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हर दिन करें प्रभु का सिमरन : मुकेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। सीनियर सिटीजन काउंसिल की ओर से शहर के वार्ड नंबर पांच में स्थित बाल भवन हमीरपुर में श्रीरामचरितमानस कथा के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य मुकेश शर्मा ने संगत को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने प्रभु श्रीराम के बाल चरित्र का सुंदर तरीके से वर्णन किया।
कथा व्यास आचार्य मुकेश शर्मा ने बताया कि भगवान का नाम लेने से जीवन की यात्रा का पता ही नहीं चलता। इसलिए प्रभु का सिमरन प्रतिदिन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु से रिश्ता जोड़ तो लीजिए फिर देखिए किस प्रकार जीवन रूपी नैया भवसागर से पार होती है। उन्होंने कहा कि सत्संग और श्री हरि की कथा सुनने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता। रविवार को प्रभु श्रीराम के बाल अवस्था में नामकरण से लेकर कथा का शुभारंभ किया गया। कथा व्यास आचार्य मुकेश शर्मा ने संगतों को राम के बाल रूप के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि किस प्रकार भगवान शिव श्रीराम के बाल को देखने के लिए एक ज्योतिषी के रूप में पहुंचे और प्रभु श्रीराम के बारे में राधा दशरथ और माता कौशल्य को इसकी जानकारी दी। प्रभु श्रीराम का नामकरण राम नाम रघुकुल के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने दिया था। उन्होंने कहा कि राम नाम जपने से सारे दुख समाप्त हो जाते हैं, क्योंकि भगवान के पास न दुख है, न सुख है। भगवान के पास तो केवल आनंद ही आनंद है। दुख और सुख हमारे किए गए कर्मों का ही फल है। इस संसार का भरण पोषण किसी भी वस्तु से नहीं किया जा सकता यदि आपस में स्नेह नहीं है। प्रभु श्रीराम के बाद भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण का भी नामकरण किया गया। उसके बाद ताड़का वध का भी वर्णन किया, जिसने विश्वामित्र के यज्ञ में बाधा उत्पन्न की थी।
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हमीरपुर। सीनियर सिटीजन काउंसिल की ओर से शहर के वार्ड नंबर पांच में स्थित बाल भवन हमीरपुर में श्रीरामचरितमानस कथा के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य मुकेश शर्मा ने संगत को झूमने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने प्रभु श्रीराम के बाल चरित्र का सुंदर तरीके से वर्णन किया।
कथा व्यास आचार्य मुकेश शर्मा ने बताया कि भगवान का नाम लेने से जीवन की यात्रा का पता ही नहीं चलता। इसलिए प्रभु का सिमरन प्रतिदिन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु से रिश्ता जोड़ तो लीजिए फिर देखिए किस प्रकार जीवन रूपी नैया भवसागर से पार होती है। उन्होंने कहा कि सत्संग और श्री हरि की कथा सुनने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता। रविवार को प्रभु श्रीराम के बाल अवस्था में नामकरण से लेकर कथा का शुभारंभ किया गया। कथा व्यास आचार्य मुकेश शर्मा ने संगतों को राम के बाल रूप के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि किस प्रकार भगवान शिव श्रीराम के बाल को देखने के लिए एक ज्योतिषी के रूप में पहुंचे और प्रभु श्रीराम के बारे में राधा दशरथ और माता कौशल्य को इसकी जानकारी दी। प्रभु श्रीराम का नामकरण राम नाम रघुकुल के गुरु महर्षि वशिष्ठ ने दिया था। उन्होंने कहा कि राम नाम जपने से सारे दुख समाप्त हो जाते हैं, क्योंकि भगवान के पास न दुख है, न सुख है। भगवान के पास तो केवल आनंद ही आनंद है। दुख और सुख हमारे किए गए कर्मों का ही फल है। इस संसार का भरण पोषण किसी भी वस्तु से नहीं किया जा सकता यदि आपस में स्नेह नहीं है। प्रभु श्रीराम के बाद भरत, शत्रुघ्न और लक्ष्मण का भी नामकरण किया गया। उसके बाद ताड़का वध का भी वर्णन किया, जिसने विश्वामित्र के यज्ञ में बाधा उत्पन्न की थी।
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