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Hamirpur (Himachal) News: अमृतकाल में निर्मित सरोवर प्रचंड गर्मी में खुद मांग रहे पानी
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हमीरपुर मंडल में जंगलों में भीषण आग के बीच जल गए सरोवरों के मुहाने
वन्य प्राणियों को जंगलों में पानी की एक बूंद तक नसीब नहीं, अधिकतर सरोवर सूखे
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। अमृतकाल में बने अमृत सरोवर प्रचंड गर्मी में खुद पानी मांग रहे हैं। यह सरोवर मई में ही सूख गए हैं। लाखों की लागत से जिले में ये सरोवर बनाए गए हैं। जिन जगहों पर इन अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया था उनके इर्द गिर्द के तमाम जंगल मई में जलकर राख हो गए हैं जबकि अभी तक जून भी शुरू नहीं हुआ है। आग ने यहां वन्य प्राणियों का जीवन लील लिया है वहीं प्रचंड गर्मी में पानी पीने के लिए एक बूंद जंगलों में नहीं बची है।
ऐसे में अमृत सरोवरों के निर्माण व इनकी सार्थकता पर सवाल उठ रहे हैं। वन मंडल हमीरपुर के तहत 70 वन बीटों में विभिन्न विभागों के माध्यम से पिछले कुछ साल में 29 सरोवरों का निर्माण किया गया है। इन सरोवर में अधिकतर अमृत सरोवर हैं जो बीते वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास विभाग और वन विभाग के माध्यम से निर्मित किए गए हैं। निर्माण के वक्त यह दावा किया जा रहा था कि यह सरोवर भीषण गर्मी में जंगली जानवरों की प्यास बुझाने के साथ ही जंगल में नमी बनाए रखने का कार्य करेंगे और जरूरत पड़ने पर भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार आग भी बुझाने में कारगर साबित होंगे। अब जब फायर सीजन प्रचंड है तो अमृत सरोवर सूख गए हैं। वन मंडल हमीरपुर में तीन सप्ताह के भीतर एक हजार हेक्टेयर से अधिक एरिया जलकर राख हो गया है। सरकार की ओर से अमृतकाल के महोत्सव में विभिन्न विभागों को प्राकृतिक सरोवरों को संवारने और विकसित करने के लिए इनका निर्माण किया गया था। दो वर्ष पूर्व पंचायतों को अमृत सरोवरों का निर्माण करने के लिए लाखों रुपये का बजट प्रदान किया गया था ताकि पंचायतों के साथ जंगलों में अमृत सरोवरों का निर्माण हो सके। विभाग की ओर से पंचायतों को सरोवरों का निर्माण ऐसी जगह पर करने के निर्देश दिए यहां जंगली जानवर और पंचायत के लोग इसका प्रयोग कर सकें लेकिन धरातल पर कार्य इसके विपरीत है। सरोवरों से जंगलों की आग को बुझाना तो दूर जंगली जानवरों को पीने के लिए पानी भी नहीं मिल पा रहा है। वन विभाग हमीरपुर के पास अबतक आग लगने के कुल 115 मामले आए हैं। इन मामलों में जंगलों की आग सबसे अधिक वन बीट बिझड़ी के अंतर्गत हैं।
क्या कहते हैं लोग
स्थानीय लोगों राजेंद्र ,दिलीप, निक्का राम, नरैणू सिंह, विद्या देवी, नीता राणी आदि ने कहा कि वन विभाग की ओर से जंगलों में आग बुझाने और जंगली जानवरों को पानी उपलब्ध कराने का तर्क देकर सरोवरों का निर्माण करवाने के निर्देश दिए थे। लेकिन, वर्तमान में सरोवर खुद पानी मांग रहे हैं। आखिर इन सरोवरों पर लाखों खर्च करने का नतीजा क्या रहा है। कायदे से तो यदि यहां पर बजट खर्च किया गया है तो प्रचंड गर्मी में भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए थी ताकि आपात स्थिति में वन्य प्राणियों और वन संपदा को बचाने के लिए यह सार्थक होते।
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वन विभाग हमीरपुर ने बीते वित्तीय वर्ष में छह लाख के बजट से चार अमृत सरोवरों का निर्माण किया था। यह सरोवर लुदर, परौर, दलचेहड़ा और जौड़ेअंब में निर्मित किए गए थे। इसके अलावा पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास की ओर से पंचायतों के जरिये भी अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया है लेकिन तमाम सरोवर सूख गए हैं।
कोट
वन मंडल हमीरपुर के डीएफओ अंकित सिंह ने कहा कि अमृतकाल में वन मंडल हमीरपुर में चार अमृत सरोवर विकसित किए हैं। इन सरोवर पर छह लाख का बजट खर्च किया गया है लेकिन प्रचंड गर्मी के चलते अधिकतर सरोवर सूख गए हैं। जंगलों को आग से बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
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वन्य प्राणियों को जंगलों में पानी की एक बूंद तक नसीब नहीं, अधिकतर सरोवर सूखे
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। अमृतकाल में बने अमृत सरोवर प्रचंड गर्मी में खुद पानी मांग रहे हैं। यह सरोवर मई में ही सूख गए हैं। लाखों की लागत से जिले में ये सरोवर बनाए गए हैं। जिन जगहों पर इन अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया था उनके इर्द गिर्द के तमाम जंगल मई में जलकर राख हो गए हैं जबकि अभी तक जून भी शुरू नहीं हुआ है। आग ने यहां वन्य प्राणियों का जीवन लील लिया है वहीं प्रचंड गर्मी में पानी पीने के लिए एक बूंद जंगलों में नहीं बची है।
ऐसे में अमृत सरोवरों के निर्माण व इनकी सार्थकता पर सवाल उठ रहे हैं। वन मंडल हमीरपुर के तहत 70 वन बीटों में विभिन्न विभागों के माध्यम से पिछले कुछ साल में 29 सरोवरों का निर्माण किया गया है। इन सरोवर में अधिकतर अमृत सरोवर हैं जो बीते वित्तीय वर्ष में ग्रामीण विकास विभाग और वन विभाग के माध्यम से निर्मित किए गए हैं। निर्माण के वक्त यह दावा किया जा रहा था कि यह सरोवर भीषण गर्मी में जंगली जानवरों की प्यास बुझाने के साथ ही जंगल में नमी बनाए रखने का कार्य करेंगे और जरूरत पड़ने पर भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार आग भी बुझाने में कारगर साबित होंगे। अब जब फायर सीजन प्रचंड है तो अमृत सरोवर सूख गए हैं। वन मंडल हमीरपुर में तीन सप्ताह के भीतर एक हजार हेक्टेयर से अधिक एरिया जलकर राख हो गया है। सरकार की ओर से अमृतकाल के महोत्सव में विभिन्न विभागों को प्राकृतिक सरोवरों को संवारने और विकसित करने के लिए इनका निर्माण किया गया था। दो वर्ष पूर्व पंचायतों को अमृत सरोवरों का निर्माण करने के लिए लाखों रुपये का बजट प्रदान किया गया था ताकि पंचायतों के साथ जंगलों में अमृत सरोवरों का निर्माण हो सके। विभाग की ओर से पंचायतों को सरोवरों का निर्माण ऐसी जगह पर करने के निर्देश दिए यहां जंगली जानवर और पंचायत के लोग इसका प्रयोग कर सकें लेकिन धरातल पर कार्य इसके विपरीत है। सरोवरों से जंगलों की आग को बुझाना तो दूर जंगली जानवरों को पीने के लिए पानी भी नहीं मिल पा रहा है। वन विभाग हमीरपुर के पास अबतक आग लगने के कुल 115 मामले आए हैं। इन मामलों में जंगलों की आग सबसे अधिक वन बीट बिझड़ी के अंतर्गत हैं।
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क्या कहते हैं लोग
स्थानीय लोगों राजेंद्र ,दिलीप, निक्का राम, नरैणू सिंह, विद्या देवी, नीता राणी आदि ने कहा कि वन विभाग की ओर से जंगलों में आग बुझाने और जंगली जानवरों को पानी उपलब्ध कराने का तर्क देकर सरोवरों का निर्माण करवाने के निर्देश दिए थे। लेकिन, वर्तमान में सरोवर खुद पानी मांग रहे हैं। आखिर इन सरोवरों पर लाखों खर्च करने का नतीजा क्या रहा है। कायदे से तो यदि यहां पर बजट खर्च किया गया है तो प्रचंड गर्मी में भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए थी ताकि आपात स्थिति में वन्य प्राणियों और वन संपदा को बचाने के लिए यह सार्थक होते।
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वन विभाग हमीरपुर ने बीते वित्तीय वर्ष में छह लाख के बजट से चार अमृत सरोवरों का निर्माण किया था। यह सरोवर लुदर, परौर, दलचेहड़ा और जौड़ेअंब में निर्मित किए गए थे। इसके अलावा पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास की ओर से पंचायतों के जरिये भी अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया है लेकिन तमाम सरोवर सूख गए हैं।
कोट
वन मंडल हमीरपुर के डीएफओ अंकित सिंह ने कहा कि अमृतकाल में वन मंडल हमीरपुर में चार अमृत सरोवर विकसित किए हैं। इन सरोवर पर छह लाख का बजट खर्च किया गया है लेकिन प्रचंड गर्मी के चलते अधिकतर सरोवर सूख गए हैं। जंगलों को आग से बचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।