां के हालात काफी खराब हो गए हैं। वहां रहने वाले लोग स्वदेश लौटने लगे हैं। इनमें अधिकतर मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी शामिल हैं। हमीरपुर से भी 23 लोग यूक्रेन में हैं, जिनमें से 21 एमबीबीएस की प्रशिक्षु हैं। उपमंडल नादौन के धनेटा क्षेत्र की ऐश्वर्या नंदा पुत्री राजेश नंदा पिछले 4 वर्षों से यूक्रेन मेडिकल यूनिवर्सिटी से अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी। वर्तमान में यूक्रेन से पढ़ाई को बीच में ही छोड़कर उसे स्वदेश लौटना पड़ा। अमर उजाला से बातचीत में ऐश्वर्या नंदा ने बताया कि यूक्रेन में हालात बिगड़ते ही दोगुने दाम पर हवाई जहाज की टिकट बुक कर वह 21 फरवरी को शाम 5.00 बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंची।
वहां पर कुछ देर आराम करने के बाद वह बुधवार को अपने घर धनेटा पहुंची हैं। अपने प्रयासों से ही बड़ी मुश्किल से अपने घर पहुंचे हैं। ऐश्वर्या ने कहा कि पिछले काफी दिनों से कॉलेज की पढ़ाई भी सुचारु रूप से नहीं चल रही थी। इसलिए उसने सुरक्षित घर आना ही उचित समझा। वहीं, धनेटा क्षेत्र के ही अभिषेक शर्मा पुत्र अनिल शर्मा ने बताया कि लगभग चार महीने पहले ही यूक्रेन में एमबीबीएस करने गया था। वहां पर बुकोवियन मेडिकल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था। उसके बाद अचानक हालात के बिगड़ने पर दुर्भाग्यवश उन्हें स्वदेश लौटना पड़ा। उसने बताया कि यूक्रेन में वर्तमान समय में पढ़ाई का माहौल बिल्कुल भी नहीं है। इसलिए जल्द से जल्द सभी भारतीय बच्चे जैसे-तैसे सुरक्षित अपने घर लौटने का प्रयास कर रहे हैं।
अभिषेक के पिता अनिल शर्मा हिमाचल प्रदेश लेक्चरर संघ के जिला हमीरपुर के प्रधान भी हैं तथा वर्तमान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल कांगू में बतौर प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। वीरवार को सुबह 11:00 बजे भी यूक्रेन के कीवी एयरपोर्ट से भारतीय बच्चों को लाने वाले जहाज को फ्लाइट की अनुमति नहीं मिली। जिससे वहां पर मौजूद भारतीय बच्चों के माता-पिता का तनाव और भी बढ़ गया है। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले भारतीय बच्चों की ओर से वीडियो शेयर करने से पता चला है कि वहां पर इमरजेंसी लग गई है। वहां पर सभी प्रवासियों को अपने बैग रेडी रखने के साथ आदेश मिलते ही आधे घंटे के अंदर भागने का फरमान जारी हो गया है। साथ ही वहां पर कोई भी नेटवर्क जैसे वाईफाई की सुविधा भी बंद हो गई है। खाने पीने की सुविधा भी नाममात्र की है। भारतीय मूल की एक छात्रा ने सोशल मीडिया पर वीडियो के माध्यम से एक संदेश डाला है कि यूक्रेन में आज मार्शल ला और इमरजेंसी लॉ लगने के एकदम आदेश प्राप्त हुए हैं और हजारों बच्चे अभी यहां पर फंसे हुए हैं।
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वहां पर कुछ देर आराम करने के बाद वह बुधवार को अपने घर धनेटा पहुंची हैं। अपने प्रयासों से ही बड़ी मुश्किल से अपने घर पहुंचे हैं। ऐश्वर्या ने कहा कि पिछले काफी दिनों से कॉलेज की पढ़ाई भी सुचारु रूप से नहीं चल रही थी। इसलिए उसने सुरक्षित घर आना ही उचित समझा। वहीं, धनेटा क्षेत्र के ही अभिषेक शर्मा पुत्र अनिल शर्मा ने बताया कि लगभग चार महीने पहले ही यूक्रेन में एमबीबीएस करने गया था। वहां पर बुकोवियन मेडिकल यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था। उसके बाद अचानक हालात के बिगड़ने पर दुर्भाग्यवश उन्हें स्वदेश लौटना पड़ा। उसने बताया कि यूक्रेन में वर्तमान समय में पढ़ाई का माहौल बिल्कुल भी नहीं है। इसलिए जल्द से जल्द सभी भारतीय बच्चे जैसे-तैसे सुरक्षित अपने घर लौटने का प्रयास कर रहे हैं।
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अभिषेक के पिता अनिल शर्मा हिमाचल प्रदेश लेक्चरर संघ के जिला हमीरपुर के प्रधान भी हैं तथा वर्तमान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल कांगू में बतौर प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। वीरवार को सुबह 11:00 बजे भी यूक्रेन के कीवी एयरपोर्ट से भारतीय बच्चों को लाने वाले जहाज को फ्लाइट की अनुमति नहीं मिली। जिससे वहां पर मौजूद भारतीय बच्चों के माता-पिता का तनाव और भी बढ़ गया है। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले भारतीय बच्चों की ओर से वीडियो शेयर करने से पता चला है कि वहां पर इमरजेंसी लग गई है। वहां पर सभी प्रवासियों को अपने बैग रेडी रखने के साथ आदेश मिलते ही आधे घंटे के अंदर भागने का फरमान जारी हो गया है। साथ ही वहां पर कोई भी नेटवर्क जैसे वाईफाई की सुविधा भी बंद हो गई है। खाने पीने की सुविधा भी नाममात्र की है। भारतीय मूल की एक छात्रा ने सोशल मीडिया पर वीडियो के माध्यम से एक संदेश डाला है कि यूक्रेन में आज मार्शल ला और इमरजेंसी लॉ लगने के एकदम आदेश प्राप्त हुए हैं और हजारों बच्चे अभी यहां पर फंसे हुए हैं।
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