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Hamirpur (Himachal) News: नाम का मेडिकल कॉलेज, तीमारदारों के लिए बेंच तक उपलब्ध नहीं
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डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में जमीन पर बैठे तीमारदार। स्रोत : संवाद
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में विभिन्न वार्डों में दाखिल मरीजों के साथ आए तीमारदार जमीन पर बैठने को मजबूर हैं। तीमारदारों के लिए विभिन्न वार्डों के बाहर बैठने के लिए बेंच तक स्थापित नहीं किए गए हैं। ऐसे मेंं तीमारदारों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं, ऐसा ही हाल ओपीडी के बाहर का है। विभिन्न विभागों की ओपीडी के बाहर महज तीन और चार कुर्सियां स्थापित हैं। बाकी मरीज घंटों तक ओपीडी के बाहर खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। वहां बैठने की समस्या है।
वहीं, आईपीडी में मरीजों के साथ आए तीमारदार परेशान है। तीमारदार जमीन पर बाहर बैठकर खाना खाने को मजबूर हैं। सर्दियों के इस सीजन में जमीन पर बैठने में खासी दिक्कत होती है। वार्डों में मरीजों के साथ एक व्यक्ति साथ रहता है। लेकिन, कई बार एक व्यक्ति को भी वहां पर बैठने के लिए स्टूल आदि नहीं होता। इससे या तो तीमारदार वार्ड के अंदर ही जमीन पर बैठते हैं या बाहर बिस्तर लगाते हैं। वहीं, मरीजों को भी इससे दिक्कत होती है क्योंकि उन्हें स्वयं उठकर ही सामान आदि लेना पड़ता है। मरीजों सुरेश, सुरेंद्र, अनीता, सुषमा, संतोषी, पुरुषोत्तम आदि ने कहा कि अस्पताल में बैठने के लिए हर आईपीडी और ओपीडी के बाहर कुर्सियां लगाई जाएं ताकि समस्याओं का सामना न करना पड़े। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि अस्पताल में ओपीडी के बाहर कुर्सियां हैं और आईपीडी में स्टूल दिया जाता है लेकिन मरीजों की संख्या अधिक है।
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वहीं, आईपीडी में मरीजों के साथ आए तीमारदार परेशान है। तीमारदार जमीन पर बाहर बैठकर खाना खाने को मजबूर हैं। सर्दियों के इस सीजन में जमीन पर बैठने में खासी दिक्कत होती है। वार्डों में मरीजों के साथ एक व्यक्ति साथ रहता है। लेकिन, कई बार एक व्यक्ति को भी वहां पर बैठने के लिए स्टूल आदि नहीं होता। इससे या तो तीमारदार वार्ड के अंदर ही जमीन पर बैठते हैं या बाहर बिस्तर लगाते हैं। वहीं, मरीजों को भी इससे दिक्कत होती है क्योंकि उन्हें स्वयं उठकर ही सामान आदि लेना पड़ता है। मरीजों सुरेश, सुरेंद्र, अनीता, सुषमा, संतोषी, पुरुषोत्तम आदि ने कहा कि अस्पताल में बैठने के लिए हर आईपीडी और ओपीडी के बाहर कुर्सियां लगाई जाएं ताकि समस्याओं का सामना न करना पड़े। इस बारे में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि अस्पताल में ओपीडी के बाहर कुर्सियां हैं और आईपीडी में स्टूल दिया जाता है लेकिन मरीजों की संख्या अधिक है।
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