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Hamirpur (Himachal) News: बलोह में सुनाया दक्ष प्रजापति प्रसंग
Tue, 19 Aug 2025 07:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Tue, 19 Aug 2025 07:27 AM IST
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बलोह गांव में आयोजित शिव महापुराण कथा के समापन पर उपस्थित श्रद्धालु। संवाद
डिडवीं टिक्कर (हमीरपुर)। बलोह गांव में चल रही शिव महापुराण कथा का समापन सोमवार को हुआ। इस अवसर पर कथाव्यास डॉ. तिलक राज शास्त्री ने भक्तों को दक्ष प्रजापति का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि जब कनखल में दक्ष प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ आयोजित किया था, तब सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया गया। यह देख माता सती आहत हुईं और क्रोध में आकर यज्ञ कुंड में कूद गईं। इसके बाद भगवान शिव ने गणों को भेजकर यज्ञ का विध्वंस करवा दिया और दक्ष प्रजापति का सिर काट दिया।
डॉ. शास्त्री ने कहा कि बाद में भगवान शिव ने दक्ष प्रजापति को क्षमा करते हुए उनके धड़ पर बकरे का सिर लगाकर उन्हें जीवित किया। तत्पश्चात दक्ष ने कैलाश पर्वत पर जाकर भगवान शिव की स्तुति कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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कुटिया भड़मेली शिव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा संपन्न
हमीरपुर। प्राचीन शिव मंदिर कुटिया भड़मेली में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को हवन की पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। सात दिन तक चली इस कथा में आचार्य पंकज शर्मा शास्त्री ने चार वेद, पुराण, गीता और श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।आचार्य पंकज शर्मा शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण, जो दस लक्षणों से युक्त है, ब्रह्माजी ने नारदजी को सुनाया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन तक कथा सुनाई, जिसके उपरांत उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसी कारण श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन सात दिन तक किया जाता है। कथा के समापन पर आसपास के गांवों सहित दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने आचार्य का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर पुजारी महंत शिव गिरी, महंत मंगल गिरी महाराज सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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उन्होंने बताया कि जब कनखल में दक्ष प्रजापति ने एक विशाल यज्ञ आयोजित किया था, तब सभी देवी-देवताओं और ऋषि-मुनियों को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया गया। यह देख माता सती आहत हुईं और क्रोध में आकर यज्ञ कुंड में कूद गईं। इसके बाद भगवान शिव ने गणों को भेजकर यज्ञ का विध्वंस करवा दिया और दक्ष प्रजापति का सिर काट दिया।
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डॉ. शास्त्री ने कहा कि बाद में भगवान शिव ने दक्ष प्रजापति को क्षमा करते हुए उनके धड़ पर बकरे का सिर लगाकर उन्हें जीवित किया। तत्पश्चात दक्ष ने कैलाश पर्वत पर जाकर भगवान शिव की स्तुति कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के समापन पर भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
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कुटिया भड़मेली शिव मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा संपन्न
हमीरपुर। प्राचीन शिव मंदिर कुटिया भड़मेली में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का सोमवार को हवन की पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। सात दिन तक चली इस कथा में आचार्य पंकज शर्मा शास्त्री ने चार वेद, पुराण, गीता और श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।आचार्य पंकज शर्मा शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण, जो दस लक्षणों से युक्त है, ब्रह्माजी ने नारदजी को सुनाया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन तक कथा सुनाई, जिसके उपरांत उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसी कारण श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन सात दिन तक किया जाता है। कथा के समापन पर आसपास के गांवों सहित दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने आचार्य का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर पुजारी महंत शिव गिरी, महंत मंगल गिरी महाराज सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।