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Hamirpur (Himachal) News: चीड़ की पत्तियों से राखियां बना दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
Mon, 24 Aug 2026 12:51 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Mon, 24 Aug 2026 12:51 AM IST
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चीड़ की पत्तियों से तैयार की गई राखियां। संवाद
हमीरपुर। इस बार रक्षाबंधन पर्व पर बगारटी की स्नेहलता चीड़ की पत्तियों से तैयार इको फ्रेंडली राखियों के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही हैं। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध चीड़ की पत्तियों का उपयोग कर अलग-अलग डिजाइन की आकर्षक राखियां तैयार की हैं, जिन्हें 10 से 50 रुपये तक में बेचा जा रहा है।
स्नेहलता ने करीब तीन वर्ष पहले राखी बनाने का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद उन्होंने इसे रोजगार का जरिया बनाने का निर्णय लिया और घर से ही राखियां तैयार करने का काम शुरू किया।
शुरुआत में कम संख्या में राखियां बनाईं, लेकिन लोगों को उनका काम पसंद आया। इसके बाद वह हर साल रक्षाबंधन से पहले राखियां तैयार करने लगीं।
वह राखियां तैयार करने के लिए वह चीड़ की गिरी हुई पत्तियों को एकत्र कर उन्हें साफ करती हैं। इसके बाद आवश्यक आकार देकर धागे और अन्य सजावटी सामग्री के साथ राखी का रूप दिया जाता है।
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डिजाइन और आकार के अनुसार राखियों की कीमत तय की गई है। स्नेहलता का कहना है कि चीड़ की पत्तियों जैसी स्थानीय सामग्री से आकर्षक वस्तुएं तैयार की जा सकती हैं। इससे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होने के साथ रोजगार का अवसर भी मिलता है।
उनका प्रयास है कि लोग प्लास्टिक व अन्य सामग्री से बनी राखियों के बजाय प्राकृतिक सामग्री से तैयार राखियों को अपनाएं और पर्व के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दें।
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स्नेहलता ने करीब तीन वर्ष पहले राखी बनाने का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद उन्होंने इसे रोजगार का जरिया बनाने का निर्णय लिया और घर से ही राखियां तैयार करने का काम शुरू किया।
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शुरुआत में कम संख्या में राखियां बनाईं, लेकिन लोगों को उनका काम पसंद आया। इसके बाद वह हर साल रक्षाबंधन से पहले राखियां तैयार करने लगीं।
वह राखियां तैयार करने के लिए वह चीड़ की गिरी हुई पत्तियों को एकत्र कर उन्हें साफ करती हैं। इसके बाद आवश्यक आकार देकर धागे और अन्य सजावटी सामग्री के साथ राखी का रूप दिया जाता है।
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डिजाइन और आकार के अनुसार राखियों की कीमत तय की गई है। स्नेहलता का कहना है कि चीड़ की पत्तियों जैसी स्थानीय सामग्री से आकर्षक वस्तुएं तैयार की जा सकती हैं। इससे प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होने के साथ रोजगार का अवसर भी मिलता है।
उनका प्रयास है कि लोग प्लास्टिक व अन्य सामग्री से बनी राखियों के बजाय प्राकृतिक सामग्री से तैयार राखियों को अपनाएं और पर्व के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दें।

चीड़ की पत्तियों से तैयार की गई राखियां। संवाद