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अमर उजाला शिक्षा अभियान : प्रमोट होते-होते तीसरी कक्षा में पहुंच गए बच्चे, आधार कमजोर
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घिरथेड़ी स्कूल में पढ़ाई के साथ गतिविधियां करते बच्चे।
- फोटो : Hamirpur-HP
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हमीरपुर। पहली कक्षा में पढ़ने वाले बच्चे प्रमोट होते-होते तीसरी कक्षा में पहुंच चुके है। इससे बच्चों का आधार भी कमजोर रहा है। अब शिक्षक इस सत्र के प्रथम दो माह बच्चों के आधार को मजबूत करने के लिए लगाएंगे और इन दो माह तक बेसिक शिक्षा का ज्ञान देंगे। बच्चों को बेसिक ज्ञान में जमा, गुना, भाग, सुलेख, अंग्रेजी कविताएं पढ़ाई जा रही हैं। कोरोना के कारण बच्चों और अध्यापकों में आई दूरी को कम करने के लिए शिक्षक बच्चों से अधिक संवाद कर रहे हैं।
स्कूलों में छोटी कक्षाओं के बच्चों को सूचना प्रौद्योगिकी, ऑडियो, वीडियो के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है।जिलाभर के स्कूलों में कोरोना काल में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए शिक्षकों ने नए सत्र से अतिरिक्त कक्षाएं लगाने की तैयारी कर ली है। दो साल घर में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों में कम लिखने और पढ़ने की आदत पड़ गई है। इसे सुधारने के लिए अध्यापक कक्षाओं में सुलेख, किताबें पढ़वाने के साथ अन्य गतिविधियां करवाएंगे। तनाव को दूर करने के लिए खेलकूद गतिविधियां करवाई जाएंगी। पढ़ाई को मनोरंजक बनाया जा रहा है। इसके लिए शिक्षकों की भी कार्यशालाएं लगाई जा रही हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों में कई नकारात्मक प्रभाव पड़े हैं। सोचने-समझने की शक्ति पर भी असर पड़ा है। ऐसी स्थिति में बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत करना शिक्षकों के लिए चुनौती है।
इस संदर्भ में प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक संजय ठाकुर का कहना है कि कोरोना के कारण बच्चों की पढ़ाई पर काफी असर पड़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए ऑफलाइन कक्षाओं में खेलकूद गतिविधियों के साथ अन्य आसान माध्यमों से पढ़ाया जाएगा। वहीं, शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को तनाव से दूर रखने के लिए रणनीति तैयार कर ली है। बच्चों की ज्यादातर खेलकूद गतिविधियां करवाई जाएंगी। विद्यार्थियों में आए बदलाव को ठीक करने के लिए सभी स्कूलों में अध्यापकों निर्देश जारी कर दिए है, ताकि बच्चे तनाव मुक्त होकर पढ़ाई कर सकें।
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अध्यापकों और बच्चों के बीच आई दूरी को किया जा रहा दूर : नरेश
राजकीय प्राथमिक पाठशाला घिरथेड़ी के सीएचटी नरेश शर्मा ने कहा दो वर्ष घरों में रहने से बच्चों में कई परिवर्तन आए हैं। ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चों व अध्यापकों में दूरी आ गई है। इसे अब स्कूलों में धीरे-धीरे दूर किया जा रहा है। इसके लिए बच्चों से सीधा संवाद काफी देर किया जा रहा है। छोटे बच्चों को एक्टिविटी आधारित शिक्षा दी जा रही है। स्कूल में छोटे बच्चों को खेलों, कंप्यूटर, वीडियो के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है।
बच्चों का आधार किया जा रहा मजबूत : ईशा
अध्यापिका ईशा का कहना है कि दो वर्ष घरों में रहे छोटे बच्चों का आधार कमजोर रहा है। इसे मजबूत करने के लिए अब दो माह तक इन बच्चों को आधारभूत शिक्षा दी जाएगी। इसमें जमा, गुणा, भाग, कविताएं, सुलेख आदि शामिल रहेगा। प्रवासी व गरीब बच्चों के पास पर्याप्त सुविधाएं न होने से पढ़ाई में पिछड़ गए हैं। इन्हें सभी के साथ लाने के लिए कक्षाओं में आधारभूत शिक्षा प्रदान की जा रही है, ताकि बच्चों को हर प्रकार से सिखाया जा सके।
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स्कूलों में छोटी कक्षाओं के बच्चों को सूचना प्रौद्योगिकी, ऑडियो, वीडियो के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है।जिलाभर के स्कूलों में कोरोना काल में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए शिक्षकों ने नए सत्र से अतिरिक्त कक्षाएं लगाने की तैयारी कर ली है। दो साल घर में रहकर ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों में कम लिखने और पढ़ने की आदत पड़ गई है। इसे सुधारने के लिए अध्यापक कक्षाओं में सुलेख, किताबें पढ़वाने के साथ अन्य गतिविधियां करवाएंगे। तनाव को दूर करने के लिए खेलकूद गतिविधियां करवाई जाएंगी। पढ़ाई को मनोरंजक बनाया जा रहा है। इसके लिए शिक्षकों की भी कार्यशालाएं लगाई जा रही हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों में कई नकारात्मक प्रभाव पड़े हैं। सोचने-समझने की शक्ति पर भी असर पड़ा है। ऐसी स्थिति में बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत करना शिक्षकों के लिए चुनौती है।
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इस संदर्भ में प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक संजय ठाकुर का कहना है कि कोरोना के कारण बच्चों की पढ़ाई पर काफी असर पड़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए ऑफलाइन कक्षाओं में खेलकूद गतिविधियों के साथ अन्य आसान माध्यमों से पढ़ाया जाएगा। वहीं, शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को तनाव से दूर रखने के लिए रणनीति तैयार कर ली है। बच्चों की ज्यादातर खेलकूद गतिविधियां करवाई जाएंगी। विद्यार्थियों में आए बदलाव को ठीक करने के लिए सभी स्कूलों में अध्यापकों निर्देश जारी कर दिए है, ताकि बच्चे तनाव मुक्त होकर पढ़ाई कर सकें।
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अध्यापकों और बच्चों के बीच आई दूरी को किया जा रहा दूर : नरेश
राजकीय प्राथमिक पाठशाला घिरथेड़ी के सीएचटी नरेश शर्मा ने कहा दो वर्ष घरों में रहने से बच्चों में कई परिवर्तन आए हैं। ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चों व अध्यापकों में दूरी आ गई है। इसे अब स्कूलों में धीरे-धीरे दूर किया जा रहा है। इसके लिए बच्चों से सीधा संवाद काफी देर किया जा रहा है। छोटे बच्चों को एक्टिविटी आधारित शिक्षा दी जा रही है। स्कूल में छोटे बच्चों को खेलों, कंप्यूटर, वीडियो के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है।
बच्चों का आधार किया जा रहा मजबूत : ईशा
अध्यापिका ईशा का कहना है कि दो वर्ष घरों में रहे छोटे बच्चों का आधार कमजोर रहा है। इसे मजबूत करने के लिए अब दो माह तक इन बच्चों को आधारभूत शिक्षा दी जाएगी। इसमें जमा, गुणा, भाग, कविताएं, सुलेख आदि शामिल रहेगा। प्रवासी व गरीब बच्चों के पास पर्याप्त सुविधाएं न होने से पढ़ाई में पिछड़ गए हैं। इन्हें सभी के साथ लाने के लिए कक्षाओं में आधारभूत शिक्षा प्रदान की जा रही है, ताकि बच्चों को हर प्रकार से सिखाया जा सके।