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Hamirpur (Himachal) News: संदेह के दायरे में पशुपालन विभाग की भूमिका, नीलामी में पारदर्शिता की कमी
Tue, 26 Nov 2024 09:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 26 Nov 2024 09:07 AM IST
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हमीरपुर। उत्तरी भारत के प्रसिद्ध सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ न्यास में बकरा नीलामी मामले में विस्तृत जांच के बाद जांच अधिकारी तहसीलदार बड़सर ने जांच रिपोर्ट एसडीएम बड़सर को सोमवार को सौंप दी है। इस जांच रिपोर्ट में पशुपालन विभाग की नीलामी में भूमिका पर संदेह का खुलासा हुआ है। विभाग ने नीलामी कार्य को हल्के में लिया है।
दरअसल, नीलामी के दौरान बोली लगने पर पशुपालन विभाग की ओर से अधिकृत कर्मी बोली कीमतों पर टिप्पणी देते हैं। मगर नौ नवंबर को हुई नीलामी में इस कर्मी की टिप्पणी को लेकर भी सवाल उठे हैं। संभावना जताई जा रही है कि मंदिर न्यास और प्रशासन अब इस मामले में जल्द ही पशुपालन विभाग से पत्राचार कर सकता है।
14 दिन तक चली जांच में नीलामी में शामिल सभी कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। साथ ही तथ्यों और नीलामी के नियमों को भी जांचा गया है। नीलामी की व्यवस्था को लेकर भी जांच रिपोर्ट में अहम सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट में नीलामी व्यवस्था की खामियों का भी खुलासा हुआ है। सामने आया है कि नीलामी से पूर्व इसकी पुख्ता सूचना अधिक लोगों नहीं पहुंचती है। इसके लिए सार्वजनिक मंचों पर नोटिस जारी किए जाने चाहिए।
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बकरा स्थल में बकरों को रखने की क्षमता को बढ़ाया जाना चाहिए और सप्ताह में दो दिन की बजाय एक दिन नीलामी होनी चाहिए। बकरा नीलामी के कार्य को दोपहर के दो बजे की बजाए सुबह दस बजे से शुरू करने की जरूरत है ताकि लोगों को इसमें हिस्सा लेने का अधिक समय मिले। बकरों की नस्ल के अनुसार नीलामी के मूल दामों को तय करने में संशोधन की जरूरत है ताकि उचित कीमत पर नीलामी हो सके।
मंदिर अधिकारी ने सौंपा जवाब
मंदिर न्यास अधिकारी संदीप चंदेल ने कारण बताओ नोटिस का जवाब एसडीएम बड़सर राजेंद्र गौतम को सौंप दिया है। उनसे बकरा नीलामी के लिए तय उपसमिति के सभी सदस्यों को एक साथ अवकाश पर भेजने पर जवाब तलब किया गया था। उन्होंने अपना जवाब एसडीएम बड़सर को सौंप दिया है।
जांच अधिकारी तहसीलदार बड़सर धर्मपाल नेगी ने कहा कि जांच रिपोर्ट एसडीएम कार्यालय बड़सर में जमा करवा दी गई है। मामले में आगामी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से की जाएगी।
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दरअसल, नीलामी के दौरान बोली लगने पर पशुपालन विभाग की ओर से अधिकृत कर्मी बोली कीमतों पर टिप्पणी देते हैं। मगर नौ नवंबर को हुई नीलामी में इस कर्मी की टिप्पणी को लेकर भी सवाल उठे हैं। संभावना जताई जा रही है कि मंदिर न्यास और प्रशासन अब इस मामले में जल्द ही पशुपालन विभाग से पत्राचार कर सकता है।
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14 दिन तक चली जांच में नीलामी में शामिल सभी कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। साथ ही तथ्यों और नीलामी के नियमों को भी जांचा गया है। नीलामी की व्यवस्था को लेकर भी जांच रिपोर्ट में अहम सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट में नीलामी व्यवस्था की खामियों का भी खुलासा हुआ है। सामने आया है कि नीलामी से पूर्व इसकी पुख्ता सूचना अधिक लोगों नहीं पहुंचती है। इसके लिए सार्वजनिक मंचों पर नोटिस जारी किए जाने चाहिए।
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बकरा स्थल में बकरों को रखने की क्षमता को बढ़ाया जाना चाहिए और सप्ताह में दो दिन की बजाय एक दिन नीलामी होनी चाहिए। बकरा नीलामी के कार्य को दोपहर के दो बजे की बजाए सुबह दस बजे से शुरू करने की जरूरत है ताकि लोगों को इसमें हिस्सा लेने का अधिक समय मिले। बकरों की नस्ल के अनुसार नीलामी के मूल दामों को तय करने में संशोधन की जरूरत है ताकि उचित कीमत पर नीलामी हो सके।
मंदिर अधिकारी ने सौंपा जवाब
मंदिर न्यास अधिकारी संदीप चंदेल ने कारण बताओ नोटिस का जवाब एसडीएम बड़सर राजेंद्र गौतम को सौंप दिया है। उनसे बकरा नीलामी के लिए तय उपसमिति के सभी सदस्यों को एक साथ अवकाश पर भेजने पर जवाब तलब किया गया था। उन्होंने अपना जवाब एसडीएम बड़सर को सौंप दिया है।
जांच अधिकारी तहसीलदार बड़सर धर्मपाल नेगी ने कहा कि जांच रिपोर्ट एसडीएम कार्यालय बड़सर में जमा करवा दी गई है। मामले में आगामी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से की जाएगी।