{"_id":"66758bf722a8142f93010a16","slug":"eye-allergy-patients-increased-in-medical-college-hamirpur-hp-news-c-94-1-hmp1001-130072-2024-06-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hamirpur (Himachal) News: मेडिकल काॅलेज में बढ़े आंखों की एलर्जी के मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hamirpur (Himachal) News: मेडिकल काॅलेज में बढ़े आंखों की एलर्जी के मरीज
विज्ञापन
अस्पताल में एक दिन में पहुंच रहे 50 के करीब मरीज
सोनम शर्मा
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में कंजक्टिवाइटिस (आंख आना) से पीड़ित लगभग 50 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। इस रोग से आंखें लाल हो जाती हैं। इसे नेत्रश्लेष्मलाशोथ भी कहा जाता है। इसके मुख्य लक्षण पलकों पर स्राव या पपड़ी जमना, आंखों से पानी आना या अत्यधिक आंसू आना, आंख में रेत जैसा या खुजली जैसा महसूस होना, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, आंख का दर्द आदि शामिल हैं। आजकल ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पालतू पशुओं के लिए चारा आदि पेड़ों से काटते हैं। ऐसे में उसके कण भी आंखों में जा रहे हैं। इससे यह बीमारी और अधिक फैल रही है। यह रोग आमतौर पर वायरस या जीवाणु संक्रमण के कारण होता है। पराग (पौधों का अंकुरण), सौंदर्य प्रसाधन या अन्य सामग्रियों से एलर्जी इस रोग का कारण बनते हैं। प्रचंड गर्मी में आंखों से जुड़े रोगों के बढ़ने की संभावना अधिक होती है। ऐसे में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। समस्या पेश आने पर तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ऐसे करें बचाव
इसके बचाव के लिए लोगों को हाथों को आंखों से दूर रखना है। आंखों के अंदर से धोने के बजाय आंखें बंद करके ठंडे पानी से धोएं, बार-बार हाथ धोना, तौलिये, रुमाल आदि अन्य व्यक्ति से न शेयर करें। धूप में चश्मे का उपयोग करें।
कोट
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि कंजक्टिवाइटिस से पीड़ित लगभग 50 मरीज पहुंच रहे हैं। उन्होंने लोगों से सावधानी बरतने का आग्रह किया है और समय पर इलाज करवाने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सोनम शर्मा
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में कंजक्टिवाइटिस (आंख आना) से पीड़ित लगभग 50 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। इस रोग से आंखें लाल हो जाती हैं। इसे नेत्रश्लेष्मलाशोथ भी कहा जाता है। इसके मुख्य लक्षण पलकों पर स्राव या पपड़ी जमना, आंखों से पानी आना या अत्यधिक आंसू आना, आंख में रेत जैसा या खुजली जैसा महसूस होना, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, आंख का दर्द आदि शामिल हैं। आजकल ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पालतू पशुओं के लिए चारा आदि पेड़ों से काटते हैं। ऐसे में उसके कण भी आंखों में जा रहे हैं। इससे यह बीमारी और अधिक फैल रही है। यह रोग आमतौर पर वायरस या जीवाणु संक्रमण के कारण होता है। पराग (पौधों का अंकुरण), सौंदर्य प्रसाधन या अन्य सामग्रियों से एलर्जी इस रोग का कारण बनते हैं। प्रचंड गर्मी में आंखों से जुड़े रोगों के बढ़ने की संभावना अधिक होती है। ऐसे में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। समस्या पेश आने पर तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ऐसे करें बचाव
इसके बचाव के लिए लोगों को हाथों को आंखों से दूर रखना है। आंखों के अंदर से धोने के बजाय आंखें बंद करके ठंडे पानी से धोएं, बार-बार हाथ धोना, तौलिये, रुमाल आदि अन्य व्यक्ति से न शेयर करें। धूप में चश्मे का उपयोग करें।
विज्ञापन
कोट
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रमेश भारती ने कहा कि कंजक्टिवाइटिस से पीड़ित लगभग 50 मरीज पहुंच रहे हैं। उन्होंने लोगों से सावधानी बरतने का आग्रह किया है और समय पर इलाज करवाने को कहा है।
विज्ञापन