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किसानों को संगठित कर जानकारी का आदान-प्रदान सुनिश्चित होगा : चौहान
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संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के द्वितीय चरण के अंतर्गत मूल्य शृंखला और बाजार विकास घटक पर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन मंगलवार को हमीरपुर में किया। इसकी अध्यक्षता परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने की। इसका मुख्य उद्देश्य किसान उत्पादक संगठनों और निजी संगठनों के साथ परियोजना के सहयोग की दिशा में चर्चा करना रहा। एसएमएस सोनिया मिन्हास, एसएमएस (विपणन) ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और उनकी उपस्थिति के लिए आभार प्रकट किया। डॉ. चौहान ने परियोजना का परिचय करवाते हुए परियोजना ढांचे के तहत किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और परियोजना के मूल्य संवर्धन और मजबूत कृषि-व्यापार लिंकेज पर ध्यान केंद्रित किया।
नितिका सोनी ने परियोजना के चरण-एक और चरण दो की गतिविधियों पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इससे बैठक के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ। अध्यक्ष ने परियोजना की रणनीति के तहत सामान्य हित समूह और स्वयं सहायता समूह के गठन पर जोर दिया। इन समूहों का निर्माण एफपीओ की स्थापना के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा, जिससे किसानों को संगठित कर उनके बीच संसाधनों और जानकारी का आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जा सकेगा। डॉ. चौहान ने कहा कि कार्यक्रमों का उद्देश्य उन्नत किसानों को उनके आसपास के क्षेत्रों में प्रमुख और वाणिज्यिक फसलों की पहचान कर उन्हें सामान्य हित समूह और स्वयं सहायता समूह में संगठित करना है। विभिन्न एफपीओ और निजी संगठनों के प्रतिभागियों ने भी अपने संगठन की पृष्ठभूमि, मुख्य वस्तु, बाजार संबंधों और अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। परियोजना निदेशक ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए सीआईजी और एसएचजी को मौजूदा एफपीओ के साथ एकीकृत करने की महत्वपूर्णता को रेखांकित किया, ताकि उनकी ओर से स्थापित कृषि-व्यापार चैनलों और आपूर्ति शृंखलाओं का लाभ उठाया जा सके।
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हमीरपुर। प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना के द्वितीय चरण के अंतर्गत मूल्य शृंखला और बाजार विकास घटक पर एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन मंगलवार को हमीरपुर में किया। इसकी अध्यक्षता परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने की। इसका मुख्य उद्देश्य किसान उत्पादक संगठनों और निजी संगठनों के साथ परियोजना के सहयोग की दिशा में चर्चा करना रहा। एसएमएस सोनिया मिन्हास, एसएमएस (विपणन) ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और उनकी उपस्थिति के लिए आभार प्रकट किया। डॉ. चौहान ने परियोजना का परिचय करवाते हुए परियोजना ढांचे के तहत किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और परियोजना के मूल्य संवर्धन और मजबूत कृषि-व्यापार लिंकेज पर ध्यान केंद्रित किया।
नितिका सोनी ने परियोजना के चरण-एक और चरण दो की गतिविधियों पर एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इससे बैठक के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ। अध्यक्ष ने परियोजना की रणनीति के तहत सामान्य हित समूह और स्वयं सहायता समूह के गठन पर जोर दिया। इन समूहों का निर्माण एफपीओ की स्थापना के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा, जिससे किसानों को संगठित कर उनके बीच संसाधनों और जानकारी का आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जा सकेगा। डॉ. चौहान ने कहा कि कार्यक्रमों का उद्देश्य उन्नत किसानों को उनके आसपास के क्षेत्रों में प्रमुख और वाणिज्यिक फसलों की पहचान कर उन्हें सामान्य हित समूह और स्वयं सहायता समूह में संगठित करना है। विभिन्न एफपीओ और निजी संगठनों के प्रतिभागियों ने भी अपने संगठन की पृष्ठभूमि, मुख्य वस्तु, बाजार संबंधों और अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। परियोजना निदेशक ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए सीआईजी और एसएचजी को मौजूदा एफपीओ के साथ एकीकृत करने की महत्वपूर्णता को रेखांकित किया, ताकि उनकी ओर से स्थापित कृषि-व्यापार चैनलों और आपूर्ति शृंखलाओं का लाभ उठाया जा सके।
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