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Hamirpur (Himachal) News: परीक्षाओं के बीच प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर उठे सवाल
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हमीरपुर। जिला हमीरपुर में एक तरफ स्कूली बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं, तो दूसरी तरफ शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं। प्रत्येक शिक्षा खंड के शिक्षकों के लिए पांच-पांच दिन के यह कार्यक्रम अलग-अलग स्थानों पर चले हैं। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में टीजीटी शिक्षक, जेबीटी शिक्षक, भाषा अध्यापक, खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी और खंड स्रोत केंद्र समन्वयकों समेत अन्य कैडर के शिक्षक बुलाए जा रहे हैं। इसके चलते शिक्षकों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षकों को यह समझ में नहीं आ रहा कि वे स्कूल में ड्यूटी दें या फिर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लें। जिन स्कूलों में गैर बोर्ड वार्षिक परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं, वहां मूल्यांकन का कार्य चल रहा है। ताकि वार्षिक परीक्षाओं के परिणाम समय पर घोषित किए जा सकें लेकिन प्रशिक्षण कार्यक्रम के चलते, न केवल वार्षिक परीक्षाएं बल्कि मूल्यांकन के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। फरवरी माह से ये प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं। जिन्हें स्टार प्रोजेक्ट और राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे आदि नाम दिए गए हैं। अभी 31 मार्च को कुछ ही समय रह गया है। ऐसा माना जा रहा है कि केंद्र सरकार से विभिन्न कार्यशालाओं के लिए एसएसए और आरएमएसए के तहत आया यह बजट लैप्स न हो जाए, इसलिए वार्षिक परीक्षाओं के दौरान यह प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। अगर वार्षिक परीक्षाओं से पूर्व इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम होते तो न तो शिक्षकों को दिक्कतें पेश आती और न ही वार्षिक परीक्षाएं और उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य प्रभावित होता।
उधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं डाइट प्रधानाचार्य धर्मपाल चौधरी ने कहा कि विभाग से जब बजट आया, उसके बाद ही यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। अगर बजट पहले मिलता तो प्रशिक्षण कार्यक्रम वार्षिक परीक्षाओं से पूर्व करवा जा सकते थे लेकिन वर्तमान में भी कई स्कूलों में गैर बोर्ड की परीक्षाएं हो चुकी हैं, इसलिए इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से परीक्षाएं और मूल्यांकन कार्य प्रभावित होने के बहुत कम आसार हैं।
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शिक्षकों को यह समझ में नहीं आ रहा कि वे स्कूल में ड्यूटी दें या फिर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लें। जिन स्कूलों में गैर बोर्ड वार्षिक परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं, वहां मूल्यांकन का कार्य चल रहा है। ताकि वार्षिक परीक्षाओं के परिणाम समय पर घोषित किए जा सकें लेकिन प्रशिक्षण कार्यक्रम के चलते, न केवल वार्षिक परीक्षाएं बल्कि मूल्यांकन के कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। फरवरी माह से ये प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं। जिन्हें स्टार प्रोजेक्ट और राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे आदि नाम दिए गए हैं। अभी 31 मार्च को कुछ ही समय रह गया है। ऐसा माना जा रहा है कि केंद्र सरकार से विभिन्न कार्यशालाओं के लिए एसएसए और आरएमएसए के तहत आया यह बजट लैप्स न हो जाए, इसलिए वार्षिक परीक्षाओं के दौरान यह प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। अगर वार्षिक परीक्षाओं से पूर्व इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम होते तो न तो शिक्षकों को दिक्कतें पेश आती और न ही वार्षिक परीक्षाएं और उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य प्रभावित होता।
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उधर, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं डाइट प्रधानाचार्य धर्मपाल चौधरी ने कहा कि विभाग से जब बजट आया, उसके बाद ही यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। अगर बजट पहले मिलता तो प्रशिक्षण कार्यक्रम वार्षिक परीक्षाओं से पूर्व करवा जा सकते थे लेकिन वर्तमान में भी कई स्कूलों में गैर बोर्ड की परीक्षाएं हो चुकी हैं, इसलिए इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों से परीक्षाएं और मूल्यांकन कार्य प्रभावित होने के बहुत कम आसार हैं।
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