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Himachal : अब किसानों को मालामाल करेगा मलाबार नीम, जहरीली हवा के दुष्प्रभाव को भी करेगा कम
Tue, 20 Jun 2023 06:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा
पंकज राणा, रंगस (हमीरपुर)
पंकज राणा, रंगस (हमीरपुर)
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Tue, 20 Jun 2023 06:43 AM IST
सार
2017 से जारी शोध के बाद वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान सफेदा व पॉपुलर जैसे पौधों के बजाय अब मलाबार नीम के पौधे लगाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगे।
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मलाबार नीम
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी हमीरपुर के वानिकी विभाग ने मलाबार नीम पर शोध कार्य पूरा कर लिया है। 2017 से जारी शोध के बाद वैज्ञानिकों ने बताया कि किसान सफेदा व पॉपुलर जैसे पौधों के बजाय अब मलाबार नीम के पौधे लगाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगे। 600 से 1800 मीटर तक के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इस पौधे को आसानी से उगाया जा सकता है। यह जहरीली हवा के दुष्प्रभावों को भी कम करेगा।
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मुख्य शोधकर्ता व वानिकी विभाग में कार्यरत सहायक प्रोफेसर डॉ. दुष्यंत कुमार शर्मा ने बताया आमतौर पर किसान बंजर भूमि पर सफेदा व पॉपुलर के पौधे लगाते हैं। सफेदा पानी यानी नमी को सोख लेता है तो पॉपुलर के पत्तों के झड़ने से खेतों में फसल की पैदावार नहीं होती। लेकिन अब यदि एक हेक्टेयर भूमि पर 10 फुट की दूरी पर 1,100 के करीब मलाबार नीम के पौधे रोपे जाएं तो छह वर्षों में 15 लाख रुपये की कमाई हो सकेगी। छह वर्ष का पौधा होने पर इसे प्लाइवुड उद्योग में बेचा जा सकता है। 10 वर्ष आयु का होने पर फर्नीचर इंडस्ट्री को इसे आसानी से बेचा जा सकता है ताकि इसका इस्तेमाल लाइटवेट फर्नीचर बनाने में किया जा सके।
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महाविद्यालय की ओर से निदेशक पर्यावरण विज्ञान व बॉयोटेक्नोलॉजी शिमला को पत्र भी लिखकर शोध कार्य करने के लिए 10 लाख रुपये की फंडिंग मांगी गई है। डॉ. शर्मा ने कहा कि वैसे तो महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इसके ऊपर शोध करने में सफलता हासिल कर ली है लेकिन व्यावहारिक तौर पर भी औद्योगिक क्षेत्रों की मिट्टी लाकर गहन शोध करने भी आवश्यकता है। संवाद
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दीमक रोधी हैं पत्ते
मलाबार कृषि वानिकी के लिए उपयुक्त है। इसके पत्ते खाद का काम करते हैं। यही नहीं, इसके पत्ते एंटी डरमाइटस (दीमक रोधी) के रूप में भी काम करेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार हुए शोध से पता चला कि यह पौधा उद्योगों से निकलने वाले कैडमियम, लेड, जिंक, कॉपर आदि जहरीली हवा के दुष्प्रभावों को भी कम करने की क्षमता रखता है।