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पहले नवरात्र को जिलाभर कन्या पूजन
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डिडवीं के शिव दुर्गा मंदिर में नवरात्रों के मौके पर कन्या पूजन करते लोग।
- फोटो : Hamirpur-HP
डिडवीं टिक्कर/हमीरपुर। पितृपक्ष के समाप्त होते ही नवरात्र शुरू हो गए हैं। वीरवार को पहले नवरात्र के दौरान जिलाभर में लोगों ने माता के मंदिरों में पूजा की और व्रत रखे। लोगों में नवरात्र को लेकर उत्साह एवं उमंग देखने को मिल रही है। संतोषी माता मंदिर लदरौर, अवाहदेवी माता मंदिर, टौणी देवी माता मंदिर सहित ग्राम पंचायत टिक्कर डिडवीं के तहत गांव डिडवीं के शिव दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं ने माथा टेककर माता का आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही डिडवीं में गांववासियों ने कन्या पूजन किया।
जिसमें कन्याओं के साथ बाबा के रूप में लड़के को भी पूजन पंक्ति में बैठाया गया। कन्याओं को चूड़ियां, बिंदी, चुनरी और लड़के को रुमाल देकर हलवे का प्रसाद दिया गया। धूप जोत करके परिक्रमा की गई। इस अवसर पर पुजारी सुदर्शन कुमार शर्मा, सुषमा देवी, कांता देवी, पूजा देवी, कांता आचार्य, ईश्वरी देवी आदि ने मुख्य रूप से भाग लिया।
वहीं, नादौन उपमंडल के कस्बा बल्डूहक के गांव कोहाल में बरसों पुरानी स्थापित स्वामी देवानंद जी कुटिया /आश्रम के संरक्षक स्वामी सत्यदेव ने बताया कि नवरात्रि संस्कृत का शब्द है। जिसका अर्थ होता है (नौ रातें) इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान शक्ति एवं देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवें दिन दशहरे के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्र वर्ष में चार बार आते हैं। देसी महीने के अनुसार यह पौष, चैत्र, आषाढ़ तथा आश्विन मास में प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। नवरात्रि की नौ रातों में तीन देवियां महालक्ष्मी, मां सरस्वती और महाकाली के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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बाजार में भी खूब रही चहलपहल
जिलाभर के बाजारों में भी नवरात्र पर खूब चहलपहल रही। श्राद्ध के कारण लोग खरीदारी करने से परहेज कर रहे थे, लेकिन नवरात्र शुरू होते ही लोगों ने शादियों के लिए कपड़े, जूते व आभूषणों की खरीदारी शुरू कर दी है। कोरोना और श्राद्धों के कारण मंदी के मार झेल रहे कारोबारियों ने भी इन नवरात्र में अच्छी आमदन होने की उम्मीद जताई है। वाहनों के शोरूम में भी लोगों की भीड़ नजर आई। लोगों ने पहले नवरात्र पर दोपहिया और चौपहिया वाहन खरीदे।
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जिसमें कन्याओं के साथ बाबा के रूप में लड़के को भी पूजन पंक्ति में बैठाया गया। कन्याओं को चूड़ियां, बिंदी, चुनरी और लड़के को रुमाल देकर हलवे का प्रसाद दिया गया। धूप जोत करके परिक्रमा की गई। इस अवसर पर पुजारी सुदर्शन कुमार शर्मा, सुषमा देवी, कांता देवी, पूजा देवी, कांता आचार्य, ईश्वरी देवी आदि ने मुख्य रूप से भाग लिया।
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वहीं, नादौन उपमंडल के कस्बा बल्डूहक के गांव कोहाल में बरसों पुरानी स्थापित स्वामी देवानंद जी कुटिया /आश्रम के संरक्षक स्वामी सत्यदेव ने बताया कि नवरात्रि संस्कृत का शब्द है। जिसका अर्थ होता है (नौ रातें) इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान शक्ति एवं देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवें दिन दशहरे के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्र वर्ष में चार बार आते हैं। देसी महीने के अनुसार यह पौष, चैत्र, आषाढ़ तथा आश्विन मास में प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। नवरात्रि की नौ रातों में तीन देवियां महालक्ष्मी, मां सरस्वती और महाकाली के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है, जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है।
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बाजार में भी खूब रही चहलपहल
जिलाभर के बाजारों में भी नवरात्र पर खूब चहलपहल रही। श्राद्ध के कारण लोग खरीदारी करने से परहेज कर रहे थे, लेकिन नवरात्र शुरू होते ही लोगों ने शादियों के लिए कपड़े, जूते व आभूषणों की खरीदारी शुरू कर दी है। कोरोना और श्राद्धों के कारण मंदी के मार झेल रहे कारोबारियों ने भी इन नवरात्र में अच्छी आमदन होने की उम्मीद जताई है। वाहनों के शोरूम में भी लोगों की भीड़ नजर आई। लोगों ने पहले नवरात्र पर दोपहिया और चौपहिया वाहन खरीदे।