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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Pain reliever vaccines are not available, number of patients is increasing

Hamirpur (Himachal) News: नहीं मिल रहे दर्द निवारक टीके, बढ़ रहा मरीजों का मर्ज

Mon, 23 Sep 2024 05:38 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2024 05:38 PM IST
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निशुल्क दवाइयों के लिए मरीजों को खर्च करने पड़ रहे हैं रुपये
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आपातकाल में आए मरीजों को नहीं मिल रहे डिक्लोनैक टीके

हर दर्द के लिए दिया जाता है डिक्लोनैक टीका, मरीज परेशान

बाहर से लाने के लिए मजबूर हो रहे हैं तीमारदार, रात को होती है मुश्किल

छह माह से थैलेसीमिया की दवाई का स्टॉक भी नहीं आया
संवाद न्यूज एजेंसी

हमीरपुर। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में अब लोगों को आम दवाई से लेकर दर्द निवारक टीके के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के आपातकाल वार्ड में डिक्लोनैक टीका तक नहीं है। जबकि किसी भी चोटिल व्यक्ति या दर्द से पीड़ित व्यक्ति को सबसे पहले यही टीका लगाना पड़ता है। लेकिन, अस्पताल में यह टीका तक उपलब्ध नहीं है। अन्य वार्डों में दाखिल मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


आपातकाल में आए मरीजों के साथ तीमारदार बाहर से डिक्लोनैक टीका ला रहे हैं। तब जाकर चिकित्सक यह टीका लगा रहा है। ऐसे में तीमारदारों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस टीके का इस्तेमाल जोड़ों और पीठ के दर्द, पित्त की पथरी, गुर्दे की पथरी, चोटों, आघात, फ्रेक्चर और सर्जरी के बाद दर्द जैसी स्थितियों में राहत के लिए किया जाता है। लेकिन, अस्पताल में यह टीका उपलब्ध नहीं हो रहा है। सात माह से अस्पताल में थैलेसीमिया की दवाई नहीं आई है। अस्पताल प्रबंधन मूकदर्शक बना हुआ है। अब साधारण दवाइयों व टीकों को लेने के लिए भी तीमारदारों को बाहर निजी स्टोरों की ओर रुख करना पड़ता है। डिक्लोनैक टीके की कीमत बाजार में 15 से 20 रुपये है जबकि थैलेसीमिया दवाई की कीमत 1500 रुपये के करीब है। ऐसे में मरीजों का कहना है कि जब अस्पताल में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले टीके व दवाइयां ही नहीं मिलेंगी तो मरीज कहां जाएंगे। मरीजों पवन, अनुराग, रमेश, सुनील, कवि, सुषमा, रानी, सुलक्षणा, मनीषा आदि ने कहा कि अस्पताल में टीका तक नहीं है। थैलेसीमिया की दवाई सात माह से नहीं मिल रही है। मरीजों को बाहर से दवाइयां और टीके लेने पड़ रहे हैं। उन पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। अस्पताल के अधिकारियों को इस बारे में पता है लेकिन वह इन दवाइयों व टीकों की उपलब्धता को लेकर जहमत नहीं उठा रहे हैं। इससे आम जनता परेशान है।
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कोट
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि समस्या का हल कर दिया जाएगा। कई बार स्टाक खत्म हो जाता है। जल्द की दवाइयों की व्यवस्था कर ली जाएगी।
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