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Hamirpur (Himachal) News: तबादले के 14 माह बाद भी जेई ने नहीं छोड़ा सरकारी आवास
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खास खबर
हमीरपुर में लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता से नहीं छूट सरकारी आवास का मोह
14 माह पहले हो चुका है बिलासपुर के लिए तबादला, सरकार को चूना
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। लोक निर्माण विभाग हमीरपुर कार्यालय से तबादला होने के 15 माह बाद भी कनिष्ठ अभियंता ने सरकारी आवास को नहीं छोड़ा है। खास बात यह है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कनिष्ठ अभियंता को दो बार नोटिस भी जारी कर चुके हैं। इसके बावजूद सरकारी आवास का मोह नहीं छूट रहा है। कायदे से जब अधिकारी अथवा कर्मचारी का तबादला होता है तो 3 माह के भीतर सरकारी आवास को खाली करना होता है ताकि नए नियुक्त कर्मचारी अथवा अधिकारी को यह आवंटित हो।
इस मामले में लोक निर्माण विभाग हमीरपुर मंडल के अधिकारियों ने संबंधित कनिष्ठ अभियंता को नोटिस तो जारी किया है लेकिन कार्रवाई नोटिस तक ही सीमित रही है। सरकारी आवास खाली न किए जाने पर कोई ठोस कदम कनिष्ठ अभियंता के खिलाफ नहीं उठाया गया है। नियमों के तहत जब किसी अधिकारी और कर्मचारियों को संबंधित जिले अथवा मंडल में सरकारी आवास आवंटित होता है तो उसके वेतन से सरकारी आवास का किराया भी कटता है। किराये की इस राशि से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है लेकिन तबादले के बाद वेतन से किराया कटना तो बंद हो जाता है लेकिन अधिकारी सरकारी आवासों पर कब्जा जमाए रहते हैं। लोक निर्माण विभाग से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि कनिष्ठ अभियंता की तरफ से किराया दिया जा रहा है अथवा वेतन से इसकी से कटौती हो रही है या नहीं। बीते साल 31 जुलाई को कनिष्ठ अभियंता का तबादला हमीरपुर से बिलासपुर मंडल के लिए हुआ है। तीन माह पूर्व अधिकारी को आवास खाली करने को लेकर हमीरपुर लोक निर्माण विभाग अधिशासी अभियंता की ओर से नोटिस की जारी किया गया है। इस नोटिस का कनिष्ठ अभियंता पर कोई असर नहीं हुआ है।
कोट
लोक निर्माण विभाग मंडल हमीरपुर के अधिशासी अभियंता दीपक कपिल का कहना है कि कनिष्ठ अभियंता को दो बार नोटिस जारी किया गया है। अभी तक सरकारी आवास खाली नहीं किया गया है। मामले में नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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हमीरपुर में लोक निर्माण विभाग के कनिष्ठ अभियंता से नहीं छूट सरकारी आवास का मोह
14 माह पहले हो चुका है बिलासपुर के लिए तबादला, सरकार को चूना
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। लोक निर्माण विभाग हमीरपुर कार्यालय से तबादला होने के 15 माह बाद भी कनिष्ठ अभियंता ने सरकारी आवास को नहीं छोड़ा है। खास बात यह है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कनिष्ठ अभियंता को दो बार नोटिस भी जारी कर चुके हैं। इसके बावजूद सरकारी आवास का मोह नहीं छूट रहा है। कायदे से जब अधिकारी अथवा कर्मचारी का तबादला होता है तो 3 माह के भीतर सरकारी आवास को खाली करना होता है ताकि नए नियुक्त कर्मचारी अथवा अधिकारी को यह आवंटित हो।
इस मामले में लोक निर्माण विभाग हमीरपुर मंडल के अधिकारियों ने संबंधित कनिष्ठ अभियंता को नोटिस तो जारी किया है लेकिन कार्रवाई नोटिस तक ही सीमित रही है। सरकारी आवास खाली न किए जाने पर कोई ठोस कदम कनिष्ठ अभियंता के खिलाफ नहीं उठाया गया है। नियमों के तहत जब किसी अधिकारी और कर्मचारियों को संबंधित जिले अथवा मंडल में सरकारी आवास आवंटित होता है तो उसके वेतन से सरकारी आवास का किराया भी कटता है। किराये की इस राशि से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है लेकिन तबादले के बाद वेतन से किराया कटना तो बंद हो जाता है लेकिन अधिकारी सरकारी आवासों पर कब्जा जमाए रहते हैं। लोक निर्माण विभाग से यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि कनिष्ठ अभियंता की तरफ से किराया दिया जा रहा है अथवा वेतन से इसकी से कटौती हो रही है या नहीं। बीते साल 31 जुलाई को कनिष्ठ अभियंता का तबादला हमीरपुर से बिलासपुर मंडल के लिए हुआ है। तीन माह पूर्व अधिकारी को आवास खाली करने को लेकर हमीरपुर लोक निर्माण विभाग अधिशासी अभियंता की ओर से नोटिस की जारी किया गया है। इस नोटिस का कनिष्ठ अभियंता पर कोई असर नहीं हुआ है।
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कोट
लोक निर्माण विभाग मंडल हमीरपुर के अधिशासी अभियंता दीपक कपिल का कहना है कि कनिष्ठ अभियंता को दो बार नोटिस जारी किया गया है। अभी तक सरकारी आवास खाली नहीं किया गया है। मामले में नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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