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Hamirpur (Himachal) News: पहले पति को खोया, अब हादसे ने छिन लिया बेटा
Thu, 23 Apr 2026 12:18 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 23 Apr 2026 12:18 AM IST
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हमीरपुर। जिंदगी ने अनुराधा की परीक्षा बार-बार ली लेकिन इस बार का दर्द असहनीय हो गया। पहले ससुर, फिर पति और अब बेटे की मौत ने मां को अंदर तक झकझोर दिया है। शिमला-मटौर हाईवे पर ठमाणी के पास मंगलवार रात हुए हादसे में रोहित की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
रोहित ने हाल ही में जमा दो की परीक्षा दी थी और परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थींलेकिन हादसे ने उन उम्मीदों को एक झटके में तोड़ दिया। इससे पहले अनुराधा 12 साल पहले ससुर और छह साल पहले पति को खो चुकी हैं। पति की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। अब बेटे के जाने से बुढ़ापे का सहारा भी छिन गया।
परिवार में अब केवल महिलाएं ही रह गई हैं। अनुराधा के कंधों पर 70 वर्षीय सास शीला और 12 वर्षीय बेटी मोनिका की जिम्मेदारी आ गई है। मोनिका सातवीं कक्षा में पढ़ती है और भाई की मौत से सदमे में है। वह बार-बार अपने भाई को पुकार रही है।
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मृतक रोहित के पिता एनआईटी हमीरपुर में सुरक्षा कर्मी के रूप में कार्यरत थे। अनुराधा स्वयं स्कूल में बहुउद्देशीय कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं, जबकि ससुर आईटीबीपी से सेवानिवृत्त थे।
घटना के बाद घर में मातम पसरा हुआ है। पड़ोसी और रिश्तेदार सांत्वना देने पहुंच रहे हैं, लेकिन मां की निगाहें अब भी दरवाजे पर टिकी हैं। उसे यकीन नहीं हो रहा कि उसका बेटा अब कभी लौटकर नहीं आएगा। छोटी बेटी की आंखों में भी एक ही सवाल हैअब वह राखी किसके हाथ पर बांधेगी।
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रोहित ने हाल ही में जमा दो की परीक्षा दी थी और परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थींलेकिन हादसे ने उन उम्मीदों को एक झटके में तोड़ दिया। इससे पहले अनुराधा 12 साल पहले ससुर और छह साल पहले पति को खो चुकी हैं। पति की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। अब बेटे के जाने से बुढ़ापे का सहारा भी छिन गया।
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परिवार में अब केवल महिलाएं ही रह गई हैं। अनुराधा के कंधों पर 70 वर्षीय सास शीला और 12 वर्षीय बेटी मोनिका की जिम्मेदारी आ गई है। मोनिका सातवीं कक्षा में पढ़ती है और भाई की मौत से सदमे में है। वह बार-बार अपने भाई को पुकार रही है।
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मृतक रोहित के पिता एनआईटी हमीरपुर में सुरक्षा कर्मी के रूप में कार्यरत थे। अनुराधा स्वयं स्कूल में बहुउद्देशीय कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं दे चुकी हैं, जबकि ससुर आईटीबीपी से सेवानिवृत्त थे।
घटना के बाद घर में मातम पसरा हुआ है। पड़ोसी और रिश्तेदार सांत्वना देने पहुंच रहे हैं, लेकिन मां की निगाहें अब भी दरवाजे पर टिकी हैं। उसे यकीन नहीं हो रहा कि उसका बेटा अब कभी लौटकर नहीं आएगा। छोटी बेटी की आंखों में भी एक ही सवाल हैअब वह राखी किसके हाथ पर बांधेगी।