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आज की युवा पीढ़ी संस्कारों से हो रही विमुख : मोती राम
Sun, 16 Feb 2025 12:16 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sun, 16 Feb 2025 12:16 AM IST
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ठाकुर राम सिंह इतिहास शोध संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद मुख्यातिथि व अन्य। स्रोत : संस
- फोटो : गिरफ्तार अफसर
हमीरपुर। ठाकुर रामसिंह इतिहास शोध संस्थान नेरी हमीरपुर ने शोध संस्थान के संस्थापक ठाकुर राम सिंह के 110वें जन्मदिवस के उपलक्ष्य पर शोध संस्थान में हवन-यज्ञ, भजन कार्तन और सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन किया।
मुख्यातिथि के तौर पर बबली देवी अध्यक्ष, जिला परिषद हमीरपुर ने शिरकत की। मुख्यातिथि ने कहा कि ठाकुर रामसिंह की प्रेरणा से शोध संस्थान नेरी निरंतर अग्रणी कार्य कर रहा है। यहां हो रहा शोध कार्य निश्चित ही समाज के लिए उपयोगी है। हम सभी को ठाकुर रामसिंह जी के जीवन से प्ररेणा लेनी चाहिए और उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।
मुख्य वक्ता प्रो. मोती राम शर्मा ने कहा कि आज आधुनिकता के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना समय की जरूरत है। हमें अपनी समृद्ध संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए। पिछले कुछ सालों से समाज में तेजी से परिवर्तन देखा जा रहा है, जिसके कारण आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और संस्कारों से विमुख होती जा रही है। हमें अपने प्राचीन समृद्ध साहित्य जैसे रामायण, महाभारत, वेद-पुराण आदि का अध्ययन करना जरूरी है। एमआर वैरागी ने ठाकुर रामसिंह के जीवन पर आधारित कविता प्रस्तुत की। इस दौरान शोध संस्थान के निदेशक प्रो नारायण सिंह राव, प्रेम सिंह भरमौरिया, जगवीर सिंह चंदेल, बलवीर राणा, करणवीर सूद आदि मौजूद रहे। संवाद
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मुख्यातिथि के तौर पर बबली देवी अध्यक्ष, जिला परिषद हमीरपुर ने शिरकत की। मुख्यातिथि ने कहा कि ठाकुर रामसिंह की प्रेरणा से शोध संस्थान नेरी निरंतर अग्रणी कार्य कर रहा है। यहां हो रहा शोध कार्य निश्चित ही समाज के लिए उपयोगी है। हम सभी को ठाकुर रामसिंह जी के जीवन से प्ररेणा लेनी चाहिए और उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।
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मुख्य वक्ता प्रो. मोती राम शर्मा ने कहा कि आज आधुनिकता के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना समय की जरूरत है। हमें अपनी समृद्ध संस्कृति को कभी नहीं भूलना चाहिए। पिछले कुछ सालों से समाज में तेजी से परिवर्तन देखा जा रहा है, जिसके कारण आज की युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और संस्कारों से विमुख होती जा रही है। हमें अपने प्राचीन समृद्ध साहित्य जैसे रामायण, महाभारत, वेद-पुराण आदि का अध्ययन करना जरूरी है। एमआर वैरागी ने ठाकुर रामसिंह के जीवन पर आधारित कविता प्रस्तुत की। इस दौरान शोध संस्थान के निदेशक प्रो नारायण सिंह राव, प्रेम सिंह भरमौरिया, जगवीर सिंह चंदेल, बलवीर राणा, करणवीर सूद आदि मौजूद रहे। संवाद
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