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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Hamirpur (Himachal) News ›   Delay in emergence of new shoots and twigs in mango trees is the reason for low production

Hamirpur (Himachal) News: आम के पेड़ों में नई कोंपलें और टहनियां आने में देरी कम उत्पादन की वजह

Fri, 14 Mar 2025 05:19 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.) Updated Fri, 14 Mar 2025 05:19 AM IST
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रंगस(हमीरपुर)। उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के पीएचडी के छात्र ने राष्ट्र स्तर पर महाविद्यालय का नाम रोशन किया है। महाविद्यालय में फल विज्ञान विषय में पीएचडी कर रहे छात्र एवी जोसेफ ने लखनऊ में प्रायोजित सेमिनार में अपने अनुसंधान को प्रस्तुत करके प्रथम स्थान हासिल किया है। उन्होंने अपने शोध से सिद्ध किया है कि आम की विभिन्न किस्मों का उत्पादन उनके अनुवांशिक गुणों और वातावरण के अतिरिक्त पेड़ों के असमायिक जैविक आवधिक घटनाओं द्वारा भी प्रभावित होता है। अब तक की धारणा यही थी कि केवल अनुवांशिक गुण या पारिस्थितिकीय वातावरण ही पौधों के फलन-फूलन को प्रभावित करते हैं लेकिन पेड़ों में नई कोंपलें और टहनियां आने की प्रक्रिया में देरी भी फल उत्पादन को प्रभावित कर रही है।
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बदलते मौसमी परिवेश में छात्र की ओर से किया गया शोध बहुत ही तर्कसंगत है। एवी जोसेफ ने एमएससी की पढ़ाई भी नेरी महाविद्यालय से ही पूरी की है और यह सम्मानजनक पुरस्कार उनको वर्ष 2021-22 व 2023 में एमएससी की पढ़ाई के दौरान की गई रिसर्च के तहत मिला है। मूल रूप से केरल के रहने वाले एवी जोसेफ वर्तमान में नेरी महाविद्यालय से ही अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैंने नेरी महाविद्यालय में ही लगे आम के बगीचे में अपना शोध कार्य पूरा किया था। एवी जोसेफ ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय इस शोध के मुख्य प्रारूप कार्य एवं गाइड फल विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शशि कुमार शर्मा को दिया है। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. धर्मपाल शर्मा के अतिरिक्त महाविद्यालय के तमाम स्टाफ ने पीएचडी के होनहार छात्र एवी की उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
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शोध में कई तकनीकी जानकारियों का चला पता

शोधकर्ता ने कहा कि बगीचे में लगे दशहरी और चौसा आम में नई टहनियां अक्तूबर और नवंबर महीने तक ही आईं। जिसमें अपेक्षाकृत आम के फलों की पैदावार अधिक हुई। मल्लिका और आम्रपाली प्रजाति के आम के पौधों में यह प्रक्रिया दिसंबर महीने तक होती रही और इसमें उत्पादन बेहद कम हुआ। रिसर्च में यह बात निकल कर आई है कि अनुवांशिक गुणों व वातावरण के अतिरिक्त असमायिक जैविक आवधिक घटनाओं का भी फूलन और फलन में एक अलग तरह का प्रभाव होता है। शोध के दौरान कई तकनीकी जानकारियों का भी पता चला है। इसका जिक्र बाकायदा शोध पत्र में विस्तार से किया गया है।
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