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Hamirpur (Himachal) News: भर्ती परीक्षा में पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर लागू हो ओएमआर शीट
Tue, 02 Sep 2025 04:57 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 02 Sep 2025 04:57 AM IST
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एमबीबीएस स्नातकों ने उठाई भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग
भर्ती प्रक्रिया में सुधार कर 50:50 फार्मूला लागू किया जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
भोरंज (हमीरपुर)। प्रशिक्षित एमबीबीएस स्नातकों ने प्रदेश सरकार से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग की है। एमबीबीएस डिग्री धारकों मुनीश, सक्षम, राधिका, सुमित, राजेश, कमलेश, दिनेश ने कहा कि प्रदेश भर्ती प्रक्रिया की व्यवस्था न्यायसंगत नहीं है और इसमें सुधार कर 50:50 फार्मूला लागू किया जाना चाहिए। हाल ही में लोक सेवा आयोग की ओर से चिकित्सकों के 200 पदों का विज्ञापन जारी हुआ था, लेकिन इनमें से केवल 166 पद ही भरे जा सके, जबकि 34 सीटें रिक्त रह गईं।
सामान्य वर्ग के 79 पदों में से केवल 59 ही भरे गए, शेष 20 पदों को आरक्षित वर्ग में समायोजित कर दिया गया। जब पहले से वर्गीकरण किया जा चुका है तो सीटें उसी के अनुरूप भरी जानी चाहिए थीं। यह निर्णय पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। भर्ती प्रक्रिया में 50 प्रतिशत पद लोक सेवा आयोग की ओर से ओएमआर शीट आधारित परीक्षा से भरे जाएं। शेष 50 प्रतिशत पद बैचवाइज एवं अनुभव के आधार पर भरे जाएं। वर्तमान में आयोजित विषय विवरणात्मक परीक्षा का मूल्यांकन दोषपूर्ण है क्योंकि इसमें कई विषय विशेषज्ञों की ओर से जांच की जाती है। चिकित्सकों ने कहा कि उन्होंने 5 वर्ष 6 माह का कठोर अध्ययन कर यह डिग्री प्राप्त की है, लेकिन अब नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव उन्हें हतोत्साहित कर रहा है। युवाओं ने प्रदेश सरकार एवं स्वास्थ्य मंत्री से पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर ओएमआर परीक्षा लागू करने और भर्ती प्रक्रिया को न्यायसंगत बनाने की मांग की है।
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भर्ती प्रक्रिया में सुधार कर 50:50 फार्मूला लागू किया जाए
संवाद न्यूज एजेंसी
भोरंज (हमीरपुर)। प्रशिक्षित एमबीबीएस स्नातकों ने प्रदेश सरकार से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग की है। एमबीबीएस डिग्री धारकों मुनीश, सक्षम, राधिका, सुमित, राजेश, कमलेश, दिनेश ने कहा कि प्रदेश भर्ती प्रक्रिया की व्यवस्था न्यायसंगत नहीं है और इसमें सुधार कर 50:50 फार्मूला लागू किया जाना चाहिए। हाल ही में लोक सेवा आयोग की ओर से चिकित्सकों के 200 पदों का विज्ञापन जारी हुआ था, लेकिन इनमें से केवल 166 पद ही भरे जा सके, जबकि 34 सीटें रिक्त रह गईं।
सामान्य वर्ग के 79 पदों में से केवल 59 ही भरे गए, शेष 20 पदों को आरक्षित वर्ग में समायोजित कर दिया गया। जब पहले से वर्गीकरण किया जा चुका है तो सीटें उसी के अनुरूप भरी जानी चाहिए थीं। यह निर्णय पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। भर्ती प्रक्रिया में 50 प्रतिशत पद लोक सेवा आयोग की ओर से ओएमआर शीट आधारित परीक्षा से भरे जाएं। शेष 50 प्रतिशत पद बैचवाइज एवं अनुभव के आधार पर भरे जाएं। वर्तमान में आयोजित विषय विवरणात्मक परीक्षा का मूल्यांकन दोषपूर्ण है क्योंकि इसमें कई विषय विशेषज्ञों की ओर से जांच की जाती है। चिकित्सकों ने कहा कि उन्होंने 5 वर्ष 6 माह का कठोर अध्ययन कर यह डिग्री प्राप्त की है, लेकिन अब नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव उन्हें हतोत्साहित कर रहा है। युवाओं ने प्रदेश सरकार एवं स्वास्थ्य मंत्री से पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर ओएमआर परीक्षा लागू करने और भर्ती प्रक्रिया को न्यायसंगत बनाने की मांग की है।
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