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Hamirpur (Himachal) News: बड़सर में बागी बिगाड़ते रहे हैं चुनावी समीकरण, कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा हारी
Tue, 09 Apr 2024 11:49 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 09 Apr 2024 11:49 AM IST
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हमीरपुर। विधानसभा क्षेत्र बड़सर में गत दो विधानसभा चुनावों में बागियों ने नतीजों को प्रभावित किया है। वर्ष 2003 से कांग्रेस और भाजपा दोनों में बगावत हावी रही है। जिस दल के बागी ने यहां चुनाव लड़ा, उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गत विधानसभा चुनावों में भी भाजपा के बागी संजीव शर्मा ने आजाद चुनाव लड़कर 15,252 वोट हासिल किए थे और भाजपा की माया शर्मा 13,792 मतों से हार हो गई थीं।
अब एक बार फिर उपचुनावों में कांग्रेस और भाजपा के चेहरे जरूर बदलेंगे, लेकिन बगावत जारी रहने की सूरत में नतीजे फिर राजनीतिक दलों की उम्मीदों को धूमिल कर सकते हैं। आगामी उपचुनावों में भाजपा के बागी रहे संजीव शर्मा के तल्ख तेवर नजर आ रहे हैं। उनकी भाजपा में वापसी नहीं हुई है और भाजपा ने कांग्रेस के बागी पूर्व विधायक इंद्रदत्त लखनपाल को यहां से चुनावी मैदान में उतार दिया है।
साल 2003 में कांग्रेस ने इस विस क्षेत्र में विद्या जार को चुनावी मैदान में उतारा तो कांग्रेस से बागी होकर मंजीत डोगरा ने आजाद चुनाव लड़ा। नतीजा यह रहा कि भाजपा प्रत्याशी बलदेव शर्मा 12,561 मतों से जीत गए। कांग्रेस की विद्या जार को 11,235 मत मिले, जबकि आजाद मंजीत डोगरा ने 10,568 मत हासिल किया।
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वर्ष 2007 के विधानसभा के चुनाव में मुकाबला चार प्रत्याशियों में हुआ। इसमें भी कांग्रेस को बगावत का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस के पूर्व विधायक मंजीत डोगरा की पत्नी अरविंदर रानी ने आजाद चुनाव लड़ा और इस कारण कांग्रेस की यहां हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा के बलदेव शर्मा ने इस चुनाव में बाजी मारी थी।
साल 2012 में मुकाबला सीधा हुआ। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी इंद्रदत्त लखनपाल ने भाजपा के बलदेव शर्मा को 2,658 मतों से हराया। इसके बाद साल 2017 और 2022 में बगावत के चलते तिकोने मुकाबले हुए। 2017 में कांग्रेस में बगावत कर सीताराम भारद्वाज ने आजाद चुनाव लड़ा और इस चुनाव में कांग्रेस महज 439 मतों से जीत दर्ज कर सकी। हालांकि चुनावी नतीजों के बाद सीता राम भारद्वाज भाजपा में शामिल हो गए थे।
2022 में बगावत भाजपा में हुई। भाजपा के बागी संजीव शर्मा ने फिर आजाद चुनाव लड़ा और भाजपा को यहां से लगातार तीसरी हार का सामना करना पड़ा।
साल 2017
मत
भाजपा बलदेव शर्मा
25,240
कांग्रेस
इंद्रदत्त लखनपाल
25,659
आजाद
सीता राम भारद्वाज
5,181
साल 2022
मत
भाजपा माया शर्मा
16501
कांग्रेस
इंद्रदत्त लखनपाल
30293
आजाद
संजीव शर्मा
15252
समर्थकों के विश्वास पर लड़ा था चुनाव : संजीव
संजीव शर्मा का कहना है कि गत विस चुनावों में समर्थकों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के विश्वास पर चुनाव लड़ा था। इस बार भी विचार-विमर्श जारी है। भाजपा में उनकी वापसी नहीं हुई है। ऐसे में उनके समर्थक व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की राय पर आगामी निर्णय होगा। लोगों के साथ जनसंपर्क लगातार जारी है।
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अब एक बार फिर उपचुनावों में कांग्रेस और भाजपा के चेहरे जरूर बदलेंगे, लेकिन बगावत जारी रहने की सूरत में नतीजे फिर राजनीतिक दलों की उम्मीदों को धूमिल कर सकते हैं। आगामी उपचुनावों में भाजपा के बागी रहे संजीव शर्मा के तल्ख तेवर नजर आ रहे हैं। उनकी भाजपा में वापसी नहीं हुई है और भाजपा ने कांग्रेस के बागी पूर्व विधायक इंद्रदत्त लखनपाल को यहां से चुनावी मैदान में उतार दिया है।
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साल 2003 में कांग्रेस ने इस विस क्षेत्र में विद्या जार को चुनावी मैदान में उतारा तो कांग्रेस से बागी होकर मंजीत डोगरा ने आजाद चुनाव लड़ा। नतीजा यह रहा कि भाजपा प्रत्याशी बलदेव शर्मा 12,561 मतों से जीत गए। कांग्रेस की विद्या जार को 11,235 मत मिले, जबकि आजाद मंजीत डोगरा ने 10,568 मत हासिल किया।
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वर्ष 2007 के विधानसभा के चुनाव में मुकाबला चार प्रत्याशियों में हुआ। इसमें भी कांग्रेस को बगावत का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस के पूर्व विधायक मंजीत डोगरा की पत्नी अरविंदर रानी ने आजाद चुनाव लड़ा और इस कारण कांग्रेस की यहां हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा के बलदेव शर्मा ने इस चुनाव में बाजी मारी थी।
साल 2012 में मुकाबला सीधा हुआ। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी इंद्रदत्त लखनपाल ने भाजपा के बलदेव शर्मा को 2,658 मतों से हराया। इसके बाद साल 2017 और 2022 में बगावत के चलते तिकोने मुकाबले हुए। 2017 में कांग्रेस में बगावत कर सीताराम भारद्वाज ने आजाद चुनाव लड़ा और इस चुनाव में कांग्रेस महज 439 मतों से जीत दर्ज कर सकी। हालांकि चुनावी नतीजों के बाद सीता राम भारद्वाज भाजपा में शामिल हो गए थे।
2022 में बगावत भाजपा में हुई। भाजपा के बागी संजीव शर्मा ने फिर आजाद चुनाव लड़ा और भाजपा को यहां से लगातार तीसरी हार का सामना करना पड़ा।
साल 2017
मत
भाजपा बलदेव शर्मा
25,240
कांग्रेस
इंद्रदत्त लखनपाल
25,659
आजाद
सीता राम भारद्वाज
5,181
साल 2022
मत
भाजपा माया शर्मा
16501
कांग्रेस
इंद्रदत्त लखनपाल
30293
आजाद
संजीव शर्मा
15252
समर्थकों के विश्वास पर लड़ा था चुनाव : संजीव
संजीव शर्मा का कहना है कि गत विस चुनावों में समर्थकों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के विश्वास पर चुनाव लड़ा था। इस बार भी विचार-विमर्श जारी है। भाजपा में उनकी वापसी नहीं हुई है। ऐसे में उनके समर्थक व वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की राय पर आगामी निर्णय होगा। लोगों के साथ जनसंपर्क लगातार जारी है।