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Hamirpur (Himachal) News: ट्रेड यूनियनों ने मजदूरों के लाभ बंद करने का किया विरोध
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हमीरपुर। प्रदेश में श्रमिक कल्याण बोर्ड से मनरेगा और निर्माण मजदूरों के लाभ बंद करने के विरोध में शनिवार को सभी ट्रेड यूनियनों ने उपायुक्त हमीरपुर हेमराज बैरवा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
इस दौरान प्रदेश भवन सड़क निर्माण मजदूर यूनियन संबंधित सीटू के राज्य अध्यक्ष जोगिंद्र कुमार, जिला सचिव रंजन शर्मा, सीटू के जिले के वित्त सचिव जितेंद्र धीमान, उतम, बौबी, प्रवीण, रेखा, भारतीय मजदूर संघ से जिलाध्यक्ष तिलक राज शर्मा, प्रदीप कुमार राणा, अनीता और इंटक की तरफ से कर्म चंद जस्सल, रमेश चंद व प्रताप सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों निर्माण व मनरेगा मजदूरों को श्रमिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से मिलने वाली मदद को बंद कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश में 2 मार्च 2009 को श्रमिक कल्याण बोर्ड बना और वर्ष 2012 में मजदूरों का सुचारू रूप से पंजीकरण शुरू हुआ। तब से लेकर दिसंबर 2022 तक लगातार मजदूरों के बच्चों को पढ़ने के लिए वजीफा, बच्चों की शादी के लिए आर्थिक मदद, मृत्यु होने पर आर्थिक मदद, बुढ़ापे में पेंशन, परिवार का इलाज जैसी तमाम सामाजिक सुविधाएं शुरू की गई थीं। एक गरीब मजदूर आदमी भी अपने बच्चों को एक बेहतर शिक्षा देने की स्थिति में पहुंच गया था लेकिन प्रदेश सरकार ने इन सुविधाओं को बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर जिले के ही 20,000 से अधिक मनरेगा और निर्माण मजदूरों के लाभ रोक दिए गए हैं। इसके विरोध में सीटू, बीएमसी, इंटक, एटक और सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने मिलकर संघर्ष का आगाज करने का फैसला किया है। कहा कि अगर मजदूरों के लाभ बहाल नहीं किए गए तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना होगा।
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इस दौरान प्रदेश भवन सड़क निर्माण मजदूर यूनियन संबंधित सीटू के राज्य अध्यक्ष जोगिंद्र कुमार, जिला सचिव रंजन शर्मा, सीटू के जिले के वित्त सचिव जितेंद्र धीमान, उतम, बौबी, प्रवीण, रेखा, भारतीय मजदूर संघ से जिलाध्यक्ष तिलक राज शर्मा, प्रदीप कुमार राणा, अनीता और इंटक की तरफ से कर्म चंद जस्सल, रमेश चंद व प्रताप सिंह उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों निर्माण व मनरेगा मजदूरों को श्रमिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से मिलने वाली मदद को बंद कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश में 2 मार्च 2009 को श्रमिक कल्याण बोर्ड बना और वर्ष 2012 में मजदूरों का सुचारू रूप से पंजीकरण शुरू हुआ। तब से लेकर दिसंबर 2022 तक लगातार मजदूरों के बच्चों को पढ़ने के लिए वजीफा, बच्चों की शादी के लिए आर्थिक मदद, मृत्यु होने पर आर्थिक मदद, बुढ़ापे में पेंशन, परिवार का इलाज जैसी तमाम सामाजिक सुविधाएं शुरू की गई थीं। एक गरीब मजदूर आदमी भी अपने बच्चों को एक बेहतर शिक्षा देने की स्थिति में पहुंच गया था लेकिन प्रदेश सरकार ने इन सुविधाओं को बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमीरपुर जिले के ही 20,000 से अधिक मनरेगा और निर्माण मजदूरों के लाभ रोक दिए गए हैं। इसके विरोध में सीटू, बीएमसी, इंटक, एटक और सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने मिलकर संघर्ष का आगाज करने का फैसला किया है। कहा कि अगर मजदूरों के लाभ बहाल नहीं किए गए तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना होगा।
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