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Hamirpur (Himachal) News: अमलैहड़ और ग्वालपत्थर में प्राकृतिक खेती के लिए किया प्रेरित
Fri, 25 Jul 2025 12:07 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Fri, 25 Jul 2025 12:07 AM IST
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अमलैहड़ पंचायत में आयोजित जागरूक शिविर के बाद अधिकारियों के साथ किसान। स्रोत संस्थान
नादौन(हमीरपुर)। ग्राम पंचायत अमलैहड़ और ग्वालपत्थर में वीरवार को आतमा परियोजना के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए शिविर आयोजित किए गए।अमलैहड़ के गांव भवड़ां, पुखरू, पलाखर और खुए दी बूं में आयोजित शिविरों में 90 किसानों का प्राकृतिक खेती के लिए पंजीकरण किया गया।
वहीं, ग्वालपत्थर के गांव करड़ी, भरारता और क्वाट में 200 किसानों का पंजीकरण किया गया। आतमा परियोजना हमीरपुर के परियोजना निदेशक डॉ. नितिन शर्मा ने कहा कि खेतों में रासायनिक खाद एवं जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग के कारण हमारे खान-पान में भी जहर घुल रहा है। इससे जमीन की उर्वरक शक्ति भी प्रभावित हो रही है। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है।
प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से तैयार मक्की के लिए विशेष रूप से 40 रुपये प्रति किलोग्राम, गेहूं के लिए 60 रुपये और हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलोग्राम दाम निर्धारित किए हैं। किसानों को इस योजना का लाभ उठाकर प्राकृतिक खेती को अपनाना चाहिए। इससे उनकी आय में काफी वृद्धि हो सकती है।
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आतमा परियोजना के ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक डॉ. नरेंद्र ठाकुर और सहायक तकनीकी प्रबंधक अक्षय कुमार चड्ढा ने भी किसानों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। अमलैहड़ पंचायत की प्रधान सोनिया ठाकुर ने शिविर आयोजन के लिए आतमा परियोजना के अधिकारियों का धन्यवाद किया। शिविरों में ब्लॉक कृषक सलाहकार समिति के अध्यक्ष कैप्टन सुनील दत्त शर्मा, हिमको निदेशक मंडल के सदस्य संतोष शर्मा, राजेंद्र शर्मा और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।
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वहीं, ग्वालपत्थर के गांव करड़ी, भरारता और क्वाट में 200 किसानों का पंजीकरण किया गया। आतमा परियोजना हमीरपुर के परियोजना निदेशक डॉ. नितिन शर्मा ने कहा कि खेतों में रासायनिक खाद एवं जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग के कारण हमारे खान-पान में भी जहर घुल रहा है। इससे जमीन की उर्वरक शक्ति भी प्रभावित हो रही है। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है।
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प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक खेती से तैयार मक्की के लिए विशेष रूप से 40 रुपये प्रति किलोग्राम, गेहूं के लिए 60 रुपये और हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किलोग्राम दाम निर्धारित किए हैं। किसानों को इस योजना का लाभ उठाकर प्राकृतिक खेती को अपनाना चाहिए। इससे उनकी आय में काफी वृद्धि हो सकती है।
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आतमा परियोजना के ब्लॉक तकनीकी प्रबंधक डॉ. नरेंद्र ठाकुर और सहायक तकनीकी प्रबंधक अक्षय कुमार चड्ढा ने भी किसानों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। अमलैहड़ पंचायत की प्रधान सोनिया ठाकुर ने शिविर आयोजन के लिए आतमा परियोजना के अधिकारियों का धन्यवाद किया। शिविरों में ब्लॉक कृषक सलाहकार समिति के अध्यक्ष कैप्टन सुनील दत्त शर्मा, हिमको निदेशक मंडल के सदस्य संतोष शर्मा, राजेंद्र शर्मा और अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।