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Hamirpur (Himachal) News: न्यूनतम बस किराया दोगुना होने से यात्रियों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
Tue, 08 Apr 2025 11:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 08 Apr 2025 11:13 AM IST
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गौरव
लोग बोले, फैसले पर दोबारा विचार करे सरकार, आर्थिक बोझ से उभरने के लिए ले रही आम जनमानस विरोधी निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। एक ओर जहां महंगाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, वहीं न्यूनतम बस किराया दोगुना होने से आम जनमानस पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। कई लोगों ने वित्तीय बोझ बढ़ऩे पर चिंता व्यक्त की है। खासकर दैनिक यात्रियों ने जो बस पर ही निर्भर हैं।
रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए इस बढ़ोतरी का मतलब है कि आय का एक हिस्सा यात्रा व्यय के लिए खर्च करना। बसों का न्यूनतम किराया पांच रुपये से बढ़ाकर दस रुपये कर दिया है। न्यूनतम किराया बढऩे पर यात्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हर चीजें महंगी होती जा रही हैं, जिसमें जरूरी चीजें भी शामिल हैं। ऐसे में न्यूनतम किराया बढ़ाना उचित नहीं है। लोगों ने सरकार से इस फैसले पर पुन: विचार करने की मांग की है। कोरोना काल में बसों का किराया बढ़ा था। उस दौरान भी लोेगों की ओर से खासा विरोध दर्ज किया गया था। हालांकि बाद में न्यूनतम किराये में कमी की गई थी। दरअसल मध्यम वर्गीय परिवार छात्र से लेकर नौकरीपेशा तक बसों में सफर करते हैं। ऐसे किराया बढ़ोतरी किसी झटके से कम नहीं है।
-न्यूनतम किराया बढ़ाना सरकार का निर्णय गलत है। जो लोग बसों में सफर करते हैं, वे गरीब तबके के हैं। उन्हें अब बस में सफर करने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ेंगे।-प्यार चंद
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-न्यूनतम किराये में इजाफा नहीं होना चाहिए था। अगर किसी यात्री ने एक किलोमीटर ही जाना हो तो उसे पहले की अपेक्षा अधिक किराया चुकाना पड़ेगा।-गौरव
-सरकार आर्थिक बोझ से उभरने के लिए इस तरह के निर्णय ले रही है। हर बोझ सरकार को जनता पर नहीं लादना चाहिए।-सुनील
-न्यूनतम किराया बढऩे से आमजन को परेशानी होगी। सरकार को इस निर्णय पर पुन: विचार करने की जरूरत है।-राकेश कुमार
-जो लोग रोजाना बसों में सफर करते हैं, उनके लिए मुश्किल हो जाएगी। अब उन्हें नौकरी से मिलने वाले वेतन से खुद के लिए बचाना मुश्किल हो जाएगा।-तरुण दीप
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। एक ओर जहां महंगाई दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, वहीं न्यूनतम बस किराया दोगुना होने से आम जनमानस पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। कई लोगों ने वित्तीय बोझ बढ़ऩे पर चिंता व्यक्त की है। खासकर दैनिक यात्रियों ने जो बस पर ही निर्भर हैं।
रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए इस बढ़ोतरी का मतलब है कि आय का एक हिस्सा यात्रा व्यय के लिए खर्च करना। बसों का न्यूनतम किराया पांच रुपये से बढ़ाकर दस रुपये कर दिया है। न्यूनतम किराया बढऩे पर यात्रियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हर चीजें महंगी होती जा रही हैं, जिसमें जरूरी चीजें भी शामिल हैं। ऐसे में न्यूनतम किराया बढ़ाना उचित नहीं है। लोगों ने सरकार से इस फैसले पर पुन: विचार करने की मांग की है। कोरोना काल में बसों का किराया बढ़ा था। उस दौरान भी लोेगों की ओर से खासा विरोध दर्ज किया गया था। हालांकि बाद में न्यूनतम किराये में कमी की गई थी। दरअसल मध्यम वर्गीय परिवार छात्र से लेकर नौकरीपेशा तक बसों में सफर करते हैं। ऐसे किराया बढ़ोतरी किसी झटके से कम नहीं है।
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-न्यूनतम किराया बढ़ाना सरकार का निर्णय गलत है। जो लोग बसों में सफर करते हैं, वे गरीब तबके के हैं। उन्हें अब बस में सफर करने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ेंगे।-प्यार चंद
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-न्यूनतम किराये में इजाफा नहीं होना चाहिए था। अगर किसी यात्री ने एक किलोमीटर ही जाना हो तो उसे पहले की अपेक्षा अधिक किराया चुकाना पड़ेगा।-गौरव
-सरकार आर्थिक बोझ से उभरने के लिए इस तरह के निर्णय ले रही है। हर बोझ सरकार को जनता पर नहीं लादना चाहिए।-सुनील
-न्यूनतम किराया बढऩे से आमजन को परेशानी होगी। सरकार को इस निर्णय पर पुन: विचार करने की जरूरत है।-राकेश कुमार
-जो लोग रोजाना बसों में सफर करते हैं, उनके लिए मुश्किल हो जाएगी। अब उन्हें नौकरी से मिलने वाले वेतन से खुद के लिए बचाना मुश्किल हो जाएगा।-तरुण दीप

गौरव

गौरव

गौरव

गौरव