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Hamirpur (Himachal) News: यूट्यूब से सीखा हुनर, डिजाइनर सूट सिलकर मजबूत की आर्थिक स्थिति
Mon, 20 Apr 2026 12:47 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 20 Apr 2026 12:47 AM IST
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बगारटी की शालू। संवाद
हमीरपुर। बगारटी गांव की शालू ने यूट्यूब से सिलाई-कढ़ाई का हुनर सीखकर छोटे से बुटीक की शुरुआत की। इस हुनर से शालू ने एक सफल गृहिणी से उद्यमी बनने तक का सफर तय किया है।
डिजाइनर सूट बनाकर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश की है। अब वह हर महीने घघरी सूट, प्लाजो, फैंसी सिल्क, अनारकली सहित अन्य डिजाइनर सूट सिलकर लगभग 8 से 10 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं, जिससे उनका परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है और गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं।
शादी से पहले उन्होंने पंचायत स्तर पर सिलाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद बढ़ती मांग और नए ट्रेंड को देखते हुए उन्होंने घर बैठे ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म यूट्यूब के माध्यम से सिलाई-कढ़ाई के नए डिजाइन और तकनीकें सीखीं।
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शुरुआत में उन्होंने साधारण कपड़ों की सिलाई से काम शुरू किया, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने डिजाइनर सूट बनाना सीख लिया। आज स्थिति यह है कि उनके पास आसपास के गांवों से भी ऑर्डर आने लगे हैं। साथ ही वह गांव की अन्य महिलाओं को भी सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दे रही हैं।
शालू की यह पहल न केवल उनके परिवार के लिए आय का मजबूत जरिया बनी है, बल्कि यह भी साबित करती है कि महिलाएं यदि ठान लें तो किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को साकार कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।
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डिजाइनर सूट बनाकर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश की है। अब वह हर महीने घघरी सूट, प्लाजो, फैंसी सिल्क, अनारकली सहित अन्य डिजाइनर सूट सिलकर लगभग 8 से 10 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं, जिससे उनका परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो रहा है और गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं।
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शादी से पहले उन्होंने पंचायत स्तर पर सिलाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद बढ़ती मांग और नए ट्रेंड को देखते हुए उन्होंने घर बैठे ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म यूट्यूब के माध्यम से सिलाई-कढ़ाई के नए डिजाइन और तकनीकें सीखीं।
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शुरुआत में उन्होंने साधारण कपड़ों की सिलाई से काम शुरू किया, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने डिजाइनर सूट बनाना सीख लिया। आज स्थिति यह है कि उनके पास आसपास के गांवों से भी ऑर्डर आने लगे हैं। साथ ही वह गांव की अन्य महिलाओं को भी सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दे रही हैं।
शालू की यह पहल न केवल उनके परिवार के लिए आय का मजबूत जरिया बनी है, बल्कि यह भी साबित करती है कि महिलाएं यदि ठान लें तो किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को साकार कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।

बगारटी की शालू। संवाद

बगारटी की शालू। संवाद