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Hamirpur (Himachal) News: आपातकाल वार्ड के बाहर महज एक स्ट्रेचर, मरीज हो रहे परेशान
Wed, 06 Nov 2024 01:53 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Wed, 06 Nov 2024 01:53 AM IST
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डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में महज 12 स्ट्रेचर, उनमें से भी कइयों के टायर निकले
गंभीर मरीजों को आपात वार्ड में पहुंचाने में हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में आपातकाल वार्ड के बाहर कभी एक तो कभी दो स्ट्रेचर ही मिल रहे हैं। ऐसे में आपात स्थिति में आने वाले मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आपातकाल वार्ड में कई बार गंभीर रूप से घायल तो कभी चलने में असमर्थ मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में यहां पर एक या दो ही स्ट्रेचर होते हैं। कई बार तो दोनों स्ट्रेचर पर मरीज होते हैं। ऐसे में अन्य मरीजों को लाने में परेशानी होती है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में दूरदराज के क्षेत्रों से लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। जिला के अन्य सिविल अस्पतालों से अति गंभीर मरीजों को यहां के लिए रेफर किया जाता है, लेकिन यहां गेट से वार्ड तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। हालांकि यहां पर हर समय एक सुरक्षा कर्मी तैनात रहता है, जो सुविधा उपलब्ध करवाता है, लेकिन यहां पर कम से कम पांच स्ट्रेचरों की आवश्यकता है।
अस्पताल में पहुंचे मरीज सूर्यप्रकाश, रविंद्र, मनोज, रविकांत, सुदर्शन, सुरेश, जीवनलता, ममता, सरिता, अंजना आदि ने कहा कि यहां पर कम से कम पांच स्ट्रेचर उपलब्ध होने चाहिएं, ताकि आपातकाल में मरीजों को पहुंचाने में परेशानी न हो। गौर हो कि अस्पताल में करीब 12 स्ट्रेचर हैं, जिनमें से कइयों के टायर टूटे हैं, तो कइयों के अन्य भाग टूटे हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानी होती है। वहीं, इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि अस्पताल में स्ट्रेचर हैं और जहां आवश्यकता होती हैं, वहां पर उपलब्ध करवाए जाते हैं।
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गंभीर मरीजों को आपात वार्ड में पहुंचाने में हो रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में आपातकाल वार्ड के बाहर कभी एक तो कभी दो स्ट्रेचर ही मिल रहे हैं। ऐसे में आपात स्थिति में आने वाले मरीजों को वार्ड तक पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आपातकाल वार्ड में कई बार गंभीर रूप से घायल तो कभी चलने में असमर्थ मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में यहां पर एक या दो ही स्ट्रेचर होते हैं। कई बार तो दोनों स्ट्रेचर पर मरीज होते हैं। ऐसे में अन्य मरीजों को लाने में परेशानी होती है। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में दूरदराज के क्षेत्रों से लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। जिला के अन्य सिविल अस्पतालों से अति गंभीर मरीजों को यहां के लिए रेफर किया जाता है, लेकिन यहां गेट से वार्ड तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है। हालांकि यहां पर हर समय एक सुरक्षा कर्मी तैनात रहता है, जो सुविधा उपलब्ध करवाता है, लेकिन यहां पर कम से कम पांच स्ट्रेचरों की आवश्यकता है।
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अस्पताल में पहुंचे मरीज सूर्यप्रकाश, रविंद्र, मनोज, रविकांत, सुदर्शन, सुरेश, जीवनलता, ममता, सरिता, अंजना आदि ने कहा कि यहां पर कम से कम पांच स्ट्रेचर उपलब्ध होने चाहिएं, ताकि आपातकाल में मरीजों को पहुंचाने में परेशानी न हो। गौर हो कि अस्पताल में करीब 12 स्ट्रेचर हैं, जिनमें से कइयों के टायर टूटे हैं, तो कइयों के अन्य भाग टूटे हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानी होती है। वहीं, इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि अस्पताल में स्ट्रेचर हैं और जहां आवश्यकता होती हैं, वहां पर उपलब्ध करवाए जाते हैं।
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