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Hamirpur (Himachal) News: बैंक के पक्ष में फैसला, 13.14 लाख रुपये की ऋण वसूली के आदेश
Fri, 31 Oct 2025 12:50 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 31 Oct 2025 12:50 AM IST
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हमीरपुर। सिविल जज कोर्ट नंबर-3 हमीरपुर की न्यायाधीश टीना मल्होत्रा की अदालत ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की ओर दायर एक ऋण वसूली के मामले में बैंक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने बैंक को कुल 13,14,773 रुपये वसूलने का अधिकार दिया है।
यह राशि सुजानपुर तहसील निवासी व्यक्ति से वसूल की जाएगी। अदालती आदेश के अनुसार 9,58,080 रुपये कैश क्रेडिट लिमिट के रूप में तथा 3,56,693 रुपये को टर्म लोन के रूप में ब्याज सहित वसूला जाएगा। सीसी लिमिट पर अदालत ने 12.04 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर तथा टर्म लोन पर 8.9 प्रतिशत ब्याज दर निर्धारित की गई है।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 2014 में फर्म को 18 लाख का सीसी लोन और 4.5 लाख का टर्म लोन स्वीकृत किया था। बाद में 2016 में यह सीमा घटाकर 10 लाख कर दी गई थी। नवंबर 2020 में बैंक ने पुनः 6 लाख की सीसी लिमिट और 4.8 लाख का टर्म लोन स्वीकृत किया, लेकिन प्रतिवादी ने समय पर किस्तें नहीं चुकाईं, जिसके चलते खाता 27 फरवरी 2021 को एनपीए घोषित कर दिया गया।
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मामले में प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते 24 अगस्त 2024 को अदालत ने उसे एक्स-पार्टी घोषित किया और वादी के सबूतों के आधार पर यह फैसला सुनाया।
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यह राशि सुजानपुर तहसील निवासी व्यक्ति से वसूल की जाएगी। अदालती आदेश के अनुसार 9,58,080 रुपये कैश क्रेडिट लिमिट के रूप में तथा 3,56,693 रुपये को टर्म लोन के रूप में ब्याज सहित वसूला जाएगा। सीसी लिमिट पर अदालत ने 12.04 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर तथा टर्म लोन पर 8.9 प्रतिशत ब्याज दर निर्धारित की गई है।
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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 2014 में फर्म को 18 लाख का सीसी लोन और 4.5 लाख का टर्म लोन स्वीकृत किया था। बाद में 2016 में यह सीमा घटाकर 10 लाख कर दी गई थी। नवंबर 2020 में बैंक ने पुनः 6 लाख की सीसी लिमिट और 4.8 लाख का टर्म लोन स्वीकृत किया, लेकिन प्रतिवादी ने समय पर किस्तें नहीं चुकाईं, जिसके चलते खाता 27 फरवरी 2021 को एनपीए घोषित कर दिया गया।
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मामले में प्रतिवादी अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते 24 अगस्त 2024 को अदालत ने उसे एक्स-पार्टी घोषित किया और वादी के सबूतों के आधार पर यह फैसला सुनाया।