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संयुक्त समन्वय समिति ने भामसं नेता के खिलाफ खोला मोर्चा
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हमीरपुर। हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति हमीरपुर यूनिट ने भामसं के नेता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त समिति के अध्यक्ष कमल देव, उपाध्यक्ष राजूराम शर्मा, सचिव सतीश कुमार, सह सचिव गोपाल, प्रवक्ता सुरेंद्र पटियाल, कोषाध्यक्ष संजीव कुमार, सदस्य सुरेश कटोच, ओंकार, डंडू राम, राजेंद्र चौहान, विकास शर्मा, जसवीर पटियाल, प्यारेलाल, किशोर कुमार, मोहिंदर कुमार, सुशील कुमार, रतन चंद, जगन्नाथ, सुरेश ठाकुर और सोनी कुमार ने संयुक्त बयान में कहा है कि मजदूर संघ के एक फर्जी नेता की ओर से राज्यस्तरीय कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के खिलाफ जो बयानबाजी की जा रही है, उसकी समिति कड़े शब्दों में निंदा करती है। राज्यस्तरीय समन्वय समिति में परिवहन निगम में कार्यरत 9 संगठनों के पदाधिकारी शामिल हैं। जिसे परिवहन निगम के समस्त कर्मचारियों का समर्थन प्राप्त है।
उनके खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करने वालों के विरुद्ध परिवहन निगम के कर्मचारी चुप नहीं बैठेंगे। यदि वह नेता इतनी ही स्वच्छ छवि का कर्मचारी था तो आज से पहले पदोन्नत क्यों नहीं हुआ। परिवहन निगम के 270 चालक और परिचालक जो मामूली सी गलती के कारण वर्षों से नियमित नहीं हो पा रहे हैं, उनके बारे में यह तोते क्यों नहीं बोलते। इन्हें निगम के समस्त कर्मचारियों को यह भी बताना चाहिए कि तुम्हारे फर्जी नेता ने किससे सांठ गांठ करके वर्ष 2008 में प्रबंधन की ओर से उस परिचालक को कार्य में अनियमितता बरतने के लिए एक वेतन वृद्धि को दो वर्षों के लिए बंद किया था। 12 वर्षों बाद इसे किन-किन राजनेताओं और अधिकारियों के तलवे चाट कर गैर कानूनी तरीके से मंडलीय प्रबंधक शिमला से उक्त आदेशों को निरस्त करवाया है। जबकि उनके अधिकार क्षेत्र में यह नहीं आता है। पूर्व सरकार के समय फर्जी नेता आए दिन सरकार व निगम प्रबंधन के खिलाफ हमेशा बयानबाजी करता रहता था। अब क्यों नहीं बोलता, क्या अब परिवहन निगम के कर्मचारियों की सभी समस्याएं समाप्त हो गई हैं।
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उनके खिलाफ अनर्गल बयानबाजी करने वालों के विरुद्ध परिवहन निगम के कर्मचारी चुप नहीं बैठेंगे। यदि वह नेता इतनी ही स्वच्छ छवि का कर्मचारी था तो आज से पहले पदोन्नत क्यों नहीं हुआ। परिवहन निगम के 270 चालक और परिचालक जो मामूली सी गलती के कारण वर्षों से नियमित नहीं हो पा रहे हैं, उनके बारे में यह तोते क्यों नहीं बोलते। इन्हें निगम के समस्त कर्मचारियों को यह भी बताना चाहिए कि तुम्हारे फर्जी नेता ने किससे सांठ गांठ करके वर्ष 2008 में प्रबंधन की ओर से उस परिचालक को कार्य में अनियमितता बरतने के लिए एक वेतन वृद्धि को दो वर्षों के लिए बंद किया था। 12 वर्षों बाद इसे किन-किन राजनेताओं और अधिकारियों के तलवे चाट कर गैर कानूनी तरीके से मंडलीय प्रबंधक शिमला से उक्त आदेशों को निरस्त करवाया है। जबकि उनके अधिकार क्षेत्र में यह नहीं आता है। पूर्व सरकार के समय फर्जी नेता आए दिन सरकार व निगम प्रबंधन के खिलाफ हमेशा बयानबाजी करता रहता था। अब क्यों नहीं बोलता, क्या अब परिवहन निगम के कर्मचारियों की सभी समस्याएं समाप्त हो गई हैं।
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