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Hamirpur (Himachal) News: घनाल खुर्द में टीसीपी मंजूरी के बिना जमीन की खरीद-फरोख्त
Sat, 26 Apr 2025 12:53 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Sat, 26 Apr 2025 12:53 AM IST
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हमीरपुर। जिला मुख्यालय से सटे टीसीपी एरिया घनाल खुर्द में नियमों को ताक पर रखकर जमीन की खरीद-फरोख्त की आशंका है। यहां विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। यहां पर चार खसरा नंबर में एचपी टीसीपी एक्ट की धारा 16सी को ताक पर रखकर खरीद-फरोख्त करने प्रयास है।
खास बात यह है कि यह कथित गड़बड़ी टीसीपी विभाग की निगरानी में आ गई है। नगर योजनाकार कार्यालय हमीरपुर की ओर से तहसीलदार कार्यालय हमीरपुर को इस विषय पर पत्राचार किया गया है, लेकिन टीसीपी विभाग को राजस्व विभाग से कोई जवाब नहीं मिला है। राजस्व विभाग का तर्क है कि यहां पर जमीनों की खरीद-फरोख्त नहीं हुई है, बल्कि चार भूमि मालिकों की जमीन की खानगी तकसीम हुई है।
ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या टीसीपी एरिया में बिना टीसीपी विभाग की मंजूरी के दो से अधिक पार्टियों में जमीन की तकसीम हो सकती है, जबकि यह पार्टियां एक परिवार नहीं है। कायदे से एचपी टीसीपी एक्ट 16सी के तहत बिना टीसीपी विभाग की मंजूरी के तकसीम और रजिस्ट्री नहीं की जा सकती है। बावजूद यहां पर चार पार्टियों की जमीनों की तकसीम किए जाने से कई सवाल उठ रहे हैं। यहां पर प्लाट बिक्री में टीसीपी नियमों को ताक पर रखा जा रहा है।
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टीसीपी विभाग ऐसे मामलों में सीधा दखल देने के बजाय राजस्व विभाग को चेता चुका है कि इस तरह की तकसीम और रजिस्ट्री न करें, लेकिन विभागीय पत्राचार को इस मामले में अनदेखा किया गया है। घरेलू यानी खानगी तकसीम का तर्क देकर राजस्व विभाग पल्ला झाड़ने का कार्य कर रहा है। ऐसे में यदि आने वाले समय में इस जमीन पर कोई प्लाट अथवा जमीन खरीदता है, तो उन्हें टीसीपी विभाग के पास एनओसी के चक्कर काटने पड़ेंगे। बिना विभागीय मंजूरी के यह एनओसी मिलना मुमकिन नहीं है।
भू माफिया ने पहले भी मुश्किल में डाले थे लोग
जिला मुख्यालय हमीरपुर में चार से पांच साल प्लाटों की इस तरह से खरीद-फरोख्त हुई थी। टीसीपी विभाग की मंजूरी के बिना ही प्लाटों की तकसीम और रजिस्ट्री करवा दी गई थी। बाद में यहां पर प्लाट खरीदने वालों को पांच साल तक विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने पड़े। हिमाचल प्रदेश रेरा के हस्तक्षेप के बाद यह मसले हल हुए थे, जिसके लिए पांच साल करीब वक्त लगा। लंबे समय से प्लाटों की बिक्री में सवाल उठते रहे हैं। पहले भी कई दफा भू माफिया प्लाट खरीदने वाले लोगों को मुश्किल में डाल चुके हैं, जो कि जीवनभर की पूंजी एक प्लाट की खरीद में लगा देते हैं।
कोट्स
तहसीलदार कार्यालय से इस विषय पर पत्राचार किया गया है। कार्यालय से जवाब मिलने के बाद ही इस मामले में टिप्पणी की सकती है। टीसीपी एरिया में किसी भी जमीन की खरीद-फरोख्त से पूर्व टीसीपी विभाग की मंजूरी जरूरी है। बिना मंजूरी के राजस्व विभाग के अधिकारी जमीनों की रजिस्ट्री नहीं करवा सकते हैं।
-हरजिंदर सिंह, नगर योजनाकार हमीरपुर, टीसीपी विभाग
इन चार खसरा नंबर में चार पार्टियों की जमीन की खानगी तकसीम की गई है। जमीन की कोई खरीद-फरोख्त नहीं हुई है। यह मुस्तरका जमीन है।
-जगदीश, नायब तहसीलदार, हमीरपुर
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खास बात यह है कि यह कथित गड़बड़ी टीसीपी विभाग की निगरानी में आ गई है। नगर योजनाकार कार्यालय हमीरपुर की ओर से तहसीलदार कार्यालय हमीरपुर को इस विषय पर पत्राचार किया गया है, लेकिन टीसीपी विभाग को राजस्व विभाग से कोई जवाब नहीं मिला है। राजस्व विभाग का तर्क है कि यहां पर जमीनों की खरीद-फरोख्त नहीं हुई है, बल्कि चार भूमि मालिकों की जमीन की खानगी तकसीम हुई है।
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ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या टीसीपी एरिया में बिना टीसीपी विभाग की मंजूरी के दो से अधिक पार्टियों में जमीन की तकसीम हो सकती है, जबकि यह पार्टियां एक परिवार नहीं है। कायदे से एचपी टीसीपी एक्ट 16सी के तहत बिना टीसीपी विभाग की मंजूरी के तकसीम और रजिस्ट्री नहीं की जा सकती है। बावजूद यहां पर चार पार्टियों की जमीनों की तकसीम किए जाने से कई सवाल उठ रहे हैं। यहां पर प्लाट बिक्री में टीसीपी नियमों को ताक पर रखा जा रहा है।
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टीसीपी विभाग ऐसे मामलों में सीधा दखल देने के बजाय राजस्व विभाग को चेता चुका है कि इस तरह की तकसीम और रजिस्ट्री न करें, लेकिन विभागीय पत्राचार को इस मामले में अनदेखा किया गया है। घरेलू यानी खानगी तकसीम का तर्क देकर राजस्व विभाग पल्ला झाड़ने का कार्य कर रहा है। ऐसे में यदि आने वाले समय में इस जमीन पर कोई प्लाट अथवा जमीन खरीदता है, तो उन्हें टीसीपी विभाग के पास एनओसी के चक्कर काटने पड़ेंगे। बिना विभागीय मंजूरी के यह एनओसी मिलना मुमकिन नहीं है।
भू माफिया ने पहले भी मुश्किल में डाले थे लोग
जिला मुख्यालय हमीरपुर में चार से पांच साल प्लाटों की इस तरह से खरीद-फरोख्त हुई थी। टीसीपी विभाग की मंजूरी के बिना ही प्लाटों की तकसीम और रजिस्ट्री करवा दी गई थी। बाद में यहां पर प्लाट खरीदने वालों को पांच साल तक विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने पड़े। हिमाचल प्रदेश रेरा के हस्तक्षेप के बाद यह मसले हल हुए थे, जिसके लिए पांच साल करीब वक्त लगा। लंबे समय से प्लाटों की बिक्री में सवाल उठते रहे हैं। पहले भी कई दफा भू माफिया प्लाट खरीदने वाले लोगों को मुश्किल में डाल चुके हैं, जो कि जीवनभर की पूंजी एक प्लाट की खरीद में लगा देते हैं।
कोट्स
तहसीलदार कार्यालय से इस विषय पर पत्राचार किया गया है। कार्यालय से जवाब मिलने के बाद ही इस मामले में टिप्पणी की सकती है। टीसीपी एरिया में किसी भी जमीन की खरीद-फरोख्त से पूर्व टीसीपी विभाग की मंजूरी जरूरी है। बिना मंजूरी के राजस्व विभाग के अधिकारी जमीनों की रजिस्ट्री नहीं करवा सकते हैं।
-हरजिंदर सिंह, नगर योजनाकार हमीरपुर, टीसीपी विभाग
इन चार खसरा नंबर में चार पार्टियों की जमीन की खानगी तकसीम की गई है। जमीन की कोई खरीद-फरोख्त नहीं हुई है। यह मुस्तरका जमीन है।
-जगदीश, नायब तहसीलदार, हमीरपुर