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Hamirpur (Himachal) News: बड़सर अस्पताल में विशेषज्ञों के पद रिक्त, आपात स्थिति में मरीजों को किया जा रहा रेफर
Mon, 18 Aug 2025 12:21 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 18 Aug 2025 12:21 AM IST
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सिविल अस्पताल बड़सर का भवन । संवाद
हमीरपुर। सिविल अस्पताल बड़सर में मरीजों को उपचार करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में लंबे समय से चार विशेषज्ञों के पद रिक्त हैं। इस कारण मरीजों को आपात स्थिति में दूरदराज के अस्पताल में रेफर किया जा रहा है।
तीन जिलों के सीमा के साथ स्थित होने के कारण अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों लोग स्वास्थ्य जांच व उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल में मरीजों को उपचार न मिलने से अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल का पूरा भार एमबीबीएस चिकित्सक के भरोसे छोड़ा हुआ है। ऐसे में मरीजों को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
मरीजों प्रताप राणा, कैहर सिंह, प्रदीप, यशपाल जमवाल, सुमना देवी आदि ने कहा कि सिविल अस्पताल का दर्जा प्राप्त होने के बाद भी अस्पताल में मरीजों को प्राथमिक सुविधाएं नहीं मिला पा रही हैं। अस्पताल में प्रतिदिन 450 के करीब ओपीडी रहती है, लेकिन मरीजों को आपात स्थिति में विशेष जांच के लिए दूरदराज के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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अस्पताल को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वर्ष 2016 में सिविल अस्पताल का दर्जा दिया था, ताकि मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े, लेकिन अभी तक अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं प्राथमिक उपचार तक ही सीमित है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने विभाग से अस्पताल में रिक्त मेडिसिन, शिशु रोग, महिला रोग और चर्म रोग विशेषज्ञ का पद भरने की मांग की है।
कोट
अस्पताल में रिक्त विशेषज्ञों के पदों के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। रिक्त पदों पर शीघ्र ही नियुक्ति होगी। इससे मरीजों को उपचार करवाने में परेशानी नहीं होगी।
-अरविंद टंडन, खंड स्वास्थ्य अधिकारी, बड़सर
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तीन जिलों के सीमा के साथ स्थित होने के कारण अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों लोग स्वास्थ्य जांच व उपचार करवाने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन अस्पताल में मरीजों को उपचार न मिलने से अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल का पूरा भार एमबीबीएस चिकित्सक के भरोसे छोड़ा हुआ है। ऐसे में मरीजों को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
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मरीजों प्रताप राणा, कैहर सिंह, प्रदीप, यशपाल जमवाल, सुमना देवी आदि ने कहा कि सिविल अस्पताल का दर्जा प्राप्त होने के बाद भी अस्पताल में मरीजों को प्राथमिक सुविधाएं नहीं मिला पा रही हैं। अस्पताल में प्रतिदिन 450 के करीब ओपीडी रहती है, लेकिन मरीजों को आपात स्थिति में विशेष जांच के लिए दूरदराज के अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इससे उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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अस्पताल को पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वर्ष 2016 में सिविल अस्पताल का दर्जा दिया था, ताकि मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े, लेकिन अभी तक अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं प्राथमिक उपचार तक ही सीमित है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने विभाग से अस्पताल में रिक्त मेडिसिन, शिशु रोग, महिला रोग और चर्म रोग विशेषज्ञ का पद भरने की मांग की है।
कोट
अस्पताल में रिक्त विशेषज्ञों के पदों के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। रिक्त पदों पर शीघ्र ही नियुक्ति होगी। इससे मरीजों को उपचार करवाने में परेशानी नहीं होगी।
-अरविंद टंडन, खंड स्वास्थ्य अधिकारी, बड़सर