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Hamirpur (Himachal) News: जल समृद्ध बनी सिकांदर पंचायत, राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
Sat, 22 Mar 2025 06:42 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 22 Mar 2025 06:42 AM IST
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हमीरपुर। वर्षों से पानी को सहेजने की परंपरा के दम पर सिकांदर पंचायत ने जल पर्याप्त पंचायत की उपाधि प्राप्त की है। पानी को सहेजने के लिए बनाई गई पारंपरिक योजना पर कार्य करके पंचायत ने यह मुकाम प्राप्त किया है। पिछले तीन वर्षों से ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने जल समृद्ध पंचायत थीम पर कार्य किया और सफलता हासिल की। पंचायत में बड़ी से छोटी 150 खातरियां हैं। जिसके पानी का प्रयोग पीने और खेतीबाड़ी सहित अन्य कार्यों के लिए होता है। इसके अतिरिक्त पंचायत में ग्रामीणों ने बारिश के पानी का संरक्षण करने के लिए पंचायत और निजी तौर पर क्षमतानुसार टैंकों का निर्माण किया है ताकि गर्मी के मौसम में पानी के लिए दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
वर्तमान में सिकांदर पंचायत के पांच वार्डों में 16,073 आबादी का 90 फीसदी भाग निजी तौर पर जलापूर्ति कर रहा है जबकि 10 फीसदी भाग को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंचायत कार्य कर रही है। पंचायत के पांच वार्डों सिकांदर, कोहलवीं, ढ़ागू, शिशवां, धलोट में कुल 400 से ज्यादा घर हैं जो कि थीम पर पंचायत के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। पंचायत में कईं वर्षों से पेयजल किल्लत रहती थी। ऐसे में पंचायत और ग्रामीणों ने मिलकर कार्य किया और वर्तमान में पंचायत का प्रत्येक घर जलापूर्ति के लिए आत्मनिर्भर है। पंचायत में ग्रामीणों की सुविधा के अनुसार पंचायत स्तर पर एक टीम का गठन किया गया। जिसमें पंचायत में आने वाले पांच वार्डों में दो चरणों में विभाजित करके प्रथम चरण में प्राचीन समय में निर्मित खातरियों और दूसरे चरण में वर्षा जल संग्रहण के तहत निजी टैंकों का निर्माण, बोरवेल करने वाले लोगों को चयनित किया गया।
प्रथम चरण में पंचायत की ओर से से पूर्वजों के समय पहाड़ी के साथ बनाई गई पानी की खातरियोंं, बावड़ियों, कुओं का जीर्णोद्धार कार्य करवाया गया और दूसरे चरण में निजी खातिरयों, वर्षा जल भंडारण, बोरवेल के मालिकों को जल का पुन: प्रयोग और रिसाइकल करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। जिसके चलते पंचायत ने यह सफलता प्राप्त की है। एक खातरी में 30 हजार लीटर पानी को भंडारित करने की क्षमता होती है।
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हमीरपुर जिला के बमसन विकास खंड को खातरियों के नाम से भी जाना जाता है। भौगोलिक परीस्थितियों के अनुसार जल के लिए पर्याप्त साधन न होने से यहां पर पुराने समय से ही लोग खातरियों का प्रयोग करते आ रहे हैं। जिसके चलते वर्तमान युवा पीढ़ी भी इसको लेकर जागरूक हो रही है।
पिछले तीन वर्षों से ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने जल समृद्ध पंचायत थीम पर कार्य किया और पंचायत को जल समृद्ध पंचायत बनाने में सफलता हासिल की। पंचायत में बड़ी से छोटी 150 खातरियां हैं। जिसके पानी का प्रयोग पीने और खेतीबाड़ी सहित अन्य कार्यों के लिए होता है। आगामी वर्षों में इस थीम पर अधिक कार्य किया जाएगा।
-पवन कुमार, प्रधान ग्राम पंचायत सिकांदर
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वर्तमान में सिकांदर पंचायत के पांच वार्डों में 16,073 आबादी का 90 फीसदी भाग निजी तौर पर जलापूर्ति कर रहा है जबकि 10 फीसदी भाग को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंचायत कार्य कर रही है। पंचायत के पांच वार्डों सिकांदर, कोहलवीं, ढ़ागू, शिशवां, धलोट में कुल 400 से ज्यादा घर हैं जो कि थीम पर पंचायत के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। पंचायत में कईं वर्षों से पेयजल किल्लत रहती थी। ऐसे में पंचायत और ग्रामीणों ने मिलकर कार्य किया और वर्तमान में पंचायत का प्रत्येक घर जलापूर्ति के लिए आत्मनिर्भर है। पंचायत में ग्रामीणों की सुविधा के अनुसार पंचायत स्तर पर एक टीम का गठन किया गया। जिसमें पंचायत में आने वाले पांच वार्डों में दो चरणों में विभाजित करके प्रथम चरण में प्राचीन समय में निर्मित खातरियों और दूसरे चरण में वर्षा जल संग्रहण के तहत निजी टैंकों का निर्माण, बोरवेल करने वाले लोगों को चयनित किया गया।
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प्रथम चरण में पंचायत की ओर से से पूर्वजों के समय पहाड़ी के साथ बनाई गई पानी की खातरियोंं, बावड़ियों, कुओं का जीर्णोद्धार कार्य करवाया गया और दूसरे चरण में निजी खातिरयों, वर्षा जल भंडारण, बोरवेल के मालिकों को जल का पुन: प्रयोग और रिसाइकल करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया। जिसके चलते पंचायत ने यह सफलता प्राप्त की है। एक खातरी में 30 हजार लीटर पानी को भंडारित करने की क्षमता होती है।
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हमीरपुर जिला के बमसन विकास खंड को खातरियों के नाम से भी जाना जाता है। भौगोलिक परीस्थितियों के अनुसार जल के लिए पर्याप्त साधन न होने से यहां पर पुराने समय से ही लोग खातरियों का प्रयोग करते आ रहे हैं। जिसके चलते वर्तमान युवा पीढ़ी भी इसको लेकर जागरूक हो रही है।
पिछले तीन वर्षों से ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने जल समृद्ध पंचायत थीम पर कार्य किया और पंचायत को जल समृद्ध पंचायत बनाने में सफलता हासिल की। पंचायत में बड़ी से छोटी 150 खातरियां हैं। जिसके पानी का प्रयोग पीने और खेतीबाड़ी सहित अन्य कार्यों के लिए होता है। आगामी वर्षों में इस थीम पर अधिक कार्य किया जाएगा।
-पवन कुमार, प्रधान ग्राम पंचायत सिकांदर