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Hamirpur (Himachal) News: टौणी देवी मंदिर में आज टमक बजाकर होगा मेले का आगाज
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सुबह नौ बजे टमक बजाकर होगा मेले का शुभारंभ
तीनों चौकों में एक साथ लगाया गया मेला, दुकानदारों को मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
टौणी देवी (हमीरपुर)। टौणी देवी माता मंदिर में आज से भव्य मेला आयोजित होगा। इस बार मेले में अधिक दुकानदार दुकानें लगाएंगे। पूर्व में एनएच तीन पर मलबा होने और सड़क के तंग होने से दुकानदारों को सामान रखने में खासी दिक्कत होती थी। इस बार सड़क के खुले होने से दुकानदारों को सुविधा मिलेगी। मेले का बड़े स्तर पर आयोजन तीनों चौकों टौणी देवी माता मंदिर, अस्पताल और ऊहल चौक पर किया जाएगा। मेले के आयोजन को लेकर एक दिन पूर्व ही आसपास के क्षेत्रों से दुकानदार अपने सामान को लेकर टौणी देवी पहुंच गए हैं। शनिवार दोपहर तक दुकानदारों ने मंदिर के साथ पूरे बाजार में दुकानें सजा दी हैं। मेले में डोम झूले इस बार आकर्षण का केंद्र होंगे। एक दिवसीय मेले का शुभारंभ समाज सेवी प्रकाश चंद शर्मा सुबह नौ बजे टौणी देवी माता मंदिर में पूजा अर्चना कर टमक बजाकर करेंगे। मेला आयोजन को लेकर व्यापार मंडल और क्षेत्रवासियों में काफी उत्साह है। व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमनदीप राणा व मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सरवण चौहान ने कहा मंदिर में पूजा अर्चना के बाद मेले का शुभारंभ होगा। मेले में तीन जिलों कांगड़ा, हमीरपुर और मंडी से लोग टौणी देवी माता के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। मेले के शुभारंभ पर मंदिर कमेटी की ओर से दिनभर ठंडे पानी की छबील लगाई जाएगी। मेले में आने वाले लोगों को ठंडा पानी पिलाया जाएगा।
ये है इतिहास
चौहान वंश की कुल देवी माता टौणी देवी मंदिर का अस्तित्व लगभग 300 वर्ष का है। जब दिल्ली पर मुगलों का आधिपत्य हो गया तो उन्होंने राजपूतों की मां-बहनों पर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया। राजपूतों का जनेऊ उतार कर धर्म परिवर्तन करवाने लगे तो चौहान वंश के 12 भाइयों ने इस पहाड़ी दुर्गम क्षेत्र में शरण ली थी। उनके साथ उनकी बहन भी थी जिसे सुनाई नहीं देता था। परिवार के मुखिया ने बाकर, कुनाह और पुंग खड्ड के केंद्र पर भवन बनाने की योजना बनाई। मगर जिस स्थान पर आधारशिला रखी गई, वहां पर खून की धारा निकलने पर सब अचंभित हो गए। इस पर कुल पुरोहित से मशविरा लिया गया और उन्होंने इसके लिए घर की कुंवारी कन्या को दोषी बताया। घर की महिलाओं ने माता टौणी देवी पर आरोप लगाए। इस पर क्षुब्ध माता ने इस स्थान पर घोर तपस्या की और आषाढ़ मास के 10 प्रविष्टे को अंतर ध्यान हो गई। उसी की याद में उसके भाइयों ने यहां छोटे से मंदिर की स्थापना की जो आज भव्य रूप धारण कर चुका है। माता की याद में यहां हर वर्ष मेले का आयोजन होता है।
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तीनों चौकों में एक साथ लगाया गया मेला, दुकानदारों को मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
टौणी देवी (हमीरपुर)। टौणी देवी माता मंदिर में आज से भव्य मेला आयोजित होगा। इस बार मेले में अधिक दुकानदार दुकानें लगाएंगे। पूर्व में एनएच तीन पर मलबा होने और सड़क के तंग होने से दुकानदारों को सामान रखने में खासी दिक्कत होती थी। इस बार सड़क के खुले होने से दुकानदारों को सुविधा मिलेगी। मेले का बड़े स्तर पर आयोजन तीनों चौकों टौणी देवी माता मंदिर, अस्पताल और ऊहल चौक पर किया जाएगा। मेले के आयोजन को लेकर एक दिन पूर्व ही आसपास के क्षेत्रों से दुकानदार अपने सामान को लेकर टौणी देवी पहुंच गए हैं। शनिवार दोपहर तक दुकानदारों ने मंदिर के साथ पूरे बाजार में दुकानें सजा दी हैं। मेले में डोम झूले इस बार आकर्षण का केंद्र होंगे। एक दिवसीय मेले का शुभारंभ समाज सेवी प्रकाश चंद शर्मा सुबह नौ बजे टौणी देवी माता मंदिर में पूजा अर्चना कर टमक बजाकर करेंगे। मेला आयोजन को लेकर व्यापार मंडल और क्षेत्रवासियों में काफी उत्साह है। व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमनदीप राणा व मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सरवण चौहान ने कहा मंदिर में पूजा अर्चना के बाद मेले का शुभारंभ होगा। मेले में तीन जिलों कांगड़ा, हमीरपुर और मंडी से लोग टौणी देवी माता के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं। मेले के शुभारंभ पर मंदिर कमेटी की ओर से दिनभर ठंडे पानी की छबील लगाई जाएगी। मेले में आने वाले लोगों को ठंडा पानी पिलाया जाएगा।
ये है इतिहास
चौहान वंश की कुल देवी माता टौणी देवी मंदिर का अस्तित्व लगभग 300 वर्ष का है। जब दिल्ली पर मुगलों का आधिपत्य हो गया तो उन्होंने राजपूतों की मां-बहनों पर अत्याचार करना प्रारंभ कर दिया। राजपूतों का जनेऊ उतार कर धर्म परिवर्तन करवाने लगे तो चौहान वंश के 12 भाइयों ने इस पहाड़ी दुर्गम क्षेत्र में शरण ली थी। उनके साथ उनकी बहन भी थी जिसे सुनाई नहीं देता था। परिवार के मुखिया ने बाकर, कुनाह और पुंग खड्ड के केंद्र पर भवन बनाने की योजना बनाई। मगर जिस स्थान पर आधारशिला रखी गई, वहां पर खून की धारा निकलने पर सब अचंभित हो गए। इस पर कुल पुरोहित से मशविरा लिया गया और उन्होंने इसके लिए घर की कुंवारी कन्या को दोषी बताया। घर की महिलाओं ने माता टौणी देवी पर आरोप लगाए। इस पर क्षुब्ध माता ने इस स्थान पर घोर तपस्या की और आषाढ़ मास के 10 प्रविष्टे को अंतर ध्यान हो गई। उसी की याद में उसके भाइयों ने यहां छोटे से मंदिर की स्थापना की जो आज भव्य रूप धारण कर चुका है। माता की याद में यहां हर वर्ष मेले का आयोजन होता है।
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