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एमबीबीएस में हिमाचली बोनाफाइड का कोटा खत्म करना दुर्भाग्यपूर्ण : राणा
Thu, 24 Jul 2025 12:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 24 Jul 2025 12:54 AM IST
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सुजानपुर (हमीरपुर)। पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि कांग्रेस सरकार प्रदेश के इतिहास की सबसे क्रूर, असंवेदनशील और जनविरोधी सरकार बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के हालिया फैसले छात्रों और बेरोजगारों के भविष्य को तबाह करने वाले हैं और अब यह अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एमबीबीएस में हिमाचली बोनाफाइड छात्रों के लिए निर्धारित 85 फीसदी आरक्षण कोटा खत्म किया जाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के सपनों पर कुठाराघात है। वर्षों से जो कोटा राज्य के मूल निवासियों के लिए सुरक्षित था, उसे सरकार ने बिना सोचे-समझे खत्म कर दिया।
उन्होंने कहा कि अब वे छात्र जो सिर्फ हिमाचल के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की तैयारी कर रहे थे, उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया है। यह फैसला न केवल शिक्षा विरोधी है, बल्कि हिमाचली छात्रों के साथ सीधा अन्याय है। राणा ने चेताया कि यदि सरकार ने जल्द यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो पूरे प्रदेश में जनआंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अब ट्रेनी आधारित ठेका नीति के जरिए नियमित और अनुबंध आधारित नौकरियों का विकल्प खत्म कर बेरोजगारी का दायरा और बढ़ाया जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा एमबीबीएस में हिमाचली बोनाफाइड छात्रों के लिए निर्धारित 85 फीसदी आरक्षण कोटा खत्म किया जाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के सपनों पर कुठाराघात है। वर्षों से जो कोटा राज्य के मूल निवासियों के लिए सुरक्षित था, उसे सरकार ने बिना सोचे-समझे खत्म कर दिया।
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उन्होंने कहा कि अब वे छात्र जो सिर्फ हिमाचल के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश की तैयारी कर रहे थे, उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया है। यह फैसला न केवल शिक्षा विरोधी है, बल्कि हिमाचली छात्रों के साथ सीधा अन्याय है। राणा ने चेताया कि यदि सरकार ने जल्द यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो पूरे प्रदेश में जनआंदोलन छेड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अब ट्रेनी आधारित ठेका नीति के जरिए नियमित और अनुबंध आधारित नौकरियों का विकल्प खत्म कर बेरोजगारी का दायरा और बढ़ाया जा रहा है।
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