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जाइका परियोजना ने बदली बलेटा गांव की तस्वीर
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जाइका प्रोजेक्ट के तहत बलेटा गांव में कार्य करते किसान।
- फोटो : Hamirpur-HP
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हमीरपुर। फसल विविधिकरण परियोजना पूरे प्रदेश सहित हमीरपुर जिला में भी किसानी और खेती की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जिले की सनाही पंचायत के बलेटा गांव में जाइका के तहत किसानों का रुझान परंपरागत खेती के बजाय नकदी फसलों की ओर हुआ है। इससे उनकी आय में लगभग चार गुणा बढ़ोत्तरी हुई है।
बलेटा गांव में खेती आय का मुख्य स्रोत है। पानी की अनुपलब्धता, तकनीकी ज्ञान, कृषि उपकरणों, नई तकनीकों और गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री की कमी के कारण किसान कम क्षेत्र में कृषि कर रहे थे। ज्यादातर अनाज वाली फसलें उगा रहे थे। सब्जी उत्पादन नाममात्र था। उपनिदेशक जाइका विनोद शर्मा ने कहा कि जाइका समर्थित हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण परियोजना के अंतर्गत बलेटा गांव में 5.41 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा दी गई।
इस पर लगभग 29.22 लाख खर्च हुए। कृषि उत्पाद को खेतों से मुख्य सड़क तक ले जाने के लिए संपर्क सड़क का निर्माण किया गया। इस पर लगभग 17.71 लाख खर्च किए गए। गांव में सब्जियों की नर्सरी और पौध की उपलब्धता के लिए 1.66 लाख से एक पॉलीहाउस का निर्माण किया गया। कुछ किसानों को पॉली टनल भी उपलब्ध करवाई गई। किसानों को उनके उत्पाद के बाजार में अच्छे दाम भी मिल रहे हैं। स्थानीय निवासी भागीरथ और ग्रामीणों ने कहा कि पहले यहां पानी की कमी के कारण उन्होंने खेती लगभग छोड़ दी थी। जाइका परियोजना के बाद अब भरपूर पानी सिंचाई के लिए मिल रहा है।
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कृषि उपकरण जैसे पावर वीडर, पावर टिल्लर, लहसुन प्लांटर्स इत्यादि मिलने के बाद किसान भिंडी, टमाटर, खीरा, अदरक, आलू, प्याज, लहसुन, चुकंदर, फूलगोभी, बंदगोभी, ब्रोकली आदि सब्जियों की खेती कर रहे हैं। किसानों की आय 2 लाख 14 हजार 265 रुपए प्रति हेक्टेयर सालाना से बढ़कर लगभग 8 लाख 40 हजार 592 प्रति हेक्टेयर हो गई है।
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बलेटा गांव में खेती आय का मुख्य स्रोत है। पानी की अनुपलब्धता, तकनीकी ज्ञान, कृषि उपकरणों, नई तकनीकों और गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री की कमी के कारण किसान कम क्षेत्र में कृषि कर रहे थे। ज्यादातर अनाज वाली फसलें उगा रहे थे। सब्जी उत्पादन नाममात्र था। उपनिदेशक जाइका विनोद शर्मा ने कहा कि जाइका समर्थित हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण परियोजना के अंतर्गत बलेटा गांव में 5.41 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा दी गई।
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इस पर लगभग 29.22 लाख खर्च हुए। कृषि उत्पाद को खेतों से मुख्य सड़क तक ले जाने के लिए संपर्क सड़क का निर्माण किया गया। इस पर लगभग 17.71 लाख खर्च किए गए। गांव में सब्जियों की नर्सरी और पौध की उपलब्धता के लिए 1.66 लाख से एक पॉलीहाउस का निर्माण किया गया। कुछ किसानों को पॉली टनल भी उपलब्ध करवाई गई। किसानों को उनके उत्पाद के बाजार में अच्छे दाम भी मिल रहे हैं। स्थानीय निवासी भागीरथ और ग्रामीणों ने कहा कि पहले यहां पानी की कमी के कारण उन्होंने खेती लगभग छोड़ दी थी। जाइका परियोजना के बाद अब भरपूर पानी सिंचाई के लिए मिल रहा है।
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कृषि उपकरण जैसे पावर वीडर, पावर टिल्लर, लहसुन प्लांटर्स इत्यादि मिलने के बाद किसान भिंडी, टमाटर, खीरा, अदरक, आलू, प्याज, लहसुन, चुकंदर, फूलगोभी, बंदगोभी, ब्रोकली आदि सब्जियों की खेती कर रहे हैं। किसानों की आय 2 लाख 14 हजार 265 रुपए प्रति हेक्टेयर सालाना से बढ़कर लगभग 8 लाख 40 हजार 592 प्रति हेक्टेयर हो गई है।