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अपनी मांगों को लेकर गांधी चौक पर गरजीं आंगनबाड़ी और मिड डे मील वर्कर्स
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मांगों को लेकर गांधी चौक पर धरना प्रदर्शन करतीं आंगनबाड़ी व मिड डे मील कार्यकर्ता।
- फोटो : Hamirpur-HP
हमीरपुर। सीटू से संबंधित आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर और मिड डे मील वर्कर यूनियन ने शुक्रवार को अपनी मांगों को लेकर गांधी चौक हमीरपुर में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान इन कार्यकर्ताओं ने रोष रैली निकली और मांगों से जुड़ा ज्ञापन जिलाधीश के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा।
सीटू के जिला सचिव जोगिंद्र कुमार ने कहा कि इन कार्यकर्ताओं को सरकार से वेतन वृद्धि के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे हैं। 15-15 साल काम करने के बाद भी इन्हें न्यूनतम वेतन नहीं मिला है।
मिड डे मील वर्करों को तो 15 साल काम करने के बाद भी मात्र 2600 रुपये मासिक मिलते हैं। अब तो इनसे शपथपत्र लिए जा रहे हैं। इसके बाद इन्हें स्कूल प्रबंधन कमेटियों के हवाले किया जा रहा है। शपथपत्र में इनका वेतन 1000 रुपये मासिक निर्धारित किया गया है।
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इसी तरह आंगनबाड़ी केंद्रों को भी निजी हाथों के हवाले किया जा रहा है। प्रदेश सरकार डायरेक्ट वेनिफिट ट्रांसफर स्कीम को लागू करने जा रही है, जिससे लाभार्थियों को मिलने वाले लाभ अब सीधे बैंक खातों में जाएंगे। इससे हेल्परों का काम खत्म हो जाएगा और सबसे पहले उनकी नौकरियां जाएंगी। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने निजीकरण करने का विरोध किया और मांग उठाई की मिड डे मील वर्करों को जो 12 से 15 वर्षों से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें ही स्कूलों में मल्टी टास्क वर्कर रखा जाए। सरकार अपना वायदा पूरा करे और प्रदेश का न्यूनतम वेतन 9000 रुपये मासिक दे। स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने पर न निकाला जाए। प्राइमरी स्कूलों में शुरू की जा रही नर्सरी कक्षाओं में आंगनबाड़ी वर्करों को प्राथमिकता के आधार पर रखा जाए। क्योंकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को नर्सरी प्राध्यापकों की ट्रेनिंग दी जाती है और वे उसी सिलेबस को बच्चों को पढ़ाती हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो आने वाले समय में आंदोलन तेज कर दिया जाएगा। इस मौके पर सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर, जिला सचिव जोगिंदर कुमार, आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की जिला सचिव राजकुमारी, मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के जिला अध्यक्ष रतन चंद, सीटू जिला अध्यक्ष प्रताप राणा, सुरेश राठौर, कौशल्या पटियाल, उर्मिला, नीलम, रक्षा, सुरेश, मीरा सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। संवाद
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सीटू के जिला सचिव जोगिंद्र कुमार ने कहा कि इन कार्यकर्ताओं को सरकार से वेतन वृद्धि के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे हैं। 15-15 साल काम करने के बाद भी इन्हें न्यूनतम वेतन नहीं मिला है।
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मिड डे मील वर्करों को तो 15 साल काम करने के बाद भी मात्र 2600 रुपये मासिक मिलते हैं। अब तो इनसे शपथपत्र लिए जा रहे हैं। इसके बाद इन्हें स्कूल प्रबंधन कमेटियों के हवाले किया जा रहा है। शपथपत्र में इनका वेतन 1000 रुपये मासिक निर्धारित किया गया है।
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इसी तरह आंगनबाड़ी केंद्रों को भी निजी हाथों के हवाले किया जा रहा है। प्रदेश सरकार डायरेक्ट वेनिफिट ट्रांसफर स्कीम को लागू करने जा रही है, जिससे लाभार्थियों को मिलने वाले लाभ अब सीधे बैंक खातों में जाएंगे। इससे हेल्परों का काम खत्म हो जाएगा और सबसे पहले उनकी नौकरियां जाएंगी। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने निजीकरण करने का विरोध किया और मांग उठाई की मिड डे मील वर्करों को जो 12 से 15 वर्षों से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें ही स्कूलों में मल्टी टास्क वर्कर रखा जाए। सरकार अपना वायदा पूरा करे और प्रदेश का न्यूनतम वेतन 9000 रुपये मासिक दे। स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने पर न निकाला जाए। प्राइमरी स्कूलों में शुरू की जा रही नर्सरी कक्षाओं में आंगनबाड़ी वर्करों को प्राथमिकता के आधार पर रखा जाए। क्योंकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को नर्सरी प्राध्यापकों की ट्रेनिंग दी जाती है और वे उसी सिलेबस को बच्चों को पढ़ाती हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गई तो आने वाले समय में आंदोलन तेज कर दिया जाएगा। इस मौके पर सीटू के राष्ट्रीय सचिव डॉ. कश्मीर ठाकुर, जिला सचिव जोगिंदर कुमार, आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की जिला सचिव राजकुमारी, मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के जिला अध्यक्ष रतन चंद, सीटू जिला अध्यक्ष प्रताप राणा, सुरेश राठौर, कौशल्या पटियाल, उर्मिला, नीलम, रक्षा, सुरेश, मीरा सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। संवाद