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Hamirpur (Himachal) News: पत्नी को 8,000 मासिक अंतरिम भरण-पोषण देने के आदेश
Sat, 22 Nov 2025 01:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 22 Nov 2025 01:27 AM IST
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हमीरपुर। फैमिली कोर्ट हमीरपुर ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण के रूप में प्रतिमाह 8,000 और केस खर्च के रूप में 15,000 रुपये देने का आदेश दिया है। यह आदेश प्रधान न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी ने 21 नवंबर को जारी किया।
सुजानपुर उपमंडल निवासी महिला ने अपने पति के खिलाफ चल रहे तलाक मामले के दौरान भरण-पोषण और कोर्ट केस का खर्च देने की मांग की थी। महिला ने अदालत को बताया कि उसके पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है, जबकि पति पहले दुबई में होटल मैनेजर के रूप में काम कर चुका है और लाखों रुपये कमा चुका है। वर्तमान में भी कथित तौर पर होटल मैनेजर के रूप में अच्छी आय प्राप्त कर रहा है।
उधर, पति ने पत्नी की मांग का विरोध करते हुए कहा कि उसके पास सीमित आय है और वह दुबई में 1739 दिरहम (लगभग 38,000 रुपये) मासिक कमा रहा था। उसने यह भी कहा कि पत्नी की ओर से लगाए गए आरोप गलत हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि महिला के पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है, जबकि पति की आय का स्रोत मौजूद है।
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अदालत ने कहा कि मामले के निपटारे तक प्रतिमाह 8,000 रुपये अंतरिम भरण-पोषण और 15,000 रुपये केस का खर्च पति की ओर से दिया जाएगा। आदेश पारित करते हुए अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
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सुजानपुर उपमंडल निवासी महिला ने अपने पति के खिलाफ चल रहे तलाक मामले के दौरान भरण-पोषण और कोर्ट केस का खर्च देने की मांग की थी। महिला ने अदालत को बताया कि उसके पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है, जबकि पति पहले दुबई में होटल मैनेजर के रूप में काम कर चुका है और लाखों रुपये कमा चुका है। वर्तमान में भी कथित तौर पर होटल मैनेजर के रूप में अच्छी आय प्राप्त कर रहा है।
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उधर, पति ने पत्नी की मांग का विरोध करते हुए कहा कि उसके पास सीमित आय है और वह दुबई में 1739 दिरहम (लगभग 38,000 रुपये) मासिक कमा रहा था। उसने यह भी कहा कि पत्नी की ओर से लगाए गए आरोप गलत हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि महिला के पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है, जबकि पति की आय का स्रोत मौजूद है।
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अदालत ने कहा कि मामले के निपटारे तक प्रतिमाह 8,000 रुपये अंतरिम भरण-पोषण और 15,000 रुपये केस का खर्च पति की ओर से दिया जाएगा। आदेश पारित करते हुए अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।