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Hamirpur (Himachal) News: आरती ने हुनर से बदली तकदीर, अब महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर
Thu, 23 Jul 2026 12:03 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर (हि. प्र.)
Updated Thu, 23 Jul 2026 12:03 PM IST
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ग्राम पंचायत सिकांदर के गांव ढांगू की आरती बैग तैयार करते हुए। स्रोत जागरूक पाठक
हमीरपुर। स्वरोजगार अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करना और फिर दूसरों को भी आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाना आसान नहीं होता। ग्राम पंचायत सिकांदर के गांव ढांगू की आरती ने यह कर दिखाया है।
उन्होंने आरसेटी से प्रशिक्षण लेकर बैग बनाने का काम शुरू किया और आज अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के गुर सिखा रही हैं। आरती ने बताया कि शुरुआत में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।
जब भी कोई ऑर्डर मिलता तो उसे समय पर पूरा करने के लिए कई बार पूरी रात जागकर काम करना पड़ता था। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज वह हर माह 10 से 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
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चार वर्षों में आरती ऊना, चंबा और हमीरपुर में महिलाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित कर चुकी हैं। वह केवल बैग ही नहीं बल्कि पेपर फाइल और डाक्यूमेंट लिफाफे भी तैयार कर रही हैं, जिससे उनकी आय के स्रोत और मजबूत हुए हैं।
आरती पहले घर पर ही ब्यूटी पार्लर का काम करती थीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आरसेटी से प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपना स्वरोजगार शुरू किया।
मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने ट्रेनर की परीक्षा भी उत्तीर्ण की और अब अन्य महिलाओं को बैग निर्माण का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं
आरती का कहना है कि चारदीवारी के भीतर रहकर भी सफलता की कहानी लिखी जा सकती है। आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उन्होंने महिलाओं से हस्तकला और कौशल आधारित कार्य सीखकर अपने सपनों को साकार करने का आह्वान किया।
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उन्होंने आरसेटी से प्रशिक्षण लेकर बैग बनाने का काम शुरू किया और आज अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के गुर सिखा रही हैं। आरती ने बताया कि शुरुआत में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा।
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जब भी कोई ऑर्डर मिलता तो उसे समय पर पूरा करने के लिए कई बार पूरी रात जागकर काम करना पड़ता था। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज वह हर माह 10 से 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
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चार वर्षों में आरती ऊना, चंबा और हमीरपुर में महिलाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित कर चुकी हैं। वह केवल बैग ही नहीं बल्कि पेपर फाइल और डाक्यूमेंट लिफाफे भी तैयार कर रही हैं, जिससे उनकी आय के स्रोत और मजबूत हुए हैं।
आरती पहले घर पर ही ब्यूटी पार्लर का काम करती थीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आरसेटी से प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने अपना स्वरोजगार शुरू किया।
मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने ट्रेनर की परीक्षा भी उत्तीर्ण की और अब अन्य महिलाओं को बैग निर्माण का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं
आरती का कहना है कि चारदीवारी के भीतर रहकर भी सफलता की कहानी लिखी जा सकती है। आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उन्होंने महिलाओं से हस्तकला और कौशल आधारित कार्य सीखकर अपने सपनों को साकार करने का आह्वान किया।