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Hamirpur (Himachal) News: मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग वार्ड में महज दस बिस्तरों की सुविधा
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बिस्तर की क्षमता कम होने से बच्चों का उपचार करवाने में हो रही परेशानी
बीमार बच्चों की अधिक संख्या होने पर एक ही बिस्तर पर दाखिल करने पड़ते हैं दो-दो
वर्तमान में गायनी वार्ड के साथ बनाया गया है शिशु रोग वार्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में शिशु रोग वार्ड में महज आठ बिस्तरों की सुविधा है। इससे तीमारदारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार बीमार बच्चों की संख्या अधिक हो जाने पर एक ही बिस्तर पर दो-दो को दाखिल करना पड़ता है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में जिलाभर से मरीज इलाज करवाने आते हैं। वहीं, अस्पताल में जहां पर शिशु रोग वार्ड बनाया गया है, वहीं पहले गायनी वार्ड है। वहां पर पंखा आदि न होने के कारण दुर्गंध आ रही है। इससे तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों सुरेश, सलोचना देवी, पवन कुमार, रत्न चंद, कमला देवी आदि ने कहा कि शिशु रोग वार्ड को कहीं और शिफ्ट किया जाए और वहां पर बिस्तरों की संख्या में भी इजाफा किया जाए। यहां महज आठ बिस्तरों की ही सुविधा उपलब्ध है। बरसात के मौसम में बच्चे काफी बीमारी होते हैं। ऐसे में विशेष प्रबंध किए जाने चाहिए। इस बारे में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि वर्तमान में शिशु वार्ड में आठ बिस्तर उपलब्ध हैं और जब जरूरत पड़ती है तो प्रबंध कर दिया जाता है।
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बीमार बच्चों की अधिक संख्या होने पर एक ही बिस्तर पर दाखिल करने पड़ते हैं दो-दो
वर्तमान में गायनी वार्ड के साथ बनाया गया है शिशु रोग वार्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर में शिशु रोग वार्ड में महज आठ बिस्तरों की सुविधा है। इससे तीमारदारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार बीमार बच्चों की संख्या अधिक हो जाने पर एक ही बिस्तर पर दो-दो को दाखिल करना पड़ता है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में जिलाभर से मरीज इलाज करवाने आते हैं। वहीं, अस्पताल में जहां पर शिशु रोग वार्ड बनाया गया है, वहीं पहले गायनी वार्ड है। वहां पर पंखा आदि न होने के कारण दुर्गंध आ रही है। इससे तीमारदारों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों सुरेश, सलोचना देवी, पवन कुमार, रत्न चंद, कमला देवी आदि ने कहा कि शिशु रोग वार्ड को कहीं और शिफ्ट किया जाए और वहां पर बिस्तरों की संख्या में भी इजाफा किया जाए। यहां महज आठ बिस्तरों की ही सुविधा उपलब्ध है। बरसात के मौसम में बच्चे काफी बीमारी होते हैं। ऐसे में विशेष प्रबंध किए जाने चाहिए। इस बारे में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल वर्मा ने कहा कि वर्तमान में शिशु वार्ड में आठ बिस्तर उपलब्ध हैं और जब जरूरत पड़ती है तो प्रबंध कर दिया जाता है।