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Hamirpur (Himachal) News: प्रधानाचार्य के निलंबन आदेशों में निष्पक्ष जांच की मांग
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संघ ने कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच को बताया तमाम विवाद की वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। मुख्याध्यापक अधिकारी कैडर संघ ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कठियाणा के प्रधानाचार्य के निलंबन आदेशों की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रतन वर्मा, प्रदेश महासचिव केवल ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रवीण चंदेल ने मांग उठाई है। इस संदर्भ में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि निलंबन आदेशों से स्पष्ट है कि उक्त अधिकारी के विरुद्ध बार-बार शिकायतें आने के कारण निलंबन आदेश जारी किए गए हैं। जब इन शिकायतों के संदर्भ में जांच की गई तो उक्त अधिकारी उस दिन अवकाश पर थे और अस्पताल में उपचाराधीन थे। इस मामले में उनका पक्ष नहीं सुना गया जो न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों के खिलाफ है। प्रभावित व्यक्ति को अपने पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि इस सारे प्रकरण में यह बात भी सामने आई है कि इस पाठशाला के कर्मचारियों की डिग्रियों की जांच विभागीय आदेशों के अनुसार चल रही थी। एक कर्मचारी का प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है, जबकि कुछ कर्मचारियों ने अपनी डिग्रियों की जांच करवाने से यह कहकर मना कर दिया है कि वह अपनी डिग्रियों के सत्यापन के शुल्क का वहन नहीं करेंगे, जबकि विभागीय नियमों में यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि नए कर्मचारियों की डिग्रियों की जांच आवश्यक है। इसके खर्च का वहन संबंधित कर्मचारियों को स्वयं करना है। उन्होंने शिक्षा विभाग से मामले की निष्पक्षता से जांच करने की मांग की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। मुख्याध्यापक अधिकारी कैडर संघ ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कठियाणा के प्रधानाचार्य के निलंबन आदेशों की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रतन वर्मा, प्रदेश महासचिव केवल ठाकुर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रवीण चंदेल ने मांग उठाई है। इस संदर्भ में संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि निलंबन आदेशों से स्पष्ट है कि उक्त अधिकारी के विरुद्ध बार-बार शिकायतें आने के कारण निलंबन आदेश जारी किए गए हैं। जब इन शिकायतों के संदर्भ में जांच की गई तो उक्त अधिकारी उस दिन अवकाश पर थे और अस्पताल में उपचाराधीन थे। इस मामले में उनका पक्ष नहीं सुना गया जो न्याय के प्राकृतिक सिद्धांतों के खिलाफ है। प्रभावित व्यक्ति को अपने पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था।
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि इस सारे प्रकरण में यह बात भी सामने आई है कि इस पाठशाला के कर्मचारियों की डिग्रियों की जांच विभागीय आदेशों के अनुसार चल रही थी। एक कर्मचारी का प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया है, जबकि कुछ कर्मचारियों ने अपनी डिग्रियों की जांच करवाने से यह कहकर मना कर दिया है कि वह अपनी डिग्रियों के सत्यापन के शुल्क का वहन नहीं करेंगे, जबकि विभागीय नियमों में यह स्पष्ट लिखा हुआ है कि नए कर्मचारियों की डिग्रियों की जांच आवश्यक है। इसके खर्च का वहन संबंधित कर्मचारियों को स्वयं करना है। उन्होंने शिक्षा विभाग से मामले की निष्पक्षता से जांच करने की मांग की है।
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