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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   The existence of those who do not know the history of the country and the community is erased: Dhumal

देश और कौम के इतिहास को न जानने वालों का मिट जाता है अस्तित्व : धूमल

Sun, 05 Dec 2021 11:27 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 05 Dec 2021 11:27 PM IST
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The existence of those who do not know the history of the country and the community is erased: Dhumal
नेरी में आयोजित परिसंवाद में भाग लेने वाले शोधार्थी, मुख्यातिथि व विशेष अतिथि के साथ। - फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। ठाकुर जगदेव चंद ठाकुर स्मृति शोध संस्थान नेरी में रविवार को भारतीय स्वाधीनता आंदोलन, वृत्तांत, स्मृतियां एवं नेपथ्य-नायक विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद एवं वेबिनार के समापन सत्र पर पूर्व मुख्यमंत्री धूमल ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। यह वेबिनार आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य पर आयोजित किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि जो देश, समाज और कौम अपने इतिहास को नहीं जानते तथा उस पर गौरव नहीं करते, उनका अस्तित्व अकसर मिट जाता है।
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यह दो दिवसीय परिसंवाद भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद और केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला तथा प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के इतिहास विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया। इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास का महत्व हमें आज पता चल रहा है, लेकिन ठाकुर जगदेव चंद ठाकुर स्मृति शोध संस्थान के संस्थापक ठाकुर राम सिंह ने दशकों पहले यह समझ लिया था। इसलिए उन्होंने भारतीय इतिहास के संकलन पर विशेष बल दिया था। धूमल ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीय इतिहास को एक सोची-समझी रणनीति एवं साजिश के तहत विकृत कर दिया था, जिससे हमें राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से गुलाम बनाने के प्रयास किए गए। योग, वेद, आयुर्वेद और अन्य प्राचीन परंपराएं एवं विधाएं भारतीय सभ्यता की ही देन है।
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समापन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज तथा कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि सैकड़ों वर्षों की गुलामी के बावजूद हमारी समृद्ध संस्कृति और सभ्यता का अस्तित्व आज भी कायम है। गुलामी के दौर में असंख्य योद्धाओं और सेनानियों से अपना सर्वस्व न्योछावर करके हमारे इस अस्तित्व को कायम रखने तथा देश को आजाद करवाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। वीरेंद्र कंवर ने कहा कि दुर्भाग्यवश इन असंख्य नायकों को हमारे इतिहास में वाजिब स्थान नहीं मिल पाया है।
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इसलिए भारतीय इतिहास के सही संकलन की आवश्यकता है। इस अवसर पर भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रोफेसर कुमार रत्नम ने नेरी के शोध संस्थान को भविष्य में भी परिषद की ओर से हरसंभव मदद का विश्वास दिलाया। समापन सत्र में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सलाहकार डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे। शोध संस्थान के निदेशक डॉ. चेतराम गर्ग ने परिसंवाद के संबंध में विस्तृत जानकारी दी तथा संस्थान की गतिविधियों का ब्योरा प्रस्तुत किया। डॉ. कंवरदीप चंद्र ने परिसंवाद की रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान प्रेम कुमार धूमल ने मंगत राम डोगरा की पुस्तक डुग्गर तरगनी, सुमेर खजूरिया की दो पुस्तकों अरहत कोशिक वाकुला और डी-लिमिटेशन ऑफ सीट्स इन जम्मू-कश्मीर तथा प्रोफेसर अरुण कुमार की पुस्तक पंडित दीन दयाल उपाध्याय विचार दर्शन का विमोचन भी किया।
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