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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Prepared players for 25 years, now Tarsem has become an excellent farmer through vegetable production.

Hamirpur (Himachal) News: 25 साल खिलाड़ी तैयार किए, अब सब्जी उत्पादन से तरसेम बने उत्कृष्ट किसान

Thu, 08 Aug 2024 07:26 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Aug 2024 07:26 PM IST
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15 कनाल बंजर भूमि पर सब्जी उत्पादन करके बाजारों में कर रहे सप्लाई
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वर्षा जल का संग्रहण कर हो रही सब्जी के खेतों की सिंचाई

संवाद न्यूज एजेंसी
जाहू (हमीरपुर)। शिक्षा विभाग में 25 साल शारीरिक शिक्षक के रूप में खेल के मैदान में अच्छे खिलाड़ी तैयार करने के बाद अब तरसेम चंद उत्कृष्ट किसान बन गए। हमीरपुर जिले के भोरंज उपमंडल की मुंडखर पंचायत के जमली गांव के सेवानिवृत्त शारीरिक शिक्षक तरसेम चंद (69) बेरोजगार युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। जमली और मनोह में सुनैहल खड्ड के किनारे करीब 15 कनाल भूमि पर टमाटर के 2,000 पौधे लगाए हैं। इसके अलावा खीरा, लौकी, कद्दू, शिमला मिर्च, हरी मिर्च और परोड की सब्जी से भरे खेत आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। चारों तरफ बरसात के मौसम में सब्जी के दाम आसमान को छू रहे हैं लेकिन तरसेम चंद के खेतों में निकली सब्जी सस्ती होने के कारण इसकी काफी मांग है। सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सिंचाई सुविधा के लिए तीन कुएं बनाए गए हैं तथा वर्षा जल संग्रहण के लिए पानी की एक-एक बूंद को पांच टैंकों में संग्रहीत किया जा रहा है। सिंचाई के समय पानी बर्बाद न हो, इसके लिए मलचिंग और ड्रिपिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। सब्जी के खेतों में नमी रहने से अच्छी पैदावार हो रही है। लोकल सब्जी की जाहू, मुंडखर, सुलगवान, मनोह, लदरौर, भरेडी के बाजार में काफी मांग है। सब्जी में टमाटर 50 किलोग्राम प्रति दिन, लौकी 70 किलोग्राम, करेला 50 किलोग्राम, खीरा डेढ़ क्विंटल, कद्दू 40 से 50 किलो, हरी मिर्च 10 किलोग्राम व शिमला मिर्च 10 किलोग्राम हर रोज निकल रही है। इससे हर रोज 8000 से 10000 रुपये की आमदनी हो रही है। पिछले पांच सालों से इस कार्य में लगे तरसेम चंद बिना किसी प्रशिक्षण से कमाई कर रहे हैं। अप्रैल से लेकर सितंबर-अक्तूबर तक सब्जी उत्पादन से 7 से 8 लाख रुपयेे मासिक आय होने की उम्मीद है।

तरसेम चंद का कहना है कि सब्जी उत्पादन अब एक शौक बन गया है। हरे-भरे खेतों के बीच रहना आदत बन गई है। उन्होंने बेरोजगार युवाओं से आह्वान किया है कि सब्जी उत्पादन का कार्य करके स्वरोजगार अपनाएं तथा आर्थिक स्थिति को मजबूत करें। उन्हें कृषि विभाग से मलाल है कि आज तक कभी भी सब्जी उत्पाद के लिए सम्मानित नहीं किया।
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