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Hamirpur (Himachal) News: कहीं 90 डिग्री कटिंग से पहाड़ खतरे में तो कहीं धंसी सड़क, पुलों की अप्रोच में आईं दरारें

Sun, 04 Oct 2026 12:35 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Sun, 04 Oct 2026 12:35 AM IST
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In some places, mountains are at risk due to 90-degree cutting, while elsewhere, roads have caved in and cracks have appeared in bridge approaches.
मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा
सचित्र ग्राउंड रिपोर्ट
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पुल हादसे ने खोल दी फोरलेन निर्माण की परतें, दो किमी में ही दिखे खतरे के निशान
कुनाह खड्ड में डाला हजारों टन मलबा बरसात में बहा, डंपिंग के डंगे भी ढहे
कमलेश रतन भारद्वाज
हमीरपुर। शिमला-मटौर फोरलेन के चीलबाहल-कोहली टूलेन बाईपास पर मसयाणा में ट्रस ब्रिज का स्पैन गिरने से ठेकेदार की मौत और तीन मजदूरों के घायल होने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर पुराने सवाल फिर उठने लगे हैं।
हादसे वाली जगह से करीब दो किलोमीटर के दायरे में ही दो पुलों की अप्रोच, पहाड़ की कटिंग और डंपिंग की स्थिति सवाल खड़े कर रही है। एक पुल की अप्रोच और पुल के ढांचे के बीच करीब छह इंच का फासला दिखाई दे रहा है। दूसरे पुल के नीचे कच्चे मलबे पर लगाए गए डंगे भी ढह गए हैं।
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मसयाणा में फोरलेन के लिए पहाड़ को करीब 90 डिग्री में काटा गया है। कटिंग के नीचे पांच से छह फुट ऊंचे डंगे लगाए गए हैं, जिनमें कच्चे पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। कई जगह डंगे ढह चुके हैं और नीचे मलबा बिखरा पड़ा है। बारिश के दौरान पहाड़ से मिट्टी और पत्थर खिसकने का खतरा बढ़ गया है।
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कुनाह में डंप किया हजारों टन मलबा
कुनाह में बाईपास निर्माण के लिए हजारों टन मलबा पुलों के निर्माण के लिए डंप किया गया। यह बरसात में बह गया। पुल के ईर्द-गिर्द और अन्य जगहों पर कुनाह किनारे मलबे को सीधा डंप होने से रोकने के लिए तीन से चार फीट की सुरक्षा दीवारें लगाई गई हैं, लेकिन यह तबाह हो गई हैं।

सड़क बहाली से पहले जांच की जरूरत
खास बात यह है कि बाईपास पर अभी यातायात बहाल नहीं हुआ है। इसके बावजूद सड़क, पुलों की अप्रोच, पहाड़ी कटिंग और डंपिंग से जुड़े ढांचे में खामियां दिखाई दे रही हैं। ट्रस ब्रिज हादसे के बाद अब सेफ्टी ऑडिट और केंद्रीय जांच समिति की रिपोर्ट पर नजर है। हादसे की जांच के साथ पूरे पैच में सड़क, पुल, डंगे, पहाड़ी कटिंग और जल निकासी व्यवस्था की तकनीकी जांच बेहद अहम होगी।

कोट्स
फोरलेन निर्माण के दौरान पानी निकासी के प्राकृतिक रास्ते और नाले भी प्रभावित हुए हैं। जिन रास्तों से बरसात का पानी वर्षों से निकलता था, उनमें कई जगह मलबा और निर्माण सामग्री आ गई है। -ओम कुमार, निवासी कुश्वाड़

पहाड़ लगातार ढह रहा है। रास्ते और खेतों की बर्बादी हो गई है। स्थानीय सड़कों पर भी सफर जोखिमभरा हो गया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। इस निर्माण की तकनीकी जांच होनी चाहिए। -अश्वनी ठाकुर, निवासी बाडला

अब बारिश में पानी का बहाव बदलकर घरों और दुकानों की ओर हो रहा है। इससे घरों और दुकानों में पानी घुस रहा है, जिससे नुकसान झेलना पड़ता है। -मदन लाल, दुकानदार मसयाणा



कोट
अभी इस बाईपास पर यातायात बहाल नहीं किया गया है। सेफ्टी ऑडिट के बाद ही यातायात बहाल किया जाएगा। मामले की जांच के लिए कमेटी दिल्ली से आएगी। जहां पर कमियां हैं, उन्हें पूरा किया जाएगा। -राकेश यादव, परियोजना निदेशक, एनएचएआई हमीरपुर

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

मदनलाल दुकानदार निवासी मसयाणा

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