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Hamirpur (Himachal) News: ठठवाणी में सुनाई श्रीकृष्ण जन्म की कथा
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पापी कंस को भगवान ने अपने हाथों से मारा
संवाद न्यूज एजेंसी
डिडवीं टिक्कर (हमीरपुर)। ग्राम पंचायत अम्मण के अंतर्गत आने वाले गांव ठठवाणी में कथावाचक डॉ. नरोत्तम शर्मा ने श्रीकृष्ण भगवान की जन्म कथा सुनाई। बताया कि इस पृथ्वी पर द्वापर युग में कंस के अत्याचार अत्यधिक बढ़ गए। ईश्वर ने प्रतिज्ञा की थी कि ..यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत और परित्राणाय साधुनाम विनाश या च दुष्कृताम धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे.. इसे पूरा करने के लिए अपनी ईश्वरीय शक्ति से माता देवकी के गर्भ से कंस की कारागार में भाद्रपद मास की अंधेरी रात के 12 बजे भगवान नारायण श्रीकृष्ण के बालरूप में अवतरित हुए। जब माता देवकी और वासुदेव पिता ने देखा कि आठवां बच्चा पैदा हो गया है, कंस इसे भी मार देगा। उन्होंने बच्चे को उठाया और नंदबाबा और यशोदा माता के घर ले चले। ईश्वर की माया जब फैली जेल के दरवाजे अपने आप खुलते गए। पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव श्रीकृष्ण को लेकर यमुना की धारा में चल पड़े। ज्यों ज्यों आगे बढ़ रहे थे यमुना भी ऊपर चढ़ रही। वह भी अपने प्रभु के पांव पखारने के लिए उत्सुक थी। यमुना ने भगवान के चरण स्पर्श किए और शांत हो गई। भगवान अब अपने घर पहुंच चुके थे। योगमाया कंस की कारागार में आ गई थी। जब कंस को पता चला तो वह जेल में आया और योगमाया को लेकर जैसे ही मारने लगा तो माया उसके पापी हाथों से छूट कर अदृश्य हो गई। कंस को आकाशवाणी हुई कि तेरा काल आ चुका है। कंस विचलित हुआ। अंत में कंस ने कृष्ण को मारने के लिए कई विकराल राक्षसों को भेजा। सब मारे गए। अंत में अत्याचारी पापी कंस को भी भगवान ने अपने हाथों से मार कर स्वर्ग का अधिकारी बना दिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डिडवीं टिक्कर (हमीरपुर)। ग्राम पंचायत अम्मण के अंतर्गत आने वाले गांव ठठवाणी में कथावाचक डॉ. नरोत्तम शर्मा ने श्रीकृष्ण भगवान की जन्म कथा सुनाई। बताया कि इस पृथ्वी पर द्वापर युग में कंस के अत्याचार अत्यधिक बढ़ गए। ईश्वर ने प्रतिज्ञा की थी कि ..यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत और परित्राणाय साधुनाम विनाश या च दुष्कृताम धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे.. इसे पूरा करने के लिए अपनी ईश्वरीय शक्ति से माता देवकी के गर्भ से कंस की कारागार में भाद्रपद मास की अंधेरी रात के 12 बजे भगवान नारायण श्रीकृष्ण के बालरूप में अवतरित हुए। जब माता देवकी और वासुदेव पिता ने देखा कि आठवां बच्चा पैदा हो गया है, कंस इसे भी मार देगा। उन्होंने बच्चे को उठाया और नंदबाबा और यशोदा माता के घर ले चले। ईश्वर की माया जब फैली जेल के दरवाजे अपने आप खुलते गए। पहरेदार गहरी नींद में सो गए। वासुदेव श्रीकृष्ण को लेकर यमुना की धारा में चल पड़े। ज्यों ज्यों आगे बढ़ रहे थे यमुना भी ऊपर चढ़ रही। वह भी अपने प्रभु के पांव पखारने के लिए उत्सुक थी। यमुना ने भगवान के चरण स्पर्श किए और शांत हो गई। भगवान अब अपने घर पहुंच चुके थे। योगमाया कंस की कारागार में आ गई थी। जब कंस को पता चला तो वह जेल में आया और योगमाया को लेकर जैसे ही मारने लगा तो माया उसके पापी हाथों से छूट कर अदृश्य हो गई। कंस को आकाशवाणी हुई कि तेरा काल आ चुका है। कंस विचलित हुआ। अंत में कंस ने कृष्ण को मारने के लिए कई विकराल राक्षसों को भेजा। सब मारे गए। अंत में अत्याचारी पापी कंस को भी भगवान ने अपने हाथों से मार कर स्वर्ग का अधिकारी बना दिया।