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Hamirpur (Himachal) News: नगर परिषद सुजानपुर के डिफाल्टरों के पास सवा दो करोड़ रुपये फंसे
Mon, 03 Nov 2025 12:29 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 03 Nov 2025 12:29 AM IST
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सुजानपुर(हमीरपुर)। नगर परिषद सुजानपुर के अंतर्गत डिफाल्टर करदाताओं और किरायेदारों की मनमानी विकास कार्यों पर हावी हो रही है। लंबे समय से गृहकर, दुकानों के किराये अैर कूड़े के शुल्क के भुगतान में आनाकानी के कारण कर्मचारियों को वसूली में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, नगर परिषद की ओर से कई बार इन्हें नोटिस भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक किराये, गृहकर की पूर्णतया उगाही नहीं हो पाई है। ऐसे में लेनदारी का आकंडा सवा दो करोड़ पहुंच गया है। नगर परिषद सुजानपुर की ओर से मुख्य बाजार में 132 दुकानों का निर्माण कर उन्हें किराये पर आवंटित किया गया है।
प्रत्येक वर्ष दुकानों से नगर परिषद को 29 लाख रुपये की आय होती है, लेकिन आधा दर्जन से अधिक दुकानदारों ने लंबे समय से किराये का भुगतान नहीं किया है। ऐसे में दुकानों का लंबित किराया एक करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, अलग से 65 के करीब रेहडी धारकों के पास भी 10 लाख रुपये किराये के रूप में फंसे हुए हैं।
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इसके साथ ही शहर के 11 वार्डों में 30 लाख रुपये गृहकर, जबकि पिछले पांच वर्षों से कचरा शुल्क का 85 लाख रुपये लेने को है। नगर परिषद की ओर से गृहकर, दुकानों के किराये और कचरा शुल्क आदि से वार्डों में विकास कार्य, कर्मचारियों का वेतन आदि का भुगतान किया जाता है, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण डिफाल्टर दुकानदार, करदाता भुगतान में आनाकानी कर रहे हैं।
कुल मिलाकर तीनों आय के साधनों से सवा दो करोड़ का लेनदारी का आंकड़ा पहुंच गया है।
कोट
डिफाल्टर करदाताओं, दुकानदारों को नोटिस भेजे गए थे, लेकिन अभी तक किराये और कर की वसूली नहीं हो पाई हैं। कर्मचारियों को उगाही के लिए लगाया गया है। सभी से समय पर भुगतान करने का अनुरोध किया है, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या न हो।
-रमन शर्मा, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद सुजानपुर
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हालांकि, नगर परिषद की ओर से कई बार इन्हें नोटिस भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक किराये, गृहकर की पूर्णतया उगाही नहीं हो पाई है। ऐसे में लेनदारी का आकंडा सवा दो करोड़ पहुंच गया है। नगर परिषद सुजानपुर की ओर से मुख्य बाजार में 132 दुकानों का निर्माण कर उन्हें किराये पर आवंटित किया गया है।
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प्रत्येक वर्ष दुकानों से नगर परिषद को 29 लाख रुपये की आय होती है, लेकिन आधा दर्जन से अधिक दुकानदारों ने लंबे समय से किराये का भुगतान नहीं किया है। ऐसे में दुकानों का लंबित किराया एक करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं, अलग से 65 के करीब रेहडी धारकों के पास भी 10 लाख रुपये किराये के रूप में फंसे हुए हैं।
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इसके साथ ही शहर के 11 वार्डों में 30 लाख रुपये गृहकर, जबकि पिछले पांच वर्षों से कचरा शुल्क का 85 लाख रुपये लेने को है। नगर परिषद की ओर से गृहकर, दुकानों के किराये और कचरा शुल्क आदि से वार्डों में विकास कार्य, कर्मचारियों का वेतन आदि का भुगतान किया जाता है, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण डिफाल्टर दुकानदार, करदाता भुगतान में आनाकानी कर रहे हैं।
कुल मिलाकर तीनों आय के साधनों से सवा दो करोड़ का लेनदारी का आंकड़ा पहुंच गया है।
कोट
डिफाल्टर करदाताओं, दुकानदारों को नोटिस भेजे गए थे, लेकिन अभी तक किराये और कर की वसूली नहीं हो पाई हैं। कर्मचारियों को उगाही के लिए लगाया गया है। सभी से समय पर भुगतान करने का अनुरोध किया है, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या न हो।
-रमन शर्मा, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद सुजानपुर