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Hamirpur (Himachal) News: अब सदियों नहीं, चंद दिनों में चट्टान बनेगी मिट्टी
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डा मेघना शर्मा द्वारा तैयार किया गया प्राटोटाइप
हमीरपुर। सदियों बाद मिट्टी से चट्टान बनने की प्रक्रिया को अब चंद दिनों में पूरा करना संभव होगा। आधुनिक तकनीक से बैक्टीरिया और केमिकल के मिश्रण से यह कार्य अब कृत्रिम ढंग से होगा। इसका प्रकृति और पौधों को कोई नुकसान नहीं होगा। मिट्टी को चट्टान में तब्दील करने के लिए एनआईटी हमीरपुर की सहायक प्रोफेसर डॉ. मेघना शर्मा ने बैक्टीरिया और केमिकल के मिश्रण से प्रोटोटाइप (मॉडल) विकसित किया है। इसे नेचर बेस्ड बायोकेमिकल रिएक्टर नाम दिया गया है।
डॉ. मेघना शर्मा ने इस तकनीक पर शोध पीएचडी का पढ़ाई के दौरान आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर नीलिमा सत्यम के निर्देशन में 2018 में शुरू किया था। डॉ. मेघना शर्मा एवं प्रोफेसर नीलिमा सत्यम के इस प्रोटोटाइप के पेटेंट को भारतीय पेटेंट कार्यालय से 2023 में मंजूरी मिल गई है। डॉ. मेघना शर्मा का यह शोध पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण में बेहद कारगर साबित होगा। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी को मजबूती प्रदान कर हादसों को रोकने में यह तकनीक बेहद कारगर होगी। फोरलेन, रेलवेलाइन और अन्य निर्माण प्रोजेक्ट में इस तकनीक के इस्तेमाल से हादसों से बचने में कहीं अधिक सुरक्षा प्राप्त होगी। हिमाचल, उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में आपदा से बचने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। साल 2023 में भारी बारिश से हिमाचल में मची त्रासदी से सैकड़ोंं लोगों की मौत हुई है और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। इस तकनीक से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में जमीन को मजबूती देकर हादसों की संभावनाओं को बेहद कम किया जा सकेगा।
ऐसे चट्टान बनेगी मिट्टी
मिट्टी से चट्टान बनने की प्रक्रिया बेहद धीमी है। समय के साथ मिट्टी धीरे-धीरे मजबूत होकर चट्टान में बदल जाती है। डॉ. मेघना शर्मा ने इस प्रक्रिया को कृत्रिम तरीके से पूरा किया है। उन्होंने बैक्टीरिया और केमिकल के मिश्रण से प्रक्रिया को और तेज किया है। इस प्रक्रिया में बैक्टीरिया, यूरिया और कैल्शियम क्लोराइड के मिश्रण को मिट्टी में डाला जाता है। इससे मिट्टी के कणों के मध्य कैल्शियम कार्बोनेट तत्व तैयार होता है, जो मिट्टी को मजबूत बनाता है। खास बात यह है कि तैयार किए गए प्रोटोटाइप में इस प्रक्रिया की गति को नियंत्रित किया जा सकता है। मसलन जमीन को कितना मजबूत करना है, यह तैयार किए गए मिश्रण की मात्रा और गुणवत्ता पर आधारित होगा। महज दस से बीस दिन में इस प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है। सतह को मजबूत करने के लिए इसे स्प्रे किया जाएगा, जबकि अंदर से मजबूती देने के लिए जमीन के अंदर इंजेक्ट करना होगा। डाॅ. मेघना का कहना है कि तैयार किए गए बैक्टीरिया सॉल्यूशन के इस्तेमाल का कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा। यह पूरी तहर से प्रकृति आधारित शोध है। इस तकनीक से 200 लीटर बैक्टीरिया सॉल्यूशन शोध के दौरान तैयार किया है, जिसके कारगर नतीजे सामने आए हैं।
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पांच साल के लिए रिसर्च प्रोजेक्ट किया मंजूर
एनआईटी हमीरपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्रोफेसर मेघना शर्मा को इस विषय का पेटेंट मिलने के साथ ही आगामी शोध करने के लिए केंद्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डीएसटी) से पांच साल के लिए प्रोजेक्ट मंजूर किया है। पांच वर्ष तक रिसर्च के लिए हर वर्ष सात लाख रुपये का बजट मिलेगा। मेघना को एमटेक में एनआईटी कुरुक्षेत्र में स्वर्ण पदक मिला। डॉ. मेघना शर्मा को भारतीय भू-तकनीकी सोसायटी (आईजीएस) की ओर से भू-तकनीकी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शीर्ष 75 भारतीय महिला ज्ञाताओं में शामिल किया गया है।
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डॉ. मेघना शर्मा ने इस तकनीक पर शोध पीएचडी का पढ़ाई के दौरान आईआईटी इंदौर की प्रोफेसर नीलिमा सत्यम के निर्देशन में 2018 में शुरू किया था। डॉ. मेघना शर्मा एवं प्रोफेसर नीलिमा सत्यम के इस प्रोटोटाइप के पेटेंट को भारतीय पेटेंट कार्यालय से 2023 में मंजूरी मिल गई है। डॉ. मेघना शर्मा का यह शोध पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट के निर्माण में बेहद कारगर साबित होगा। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी को मजबूती प्रदान कर हादसों को रोकने में यह तकनीक बेहद कारगर होगी। फोरलेन, रेलवेलाइन और अन्य निर्माण प्रोजेक्ट में इस तकनीक के इस्तेमाल से हादसों से बचने में कहीं अधिक सुरक्षा प्राप्त होगी। हिमाचल, उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्यों में आपदा से बचने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। साल 2023 में भारी बारिश से हिमाचल में मची त्रासदी से सैकड़ोंं लोगों की मौत हुई है और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। इस तकनीक से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में जमीन को मजबूती देकर हादसों की संभावनाओं को बेहद कम किया जा सकेगा।
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ऐसे चट्टान बनेगी मिट्टी
मिट्टी से चट्टान बनने की प्रक्रिया बेहद धीमी है। समय के साथ मिट्टी धीरे-धीरे मजबूत होकर चट्टान में बदल जाती है। डॉ. मेघना शर्मा ने इस प्रक्रिया को कृत्रिम तरीके से पूरा किया है। उन्होंने बैक्टीरिया और केमिकल के मिश्रण से प्रक्रिया को और तेज किया है। इस प्रक्रिया में बैक्टीरिया, यूरिया और कैल्शियम क्लोराइड के मिश्रण को मिट्टी में डाला जाता है। इससे मिट्टी के कणों के मध्य कैल्शियम कार्बोनेट तत्व तैयार होता है, जो मिट्टी को मजबूत बनाता है। खास बात यह है कि तैयार किए गए प्रोटोटाइप में इस प्रक्रिया की गति को नियंत्रित किया जा सकता है। मसलन जमीन को कितना मजबूत करना है, यह तैयार किए गए मिश्रण की मात्रा और गुणवत्ता पर आधारित होगा। महज दस से बीस दिन में इस प्रक्रिया को पूरा किया जा सकता है। सतह को मजबूत करने के लिए इसे स्प्रे किया जाएगा, जबकि अंदर से मजबूती देने के लिए जमीन के अंदर इंजेक्ट करना होगा। डाॅ. मेघना का कहना है कि तैयार किए गए बैक्टीरिया सॉल्यूशन के इस्तेमाल का कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा। यह पूरी तहर से प्रकृति आधारित शोध है। इस तकनीक से 200 लीटर बैक्टीरिया सॉल्यूशन शोध के दौरान तैयार किया है, जिसके कारगर नतीजे सामने आए हैं।
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने पांच साल के लिए रिसर्च प्रोजेक्ट किया मंजूर
एनआईटी हमीरपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्रोफेसर मेघना शर्मा को इस विषय का पेटेंट मिलने के साथ ही आगामी शोध करने के लिए केंद्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डीएसटी) से पांच साल के लिए प्रोजेक्ट मंजूर किया है। पांच वर्ष तक रिसर्च के लिए हर वर्ष सात लाख रुपये का बजट मिलेगा। मेघना को एमटेक में एनआईटी कुरुक्षेत्र में स्वर्ण पदक मिला। डॉ. मेघना शर्मा को भारतीय भू-तकनीकी सोसायटी (आईजीएस) की ओर से भू-तकनीकी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शीर्ष 75 भारतीय महिला ज्ञाताओं में शामिल किया गया है।