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संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है रैबीज : वर्मा
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ताल में विश्व रेबीज दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थी सहि
ताल विद्यालय में मनाया जिला स्तरीय रैबीज दिवस मनाया
संवाद न्यूज एजेंसी
ताल (हमीरपुर)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ताल में जिला स्तरीय विश्व रैबीज दिवस मनाया गया। इस मौके पर जन शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बीरबल वर्मा ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को रैबीज के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि रैबीज एक ऐसा वायरस है जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। दुनिया में आज भी कई हजार मौतें जानवरों, कुत्तों के
काटने से हुए रैबीज संक्रमण से होती हैं। भारत में भी रैबीज से मौतें हो रही हैं। अगर कोई जानवर काटता है तो सबसे पहले साबुन पानी से घाव को कम से कम 15 मिनट धोएं। उसके बाद एंटीसेप्टिक ईथनोल बीटाडीन से अच्छी तरह साफ करें। घाव को बांधें नहीं, खुला रखें। उसके बाद तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। एंटी रैबीज के टीके और इलाज पूरा करवाएं।
इस बीमारी की रोकथाम के लिए पालतू जानवर घर लाने से पहले रैबीज रोधी टीका लगवाएं। उसके बाद तीन महीने की उम्र पर टीका लगवाएं। उसके बाद हर साल टीकाकरण करवाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग कुत्ते या बंदर के काटने पर घरेलू उपचार करने लग जाते हैं। इससे रैबीज का खतरा बढ़ जाता है । समय पर टीकाकरण व इलाज से बचा जा सकता है इस मौके पर प्रधानाचार्य अतुल शर्मा ने भी अपने विचार रखे और सभी का धन्यवाद किया। इस मौके पर व स्टाफ सहित 200 के लगभग प्रतिभागियों ने भाग लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ताल (हमीरपुर)। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ताल में जिला स्तरीय विश्व रैबीज दिवस मनाया गया। इस मौके पर जन शिक्षा एवं सूचना अधिकारी बीरबल वर्मा ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को रैबीज के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि रैबीज एक ऐसा वायरस है जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों के काटने से फैलता है। दुनिया में आज भी कई हजार मौतें जानवरों, कुत्तों के
काटने से हुए रैबीज संक्रमण से होती हैं। भारत में भी रैबीज से मौतें हो रही हैं। अगर कोई जानवर काटता है तो सबसे पहले साबुन पानी से घाव को कम से कम 15 मिनट धोएं। उसके बाद एंटीसेप्टिक ईथनोल बीटाडीन से अच्छी तरह साफ करें। घाव को बांधें नहीं, खुला रखें। उसके बाद तुरंत अस्पताल जाना चाहिए। एंटी रैबीज के टीके और इलाज पूरा करवाएं।
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इस बीमारी की रोकथाम के लिए पालतू जानवर घर लाने से पहले रैबीज रोधी टीका लगवाएं। उसके बाद तीन महीने की उम्र पर टीका लगवाएं। उसके बाद हर साल टीकाकरण करवाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग कुत्ते या बंदर के काटने पर घरेलू उपचार करने लग जाते हैं। इससे रैबीज का खतरा बढ़ जाता है । समय पर टीकाकरण व इलाज से बचा जा सकता है इस मौके पर प्रधानाचार्य अतुल शर्मा ने भी अपने विचार रखे और सभी का धन्यवाद किया। इस मौके पर व स्टाफ सहित 200 के लगभग प्रतिभागियों ने भाग लिया।
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