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Hamirpur (Himachal) News: टिक्कर की रीना डिजाइनर सूट सिलकर बनीं आत्मनिर्भर
Mon, 16 Feb 2026 12:25 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 16 Feb 2026 12:25 AM IST
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टिक्कर की रीना ने बुटीक में तैयार किया डिजाइनर सूट। संवाद
राज कुमार शर्मा
डिडवीं टिक्कर(हमीरपुर)। ग्राम पंचायत टिक्कर डिडवीं की रीना ने अपने हुनर के दम पर वह कर दिखाया है, जो कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है। सीमित संसाधनों के बावजूद रीना ने डिजाइनर सूट सिलाई में अपनी पहचान बनाई और अब वह हर महीने 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
घर बैठे आत्मनिर्भर बनने का उनका यह सफर न सिर्फ उनके परिवार के लिए सहारा बना है, बल्कि आसपास की कई महिलाओं के लिए भी प्रेरक उदाहरण साबित हो रहा है। गांव में जहां ज्यादातर लोग पारंपरिक खेती, दिहाड़ी-मजदूरी या छोटे-मोटे कार्यों में संलग्न हैं, वहीं रीना ने सिलाई-कढ़ाई को नए स्तर तक पहुंचाकर एक अलग ही मिसाल कायम की है।
गांव की महिलाएं लंबे समय से कपड़े सिलवाने के लिए शहर पर निर्भर थीं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह स्थिति बदली है। रीना की कुशल डिजाइनिंग और आधुनिक पैटर्न की समझ ने लोगों का विश्वास जीता है। अब पंचायत की महिलाएं उनके पास सिलाई करवाने आती हैं। रीना बताती हैं कि स्कूल के दिनों से ही उन्हें सिलाई और डिजाइनिंग का शौक था। बारहवीं कक्षा के बाद उन्होंने औपचारिक सिलाई प्रशिक्षण लेने का निर्णय लिया।
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गांव में उपलब्ध प्रशिक्षण केंद्र में उन्होंने छह माह का कोर्स किया और उसके बाद घर पर ही सिलाई मशीन लगाकर काम शुरू किया। साधारण सलवार-सूट की सिलाई से शुरुआत कर उन्होंने धीरे-धीरे फैशन ट्रेंड का अध्ययन किया। सोशल मीडिया पर डिजाइन देखना, नए पैटर्न सीखना और ग्राहकों की पसंद समझना इन्हीं के आधार पर उन्होंने अपने कौशल को और निखारा।
आज वे साधारण सिलाई ही नहीं, बल्कि डिजाइनर सूट, पार्टीवियर, शादी-ब्याह के लिए खास कलेक्शन और लेस-कटवर्क जैसे विशेष डिजाइन भी तैयार करती हैं।
उन्होंने टिक्कर बाजार में बुटीक खोल लिया है। जहां पर उन्होंने चार लोगों को रोजगार प्रदान किया हुआ है। रीना बताती हैं कि हर माह उन्हें 20 से 25 हजार रुपये की आय हो जाती है। यह राशि परिवार की आय में बड़ा योगदान दे रही है। संवाद
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डिडवीं टिक्कर(हमीरपुर)। ग्राम पंचायत टिक्कर डिडवीं की रीना ने अपने हुनर के दम पर वह कर दिखाया है, जो कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकता है। सीमित संसाधनों के बावजूद रीना ने डिजाइनर सूट सिलाई में अपनी पहचान बनाई और अब वह हर महीने 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
घर बैठे आत्मनिर्भर बनने का उनका यह सफर न सिर्फ उनके परिवार के लिए सहारा बना है, बल्कि आसपास की कई महिलाओं के लिए भी प्रेरक उदाहरण साबित हो रहा है। गांव में जहां ज्यादातर लोग पारंपरिक खेती, दिहाड़ी-मजदूरी या छोटे-मोटे कार्यों में संलग्न हैं, वहीं रीना ने सिलाई-कढ़ाई को नए स्तर तक पहुंचाकर एक अलग ही मिसाल कायम की है।
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गांव की महिलाएं लंबे समय से कपड़े सिलवाने के लिए शहर पर निर्भर थीं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह स्थिति बदली है। रीना की कुशल डिजाइनिंग और आधुनिक पैटर्न की समझ ने लोगों का विश्वास जीता है। अब पंचायत की महिलाएं उनके पास सिलाई करवाने आती हैं। रीना बताती हैं कि स्कूल के दिनों से ही उन्हें सिलाई और डिजाइनिंग का शौक था। बारहवीं कक्षा के बाद उन्होंने औपचारिक सिलाई प्रशिक्षण लेने का निर्णय लिया।
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गांव में उपलब्ध प्रशिक्षण केंद्र में उन्होंने छह माह का कोर्स किया और उसके बाद घर पर ही सिलाई मशीन लगाकर काम शुरू किया। साधारण सलवार-सूट की सिलाई से शुरुआत कर उन्होंने धीरे-धीरे फैशन ट्रेंड का अध्ययन किया। सोशल मीडिया पर डिजाइन देखना, नए पैटर्न सीखना और ग्राहकों की पसंद समझना इन्हीं के आधार पर उन्होंने अपने कौशल को और निखारा।
आज वे साधारण सिलाई ही नहीं, बल्कि डिजाइनर सूट, पार्टीवियर, शादी-ब्याह के लिए खास कलेक्शन और लेस-कटवर्क जैसे विशेष डिजाइन भी तैयार करती हैं।
उन्होंने टिक्कर बाजार में बुटीक खोल लिया है। जहां पर उन्होंने चार लोगों को रोजगार प्रदान किया हुआ है। रीना बताती हैं कि हर माह उन्हें 20 से 25 हजार रुपये की आय हो जाती है। यह राशि परिवार की आय में बड़ा योगदान दे रही है। संवाद